
पटना: दिल्लीमे प्रधानमंत्री Narendra Modi सँ बिहारक कृषि मंत्री Vijay Kumar Sinha क मुलाकात भले औपचारिक कहल जा रहल हो, मुदा बिहारक राजनीतिक गलियारा मे एकर अलग-अलग मायने निकालल जा रहल अछि। कारण सिर्फ मुलाकात नहि, बल्कि एकर समय सेहो अछि।
चर्चा अछि जे विजय सिन्हा अपन वर्तमान भूमिका सँ पूर्णतः संतुष्ट नहि छथि। हुनकर नाराजगी आब बंद कमरासँ बाहर आबि सार्वजनिक संकेतमे बदलैत देखल जा रहल अछि। “परीक्षाक समय सब्जेक्ट चेंज” वाला हुनकर बयान एहि पीड़ाक झलक देलक। हुनका लगैत अछि जे भूमि सुधार आ राजस्व जेकाँ महत्वपूर्ण विभाग हुनका सँ लऽ क’ हुनकर राजनीतिक कद सीमित करबाक प्रयास भेल।
पटना मे जखन हुनकर बेचैनी केँ गंभीरता सँ नहि लेल गेल, तँ ओ सीधा दिल्ली पहुँचि गेलाह। सीधे ओहि नेता लग, जिनकर राय भाजपा मे अंतिम मानल जाइत अछि—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
सूत्रक अनुसार, दुनू नेताक बीच लगभग 45 मिनट तक बातचीत भेल। आधिकारिक रूप सँ एहि भेटमे कृषि, संगठन आ बिहारक राजनीतिक परिस्थिति पर चर्चा भेल। मुदा राजनीति मे भेट सिर्फ औपचारिकता लेल नहि होइत अछि। टाइमिंग, माहौल आ संकेत सेहो बहुत किछु कहि जाइत अछि।
प्रधानमंत्री मोदी नेता सभ केँ परखबाक अपन अलग तरीका रखैत छथि। ओ सिर्फ जातीय समीकरण वा संगठनात्मक रिपोर्ट पर निर्भर नहि रहैत छथि, बल्कि देखैत छथि जे कठिन समयमे केतेक नेता मजबूती सँ ठाढ़ रहैत छथि।
बिहार भाजपा मे एकर सबसे पैघ उदाहरण Giriraj Singh छथि। 2013 मे जखन बिहारक तत्कालीन मुख्यमंत्री Nitish Kumar भाजपा सँ नाराज छलाह आ पार्टीक भीतर मोदीक समर्थन खुलिक’ करब आसान नहि छल, तखन गिरिराज सिंह निर्भीक भ’ क’ मोदीक समर्थनमे ठाढ़ रहलाह।
2014 लोकसभा चुनावक दौरान जखन गिरिराज सिंह बेगूसराय सँ लड़बाक इच्छुक छलाह, मुदा पार्टी हुनका नवादा पठेलक, तखन सेहो मोदी हुनकर संग ठाढ़ रहलाह। कहल जाइत अछि जे मोदी स्वयं कहलनि—“अहाँ नवादा सँ लड़ू, हम प्रचार करब।” परिणामस्वरूप गिरिराज सिंह भारी मत सँ विजयी भेलाह आ धीरे-धीरे प्रधानमंत्रीक विश्वासपात्र नेता सभमे शामिल भ’ गेलाह।
राजनीतिक जानकारक मानब अछि जे विजय कुमार सिन्हा केँ ल’ क’ सेहो प्रधानमंत्री मोदीक सोच बाकी नेता सभ सँ अलग भ’ सकैत अछि। 30 मई 2025 केँ बिहार दौरा पर आएल प्रधानमंत्री मोदीक कार्यक्रममे एकर संकेत भेटल। पटना एयरपोर्ट आ बिहटा एयरपोर्ट शिलान्यास कार्यक्रमक बाद अचानक प्रधानमंत्री राजभवन जाएबक बदला विजय सिन्हाक घर गेलाह, जतय हुनकर पुत्र गोविंदक सगाई समारोह चलि रहल छल।
एहि निर्णय राजनीतिक हलकामे चर्चाक विषय बनि गेल। सुरक्षा प्रोटोकॉलक बीच अचानक कार्यक्रम बदलनाय साधारण घटना नहि मानल गेल।
आब सवाल उठैत अछि जे की एहि मुलाकातक बाद बिहार भाजपा मे कोनो नव संदेश जाएत? विजय सिन्हा संगठनक पुरान कार्यकर्ता छथि। आक्रामक हिंदुत्व, स्पष्ट बयान आ कार्यकर्ता सभमे पकड़ हुनकर ताकत मानल जाइत अछि। मुदा हालक समयमे ओ स्वयं केँ सीमित महसूस क’ रहल छथि।
एहन परिस्थिति मे दिल्ली यात्रा सिर्फ शिष्टाचार भेट नहि मानल जा रहल अछि। बिहार भाजपा आब एहि बातक संकेत खोजि रहल अछि जे प्रधानमंत्री मोदी विजय सिन्हाक बात सिर्फ सुनलनि, वा ओकरा गंभीरता सँ सेहो लेलनि।
राजनीतिक विश्लेषक मानैत छथि—भाजपा राजनीति मे एक बात हमेशा याद राखल जाइत अछि, दिल्लीमे जँ प्रधानमंत्री कोनो नेता केँ समय द’ देथि, तँ पटना मे ओकर राजनीतिक मायने अपने बदलि जाइत अछि।