दिल्लीक भारत मंडपम में विज्ञानक महाकुंभ: ‘इस्टिक 2026’ मे गहन-तकनीकी नवप्रवर्तन आ आत्मनिर्भर भारतक हुंकार

 
डॉ. अणुव्रत झा
नई दिल्ली। भारत मंडपम में चलि रहल उद्गामी विज्ञान, प्रौद्योगिकी आ नवप्रवर्तन महासम्मेलन (ESTIC 2026) कें दोसर दिन देशक वैज्ञानिक आ तकनीकी आत्मनिर्भरताक लेल ऐतिहासिक साबित भेल। भारत सरकार कें प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय कें मार्गदर्शन मे वैज्ञानिक आ औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा आयोजित एहि महाकुंभ मे देशक 13 मंत्रालय एक साथ जुटि क’ नव भारतक तकनीकी मार्गचित्र तैयार क’ रहल छथि।
महासम्मेलन कें दोसर दिनक मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीक ओहि ‘3-वर्षीय नवप्रवर्तन अधिदेश’ पर गहन विमर्श रहल, जाहि मे शोधकर्ता आ नवउद्यमी (स्टार्टअप) सबकें तीन साल के भीतर योग्य परिणाम देबाक लक्ष्य देल गेल अछि।
महासम्मेलन कें दोसर दिनक मुख्य बिंदु :
* गहन-तकनीकी (डीप-टेक) प्रदर्शनी आम लोकक लेल खुजल : लगभग 150 स्वदेशी गहन-तकनीकी नवउद्यम सबहक पटल (स्टॉल) आम जनता आ उद्योग जगतक लेल खोलि देल गेल। एहि मे मुख्य रूप सँ स्वदेशी अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) आ मात्रा (क्वांटम) संचार कें क्षेत्र में भेल स्थानीय सुधारक जीवंत प्रदर्शन कएल गेल।
* ‘वैश्विक जुड़ाव’ (ग्लोबल कनेक्ट) कें शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान साझेदारी कें मजबूत करबाक लेल एहि विशेष पहलक शुरुआत भेल, जाहि मे दुनिया भरक शिक्षाविद, शोध संस्थान आ उद्योग जगत सँ 300 सँ बेसी आमंत्रित देशी-विदेशी वैज्ञानिक हिस्सा लेलनि।
* नोबेल विजेताओं कें विशेष व्याख्यान
• प्रो. जोआचिम फ्रैंक : कोलंबिया विश्वविद्यालय कें नोबेल विजेता प्रो. फ्रैंक ‘अतिशीत-इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी’ (क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी) पर अपन विशेष व्याख्यान देलनि। ओ बतौलनि जे कोना संगणकीय ढांचा कें मदद सँ वृहदअणुक परिसर कें त्रिविमीय (3D) चित्रण कएल जा सकैत अछि, जाहि सँ चिकित्सा क्षेत्र मे क्रांति आउत।
• सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स आ प्रो. कोस्त्या नोवोसेलोव : जीवन विज्ञान आ ग्राफीन (उन्नत सामग्री) कें भविष्यक उपयोग पर अपन महत्वपूर्ण विचार साझा कएलनि।
रणनीतिक सत्र आ तकनीकी विमर्श
1. मात्रा संचार आ अर्धचालक निर्माण : प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद देश मे मात्र चिपक रूपरेखा (डिजाइनिंग) धरि सीमित नहि रहि, देशक भीतरे अर्धचालक निर्माण शाला (फैब यूनिट्स) कें बुनियादी ढांचा कें मजबूत करबाक वकालत कएलनि। राष्ट्रीय मात्रा मिशन कें तहत प्रयोगशाला सँ व्यावसायिक स्तर धरि क्वांटम संजाल कें पहुँचेबाक गप्प कहल गेल।
2. तंत्र आ संश्लेषित जीव विज्ञान (सिंथेटिक बायोलॉजी) : डॉ. रमेश वी. सोंती कें नेतृत्व मे भेल एहि सत्र मे कृत्रिम मेधा (AI) आ अभियान्त्रिकी कें एक संग आनिक’ नव दवाई सब आ पर्यावरण कें अनुकूल जैविक समाधान तेजी सँ विकसित करबाक खाका तैयार कएल गेल।
3. भौतिक कृत्रिम मेधा (फिजिकल AI) आ यंत्रीकरण : विज्ञान आ प्रौद्योगिकी विभाग कें सचिव प्रोफेसर उमेश वाघमारे कहलनि जे भविष्य मात्र सॉफ्टवेयर आधारित AI कें नहि, बल्कि भौतिक रूप सँ काज करय वाला रोबोटिक्स आ भौतिक कृत्रिम मेधाक अछि, जाहि सँ उन्नत विनिर्माण आ सटीक कृषि कें बल भेटत।
महासम्मेलन कें दोसर दिनक गप्प सँ ई स्पष्ट अछि जे ई आयोजन अनुसंधान, उद्योग आ नीति निर्मातासभक बीचक दूरी कें कम क’ क’ भारत कें वैश्विक विज्ञान कें मंच पर शीर्ष पर बैसेबाक ठोस प्रयास अछि।

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