
कोलकाता: पश्चिम बंगालक राजनीति मे एक बेर फेर हलचल तेज भ’ गेल अछि। विधानसभा चुनाव 2026 मे सत्ता गँवाबाक बाद आंतरिक कलह सँ जूझि रहल तृणमूल कांग्रेस (TMC) सोमदिन एक पैघ अनुशासनात्मक कार्रवाई करैत अपन दू वर्तमान विधायक—संदीपान साहा आ ऋतब्रत बनर्जी—केँ पार्टी विरोधी गतिविधिमे संलिप्त रहबाक आरोपमे तत्काल प्रभाव सँ निष्कासित क’ देलक। एहि निर्णयक बाद बंगालक सियासत मे नव राजनीतिक समीकरण केँ ल’ चर्चाक बाजार गर्म भ’ गेल अछि।
पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक बयानमे कहल गेल अछि जे दुनू विधायकक व्यवहार लगातार पार्टीक नीति आ संगठनात्मक हितक खिलाफ पाओल गेल। ताजा कार्रवाईक मुख्य कारण रविदिन कालीघाट स्थित पार्टी प्रमुख ममता बनर्जीक आवास पर बुलाई गेल महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकमे हुनकर अनुपस्थिति मानल जा रहल अछि। चुनावी हारक बाद संगठनक रणनीति आ भविष्यक दिशा तय करबाक लेल ई बैठक बुलाई गेल छल, मुदा दुनू विधायक एहि बैठकमे शामिल नहि भेलाह।
TMC अपन बयानमे ईहो स्पष्ट कयलक जे दुनू नेता सार्वजनिक मंच आ निजी बैठकसभमे एहन बयान द’ रहल छलाह, जाहि सँ पार्टीक हित केँ नुकसान पहुँचि रहल छल। एकरा गंभीर अनुशासनहीनता मानैत शीर्ष नेतृत्व कड़ा निर्णय लेलक।
निष्कासन पत्रमे कहल गेल अछि, “गंभीर विचार-विमर्शक बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसक सक्षम प्राधिकारी अहाँकेँ तत्काल प्रभाव सँ पार्टीक प्राथमिक सदस्यता सँ निष्कासित करबाक निर्णय लेने छथि। एहि आदेशक बाद अहाँ पार्टी सँ जुड़ल कोनो पद, दायित्व वा विशेषाधिकारक अधिकारी नहि रहब।”
राजनीतिक जानकारसभक मानब अछि जे विधानसभा चुनावमे हारक बाद सँ तृणमूल कांग्रेसक भीतर असंतोष लगातार बढ़ि रहल अछि। लम्बा समय धरि सत्ता मे रहलाक बाद विपक्षक भूमिका स्वीकार करब पार्टीक अनेक नेता आ विधायक लेल सहज नहि भ’ रहल अछि। एहि परिस्थिति मे संगठनक भीतर नेतृत्व केँ ल’ सवाल उठए लागल अछि।
सूत्रसभक अनुसार, संदीपान साहा आ ऋतब्रत बनर्जीक निष्कासन मात्र शुरुआत भ’ सकैत अछि। पार्टीक कतेको अन्य नेता सेहो अंदरखाने असंतोष जता रहल छथि आ आगामी दिनमे तृणमूल केँ आरो झटका लागि सकैत अछि।
ममता बनर्जी एहि कार्रवाईक माध्यम सँ स्पष्ट संदेश देबाक प्रयास कयने छथि जे पार्टी अनुशासन सँ कोनो तरहक समझौता नहि करत। हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकसभक मानब अछि जे ई कदम असंतुष्ट नेतासभ केँ शांत करबाक बजाय पार्टीक भीतर चलि रहल मतभेद केँ आरो उजागर क’ सकैत अछि।
आब सबहक नजर एहि बात पर टिकल अछि जे की ममता बनर्जीक ई सख्त रुख तृणमूल कांग्रेसक भीतर संभावित पैघ विद्रोह केँ रोकि पाओत, वा फेर बंगालक राजनीति मे नव राजनीतिक पुनर्संरचनाक शुरुआत होयत।