भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केँ सफल बनेबा लेल वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था मजबूत करबाक जरूरत : न्यायमूर्ति सूर्यकांत

लंदन: भारतक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत लंदन में आयोजित इंडियन काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन (ICA) केर चौठम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “इंडो-यूके वाणिज्यिक विवादक मध्यस्थता” केँ संबोधित करैत कहलनि जे भारत आ यूनाइटेड किंगडमक बीच गत वर्ष सम्पन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) केर आकांक्षाक साकार रूप देबा लेल वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र केँ आओर सशक्त बनेनाय आवश्यक अछि।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत कहलनि जे संस्थागत मध्यस्थता (Institutional Arbitration) केँ मजबूत करबाक आवश्यकता अछि, जाहिसँ पक्षकारक स्वायत्तता प्रक्रियागत निष्पक्षताक गारंटी बनल रहय, नहि कि विवादक कारण।

भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता पर चर्चा करैत हुनका कहलनि जे एहि समझौता सँ निकट भविष्य में दुनू देशक बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 34 अरब अमेरिकी डॉलरक वृद्धि होएबाक संभावना अछि। मुदा केवल व्यापार समझौता, टैरिफ नीति आ निवेश घोषणा भरि सँ आर्थिक साझेदारी मजबूत नहि होइत अछि।

ओ कहलनि, “व्यापारिक महत्वाकांक्षा घोषणा-पत्र सँ नहि, बल्कि अनुबंधक सफल क्रियान्वयन सँ पूरा होइत अछि। भारत-यूके आर्थिक साझेदारी केँ मजबूत करबाक लेल एकटा सुदृढ़ ADR ढाँचा आवश्यक अछि, जे व्यावसायिक विश्वास केँ व्यवहारिक रूप दए सकय।”

मुख्य न्यायाधीश कहलनि जे कोनो व्यापारिक गलियारा केवल सामान, पूंजी आ सेवाक आवागमन सँ मजबूत नहि होइत अछि, बल्कि तखन मजबूत होइत अछि जखन व्यापार करनिहार लोकनि केँ भरोसा होय जे समस्या उत्पन्न भेला पर हुनका महँग, जटिल अथवा थोपल गेल प्रक्रिया सँ नहि गुजरय पड़त।

हुनका अनुसार भारत-यूके व्यापारक अगिला चरण केवल बड़का उद्योग समूह नहि, बल्कि औषधि आपूर्तिकर्ता, फिनटेक कंपनी, स्वच्छ ऊर्जा व्यवसाय, डिजिटल प्लेटफॉर्म आ मध्यम आकारक उद्योग सभक नेतृत्व में आगाँ बढ़त। यदि ADR व्यवस्था केवल पैघ विवाद सभ लेल उपयोगी रहत, तऽ ई वास्तविक व्यापारिक साझेदारीक उद्देश्य पूरा नहि कऽ सकत।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत दुनू देशक बीच संयुक्त मध्यस्थ (Arbitrator) मान्यता आ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करबाक सुझाव देलनि, जाहिसँ एहन विशेषज्ञक साझा समूह तैयार भऽ सकय जे भारत आ ब्रिटेन दुनू कानूनी व्यवस्था सँ भली-भाँति परिचित होथि।

हुनका तकनीकी लाइसेंसिंग, फिनटेक साझेदारी आ नव युगक व्यावसायिक विवाद सभक शीघ्र समाधान लेल विशेष प्रोटोकॉल विकसित करबाक सेहो सुझाव देलनि। हुनक अनुसार एहि लेल एहन संस्थागत मध्यस्थता ढाँचा बनेबाक आवश्यकता अछि जे सभ पक्ष लेल स्वीकार्य, सुलभ आ किफायती होय। एहि में सीमित शुल्क, दस्तावेज-आधारित प्रक्रिया, ऑनलाइन सुनवाई, छोट मध्यस्थता अवधि आ समयबद्ध निर्णय शामिल होबाक चाही।

मुख्य न्यायाधीश मध्यस्थता (Arbitration) आ सुलह (Mediation) केँ जोड़बाक पक्षधरता करैत कहलनि जे भारत-यूकेक बहुतो विवाद संयुक्त उद्यम, वितरण नेटवर्क, तकनीकी साझेदारी आ आधारभूत संरचना परियोजना जेकाँ दीर्घकालिक व्यावसायिक संबंध सँ जुड़ल रहत। एहन स्थिति में सर्वोत्तम परिणाम केवल कानूनी जीत नहि, बल्कि व्यापारिक संबंधक संरक्षण होइत अछि।

सम्मेलनक मुख्य वक्ता इंग्लैंड आ वेल्सक नागरिक न्याय प्रमुख सर जेफ्री वोस विवाद समाधान में प्रौद्योगिकी आ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केर बढ़ैत भूमिका पर प्रकाश देलनि। ओ न्याय व्यवस्था में विश्वास, निष्पक्षता आ दक्षता बनाए रखबाक महत्व पर जोर देलनि।

कार्यक्रम में यूनाइटेड किंगडम में भारतक उप उच्चायुक्त कार्तिक पांडे कहलनि जे भारत सरकार विवादक त्वरित समाधान लेल ADR व्यवस्था केँ बढ़ावा देबा लेल पूर्ण रूप सँ प्रतिबद्ध अछि।

इंग्लैंड आ वेल्स लॉ सोसाइटीक उपाध्यक्ष ब्रेट डिक्सन व्यापारिक विश्वास आ वाणिज्यिक साझेदारी मजबूत करबाक लेल कानूनी सहयोग, संस्थागत सहभागिता आ प्रभावी विवाद समाधान तंत्रक आवश्यकता पर बल देलनि।

ICA केर अध्यक्ष आ वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एन. जी. खेतान कहलनि जे भारत आब दुनिया में व्यवसाय करबाक लेल सबसे सुरक्षित देशसभ में सँ एक बनि चुकल अछि। हुनका व्यावसायिक विवादक त्वरित समाधान लेल मध्यस्थता केँ बढ़ावा देबाक आवश्यकता पर जोर देलनि।

ICA केर महानिदेशक अरुण चावला कहलनि जे मध्यस्थता आर्थिक विकासक “मौन आधारभूत संरचना” बनि गेल अछि आ भारत आ ब्रिटेन दुनू देश मध्यस्थता व्यवस्था केँ मजबूत करबा में निवेश कऽ रहल अछि।

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