
मुजफ्फरपुर। जाहि मकई के छिलका काल्हि धरि खेत मे फेकल जाइत छल, आइ ओहि छिलका सँ पर्यावरण-अनुकूल कप, प्लेट आ पैकेजिंग सामग्री बनाकऽ मुजफ्फरपुरक युवा नवप्रवर्तक नाज ओजैर देशभरि चर्चा मे छथि। हुनक अभिनव सोच कें भारतीय रेलवे सेहो प्रशंसा केलक आ करीब 30 लाख रुपया के ऑर्डर दऽ हुनक उपलब्धि के नव पहचान देलक।
नाज ओजैर मकई के बेकार छिलका केँ वैज्ञानिक प्रक्रिया सँ उपयोगी जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) उत्पाद मे बदललनि। हुनकर बनाओल कप, प्लेट आ अन्य उत्पाद पूर्णतः प्लास्टिक-मुक्त, पर्यावरण-अनुकूल आ खाद्य उपयोग लेल सुरक्षित मानल जा रहल अछि। ई उत्पाद प्लास्टिकक विकल्पक रूप मे तेजी सँ लोकप्रिय भऽ रहल अछि।
हुनकर ई नवाचार खाली पर्यावरण संरक्षण धरि सीमित नहि अछि, बल्कि किसानसभक लेल सेहो आय केर अतिरिक्त स्रोत बनि रहल अछि। नाज स्थानीय किसानसभ सँ मकई के छिलका खरीदैत छथि। जे कृषि अवशेष पहिने बेकार मानल जाइत छल, आब ओहि सँ किसानसभ कें आर्थिक लाभ भेटि रहल अछि।
भारतीय रेलवे द्वारा देल गेल लगभग 30 लाख रुपयाक ऑर्डर एहि स्टार्टअप लेल महत्वपूर्ण उपलब्धि मानल जा रहल अछि। रेलवे के ई भरोसा स्पष्ट करैत अछि जे स्वदेशी नवाचार आ पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद आब सरकारी संस्थानसभक प्राथमिकता मे शामिल भऽ रहल अछि।
नाज ओजैरक कहब अछि जे कृषि अपशिष्ट के उपयोगी संसाधन मे बदलिकऽ पर्यावरण संरक्षण, किसानक आमदनी आ रोजगार—तीनू लक्ष्य एक संग हासिल कएल जा सकैत अछि। हुनकर प्रयास ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) अवधारणाक सफल उदाहरण बनि गेल अछि।
मुजफ्फरपुर सँ शुरू भेल ई अभिनव पहल आब देशभरिक युवा उद्यमीसभक लेल प्रेरणाक स्रोत बनि रहल अछि। ई नवाचार साबित करैत अछि जे नव सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण आ दृढ़ संकल्प सँ साधारण वस्तुओ असाधारण उत्पाद के रूप मे बहुपयोगी बनि सकैत अछि।