सिखा दिय’ हे भारती

 

सिखा दिय’ हे भारती
हमरो लोकगीतक मीठ गान
ज्ञानक किछु पाँति सँ
करा दिय’ किछु मधुपान।
खेतक हरियाली देखि
फूलक किशलय देखि
अर्धनारीश्वरक आकृति देखि
पंछी सभक स्वर सुइन
समाज ओ संस्कृति केँ परखैत
जग मे भटकैत सिखय छी अहाँ
मुदित भाट कवि सन अप्पन पाठ
आ कहय छी अप्पन बात।
हे वाग् पुत्री सखि ! हमरो सुनाउ
अभिनवगुप्त कृत किछु स्वप्न गान
परिचित छी अहाँ सँ हम हे भारती
करै छी अहाँ सुन्दर कविता गान।

 


– रिपुंजय कुमार ठाकुर

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