गोटनक बाईसा स्नेह मिलन देखौलक जे राजस्थानक सबसँ पैघ धरोहर बेटीसभक सम्मानमे धड़कैत संबंध अछि

नागौर (गोटन)। राजस्थान एहि दिनसभमे अपन एकटा अनूठ आ सदियौँ पुरान परंपराकेँ फेर सँ जीवित करबाक अभियानमे जुटल अछि। ई परंपरा परिवारक बेटीसभ सँ जुड़ल अछि। राज्यभरिमे बाईसा मिलन समारोहक आयोजन गाम-गाममे धूमधाम सँ भऽ रहल अछि, जाहिमे पूरा गाम देश-विदेशमे बसल अपन बहिन-बेटीसभकेँ घर आबयक निमंत्रण दैत अछि। हुनकर आगमन पर हजारों परिवार पलक-पाँवड़े बिछा कऽ भव्य स्वागत आ सत्कार करैत छथि।

एहि पहलि राजस्थान पर्यटन विभागक प्रसिद्ध ध्येय वाक्य ‘पधारो म्हारे देश’ केँ नव रूप दैत आब कहबाक शुरुआत भेल अछि— ‘आवो नी पधारो आपणे देश।’

समारोहक दौरान कालबेलिया, चरी आ कच्छी घोड़ी जेकाँ लोकनृत्यक प्रस्तुति राजस्थानक रंग-बिरंग संस्कृति केँ जीवंत बना देलक। मशक वादन आ लोकगीतक मधुर स्वर सँ ई अनुभूति भेल जे राजस्थानक सांस्कृतिक धरोहर आइयो ग्रामीण जीवनमे स्पंदित भऽ रहल अछि।

हालहिमे नागौर जिलाक गोटन गाममे आयोजित दू-दिवसीय बाईसा स्नेह मिलन समारोह एहि जीवंत परंपराक उत्कृष्ट उदाहरण बनि सामने आयल। एहि समारोहमे दिल्ली, मुंबई, पुणे, चेन्नई सँ लऽ कनाडा धरि बसल गामक बेटीसभ सहभागी बनलीह। हुनका सभ ई संदेश देलनि जे बाबुलक घर कहियो छुटैत नहि अछि, केवल सम्मानपूर्वक बोलाबयक आवश्यकता होइत अछि, तऽ बेटीसभ सात समुंदर पार सँ सेहो अपन गाम लौटि अबैत छथि।

बहिन, बेटी, बुआ, मौसी आ भाभीक रूपमे अपन गाम पहुँचल महिला सभक चेहरापर संतोषक झलक आ बचपनक स्मृतिकेँ फेर सँ जीबाक उत्साह साफ देखल गेल। एहि आयोजनक कारण बाईसा समारोह राजस्थानमे ग्रामीण पर्यटनक नव मॉडल बनैत देखाइ पड़ि रहल अछि।

चारि पीढ़ीक अद्भुत संगम

समारोहक सबसँ भावुक दृश्य ओ छल जखन एकहि मंच पर दादी, माय, बेटी आ नातिन— परिवारक चारि पीढ़ी एक संग उपस्थित छलथि। ई केवल पारिवारिक मिलन नहि, बल्कि राजस्थानक सांस्कृतिक निरंतरता, महिला सम्मान आ सामाजिक एकताक प्रतीक बनि गेल।

पर्यटनक नव सोच

राजस्थान पर्यटन विभागक संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ केर अनुसार, जखन पर्यटन विशेषज्ञ ‘एक्सपीरियंस टूरिज्म’ आ ‘कम्युनिटी बेस्ड टूरिज्म’क चर्चा करैत छथि, तकर वास्तविक स्वरूप गोटन जेकाँ आयोजनमे देखल जा सकैत अछि। एतय आगन्तुक केवल दर्शक नहि रहैत छथि, बल्कि स्थानीय संस्कृति, लोक परंपरा आ सामाजिक जीवनक सक्रिय सहभागी बनि जाइत छथि।

बेटीक सम्मानक उत्सव

बाईसा स्नेह मिलनक मूल उद्देश्य बेटी आ महिला सम्मान रहल। चुनरी ओढ़ा कऽ, पुष्पवर्षा कऽ आ पारंपरिक रीति-रिवाज सँ बेटीसभक स्वागत कएल गेल। वक्तासभ बालिका शिक्षा, महिला आत्मनिर्भरता आ सामाजिक कुरीतिक उन्मूलन पर विशेष जोर देलनि।

ग्रामीण पर्यटनक वैश्विक संभावना

पर्यटन विशेषज्ञ महेन्द्र सिंह राठौड़ केर अनुसार, राजस्थानक पर्यटन आब केवल किला, महल आ स्मारक धरि सीमित नहि रहल अछि। भविष्यक पर्यटन ओहि अनुभव पर आधारित होयत जे पर्यटककेँ स्थानीय समाज सँ जोड़ि सकय। गोटनक ई आयोजन देखबैत अछि जे सामुदायिक उत्सवसभकेँ पर्यटन कैलेंडरक हिस्सा बना कऽ ग्रामीण राजस्थान वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नव पहचान बना सकैत अछि।

विरासत जे भविष्य गढ़ैत अछि

समारोह सँ जुड़ल डॉ. वी.एस. राठौड़ऋषिराज सिंह कहलनि जे राजस्थानक संस्कृति केवल इतिहासक कथा नहि, बल्कि वर्तमानमे जीबैत जीवनशैली अछि। एतय लोकनृत्य मनोरंजन मात्र नहि, लोकस्मृति अछि; चुनरी केवल वस्त्र नहि, सम्मानक प्रतीक अछि; आ चारि पीढ़ीक एक मंच पर उपस्थित रहब सांस्कृतिक विरासतक जीवंत दस्तावेज अछि।

गोटनक बाईसा स्नेह मिलन एकटा स्पष्ट संदेश दऽ समाप्त भेल— जखन बेटीक सम्मान, महिलाक नेतृत्व आ परंपराक संरक्षण एक संग आगाँ बढ़ैत अछि, तखन समाज आ संस्कृति दुनू समृद्ध होइत अछि। ईहे राजस्थानक असली पहचान आ ओकर सबसँ पैघ पर्यटन संपदा अछि।

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