यूरिया आयातक कीमतिमे करीब 10 प्रतिशत गिरावट, किसानसभके राहत भेटबाक उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजारमे यूरियाक कीमतिमे अगस्त महिनाक तुलनामे करीब 10 प्रतिशत गिरावट दर्ज कयल गेल अछि। एहि गिरावटसँ आगामी रबी सीजनमे गहुम, सरिसों आ चना सन फसलक बुआइ लेल तैयारी कऽ रहल भारतीय किसानसभके राहत भेटबाक उम्मीद अछि। यूरिया आयातक लागत घटलासँ सरकार पर उर्वरक सब्सिडीक बोझ सेहो कम भऽ सकैत अछि।

इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) द्वारा आयोजित यूरिया आयात निविदामे पश्चिमी तट लेल 356.25 डॉलर सँ 416.50 डॉलर प्रति टन आ पूर्वी तट लेल 352.10 डॉलर सँ 465 डॉलर प्रति टन तकक बोली भेटल अछि। एहि निविदामे दुनू तट लेल निर्धारित मात्रासँ दू गुणासँ बेसी यूरिया उपलब्ध करयबाक प्रस्ताव देल गेल।

एकर पहिने अगस्तमे भारत 390.25 डॉलर सँ 393.65 डॉलर प्रति टनक दरसँ यूरिया खरीदने छल। नव निविदामे किछु कम दरक बोली भेटलासँ आयात लागत घटबाक संकेत भेटल अछि। हालांकि, अंतिम खरीद मूल्य निविदाक परिणाम आ तय होयवला आपूर्तिक मात्रा पर निर्भर करत।

पश्चिम एशियामे संघर्षसँ बढ़ल छल कीमत

एहि वर्षक शुरुआतमे ईरानमे युद्ध आ पश्चिम एशियामे आपूर्ति संबंधी बाधाक कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारमे यूरियाक कीमत तेजी सँ बढ़ि गेल छल। संघर्ष शुरू होयबाक समय भारतके यूरिया लेल 959 डॉलर प्रति टन तक कीमत चुकाबय पड़ल छल।

बादमे आपूर्तिक बाधा कम होय आ वैश्विक मांग कमजोर पड़लासँ कीमतिमे गिरावट आयल। आब रबी सीजनसँ पहिने यूरियाक कीमत कम होयब भारतीय कृषि क्षेत्र लेल राहतक संकेत मानल जा रहल अछि।

सरकारक सब्सिडी खर्च पर पड़ि सकैत अछि असर

भारत दुनिया के प्रमुख उर्वरक आयात करयवला देशसभमे शामिल अछि। यूरिया आयातक लागतमे बदलावक असर देशक उर्वरक आपूर्ति आ सरकारी खर्च पर पड़ैत अछि।

भारतमे किसानसभके यूरिया रियायती दर पर उपलब्ध कराओल जाइत अछि। यूरियाक वास्तविक लागत आ किसानसभसँ लेल जाएवला कीमतक बीचक अंतर सरकार सब्सिडीक माध्यमसँ वहन करैत अछि।

एहि कारण आयात लागत घटलासँ सरकारक उर्वरक सब्सिडी खर्च पर दबाव कम भऽ सकैत अछि। हालांकि, वास्तविक बचत आयातक अंतिम कीमत, खरीदल जाएवला मात्रा आ अन्य खर्च पर निर्भर करत।

किसानसभके कतेक राहत भेटत?

अंतरराष्ट्रीय बाजारमे यूरियाक कीमतिमे गिरावट किसानसभ लेल सकारात्मक संकेत अछि। मुदा एकर सीधा लाभ किसानसभ तक कतेक पहुंचत, ई घरेलू आपूर्ति, सरकारी नीति आ आगामी खरीदक परिणाम पर निर्भर करत।

रबी सीजनमे गहुम, सरिसों आ चना सन फसलक बुआइ लेल समय पर उर्वरक उपलब्ध होयब महत्वपूर्ण अछि। एहन स्थिति मे यूरियाक पर्याप्त उपलब्धता आ सरकारी सब्सिडीक निरंतरता किसानसभ लेल विशेष महत्व रखैत अछि।

कुल मिलाकऽ, यूरिया आयातक कीमतिमे करीब 10 प्रतिशत गिरावटसँ भारतक उर्वरक बाजार आ सरकारी सब्सिडी खर्च पर सकारात्मक असर पड़बाक उम्मीद अछि। आब देखबाक होयत जे अंतरराष्ट्रीय बाजारक एहि बदलावक लाभ किसानसभ तक कोन सीमा तक पहुंचैत अछि।

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