
प्रयागराज। आदिकाल सँ आस्थाक केन्द्र रहल त्रिवेणी संगम कें लऽ कऽ आब विज्ञान सेहो नव बहस शुरु देलक अछि। वैज्ञानिक सभक दावा छन्हि जे प्रयागराज संगमक नीचाँ जमीनक भीतर एकटा विशाल प्राचीन नदीक चिन्ह भेटल अछि। एहि खोजक बाद फेर ई जिज्ञासा तेज भऽ गेल अछि—की इहए ओ अदृश्य ‘सरस्वती’ नदी अछि, जकर उल्लेख वेद-पुराणमे भेटैत अछि?
हैदराबादक CSIR-NGRI (नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) के वैज्ञानिक सभ आधुनिक भू-भौतिकीय तकनीक आ ड्रिलिंग केर माध्यम सँ प्रयागराज सँ कानपुर धरि जमीनक भीतर दबि चुकल एकटा विशाल नदी चैनलक पहचान केने छथि।
वैज्ञानिक सभक अनुसार—
ई प्राचीन नदी जमीन सँ लगभग 10 सँ 15 मीटर नीचाँ दबल अछि। एकर चौड़ाइ करीब 4 सँ 5 किलोमीटर धरि अछि।
अखन धरि लगभग 200 किलोमीटर लंबा हिस्सा चिन्हित कएल जा चुकल अछि। ई धारा गंगा आ यमुनाक बीचसँ गुजरैत अछि। संगहि एकर संरचना विशाल प्राकृतिक नदी सन देखाइ पड़ैत अछि।
वैज्ञानिक सभ एहि शोध मे Heliborne Transient Electromagnetic Technology (H-TEM) तकनीक के उपयोग केने छथि। जाहि मे हेलीकॉप्टरक माध्यमसँ जमीनक भीतरक संरचनाक स्कैनिंग कएल गेल छल। बाद मे ड्रिलिंग कऽ माटि आ तलछटक नमूना सेहो जुटाओल गेल।
विशेषज्ञ सभक मानब अछि जे ई सामान्य सूखल नाला नहि, बल्कि एकटा स्वतंत्र आ विशाल नदी प्रणालीक संकेत अछि।
एहि खोजक बाद सबसँ पैघ सवाल अछि जे कि ई वास्तव मे सरस्वती नदी के भूगर्भीय अवशेष अछि?। वैज्ञानिक सभ अखन धरि आधिकारिक रूपसँ एहि नदी केँ “सरस्वती” नहि कहलनि अछि, मुदा हुनकर मानब अछि जे, एहि खोज सँ त्रिवेणी संगम मे तेसर अदृश्य नदी केर धार्मिक मान्यता कें बल भेटैत अछि। संगहि नदी के दिशा आ स्थान सेहो सरस्वती नदी के प्राचीन वर्णन सँ काफी मेल खाइत अछि। तथापि अंतिम निष्कर्ष लेल अखन आओर शोध जरूरी अछि।
सरस्वती नदी के इतिहास सनातन आस्था स जुड़ल अछि। हिंदू धर्मग्रंथ, विशेष रूप सँ ऋग्वेद आ पुराणसभ मे सरस्वती नदीक विशेष उल्लेख भेटैत अछि। मान्यता अछि जे प्रयागराजक संगम मे गंगा, यमुना आ अदृश्य सरस्वती नदी के मिलन होइत अछि।
भारतीय सभ्यता, ज्ञान आ संस्कृति संग सेहो सरस्वती नदीक गहिंर संबंध मानल जाइत रहल अछि।
ई खोज वैज्ञानिक दृष्टिसँ बहुत महत्वपूर्ण अछि। विशेषज्ञ सभक अनुसार ई खोज मात्र आस्था आ धार्मिक दृष्टिए टा नहि, अपितु भू-विज्ञान आ जल प्रबंधन लेल सेहो बहुत महत्वपूर्ण अछि। ई भूगर्भीय नदी भविष्यक लेल पैघ भूजल स्रोत भऽ सकैत अछि, जाहि सँ क्षेत्र मे जल संकट दूर करबा मे मददि भेटि सकैत अछि।
गंगा बेसिनक भूजल स्तर सुधारबाक दिशा मे सेहो ई उपयोगी साबित भऽ सकैत अछि।
तथापि मुख्य सवाल अछि जे संगमक ठीक नीचाँ धरि किएक नहि पहुँचि सकल शोध? वैज्ञानिक सभक अनुसार प्रयागराज शहर मे भारी निर्माण, बिजली लाइन आ शहरी अवरोधक कारणे संगम क्षेत्रक सटीक हवाई सर्वेक्षण मे कठिनाई आयल छल। एकर बादो प्रारंभिक संकेत काफी महत्वपूर्ण मानल जा रहल अछि।
प्रयागराज संगमक नीचाँ भेटल ई संभावित प्राचीन नदी भारतक इतिहास, आस्था आ विज्ञान, तीनू दृष्टिए अत्यंत महत्वपूर्ण खोज मानल जा रहल अछि। यद्यपि अखन एहि खोजक बादो अकरा आधिकारिक रूपसँ “सरस्वती नदी” नहि कहल गेल अछि, मुदा एहि खोज सँ आदिकाल सँ चलि आबि रहल मान्यता कें नव वैज्ञानिक आधार अवश्य भेटल अछि। आबय बला समय मे आओर शोध एहि रहस्य सँ बेसी पर्दा उठा सकैत अछि।