नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) दिल्लीमे आयोजित ‘चलू संसद’ प्रदर्शनक दौरान एकटा नाबालिग बच्चीक घायल होएबाक सोशल मीडिया पर कएल गेल दावा पर गंभीर संज्ञान लेने अछि। आयोग स्पष्ट कएने अछि जे यदि पत्रकार सौरव दास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा कएल गेल जानकारी गलत अथवा भ्रामक साबित होइत अछि, तँ हुनका विरुद्ध एफआईआर दर्ज करबाक सहित कानूनी कार्रवाई कएल जाएत।
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो केर अध्यक्षतामे गठित पीठ दिल्ली सरकारक महिला एवं बाल विकास विभाग, केंद्र सरकारक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) आ दिल्ली पुलिस आयुक्त केँ नोटिस जारी कए दू सप्ताहक भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जमा करबाक निर्देश देने अछि। आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 केर धारा 12 अंतर्गत एहि मामलाक जांच शुरू कएने अछि।
बच्चीक पता लगाकऽ इलाज आ सुरक्षा सुनिश्चित करबाक निर्देश
शिकायतमे आरोप लगाओल गेल छल जे प्रदर्शनक दौरान एकटा 12 वर्षीय बालिका केँ खतरा पहुँचल आ ओकरा सिर पर चोट लागल। एहि पर आयोग संबंधित अधिकारीसभ केँ निर्देश देने अछि जे बच्चीक शीघ्र पता लगाओल जाए, उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराओल जाए आ ओकरा बाल कल्याण समिति (CWC) समक्ष प्रस्तुत कएल जाए।
आयोग ईहो पता लगाबऽ लेल कहलके अछि जे बच्ची केँ प्रदर्शन स्थल पर के लए गेल छल। यदि जांचमे कोनो अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा बच्चीक संग मारपीट वा दुर्व्यवहारक पुष्टि होइत अछि, तँ ओकर विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कएल जाए। आयोग स्पष्ट कएने अछि जे नाबालिगक सुरक्षासँ जुड़ल मामलामे जुवेनाइल जस्टिस (बाल न्याय) अधिनियम केर प्रावधानक कड़ाईसँ पालन होनाइ आवश्यक अछि।
गलत जानकारी पर एफआईआर दर्ज होएबाक चेतावनी
एनएचआरसी कहलके अछि जे यदि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी झूठ अथवा भ्रामक साबित होइत अछि, तँ संबंधित व्यक्ति विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कएल जाएत। आयोग विशेष रूपसँ पत्रकार सौरव दास द्वारा साझा कएल पोस्टक जांचक बात कहलके अछि।
दिल्ली पुलिस पहिनहिं दावाक खंडन कएने छल
एहि सँ पहिने दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया पर जारी फैक्ट-चेक पोस्टमे स्पष्ट कएने छल जे 12 वर्षीय कोनो बच्चीक सिर पर चोट लगबाक अथवा 40–50 गोटेक घायल होएबाक दावा सही नहि अछि। पुलिस लोकसभसँ अपील कएने छल जे अपुष्ट आ भ्रामक जानकारी साझा नहि करू।
बच्चाक सुरक्षा आ सोशल मीडिया जवाबदेही पर फेर उठल सवाल
एहि घटनासँ राजनीतिक प्रदर्शनमे नाबालिग बच्चासभक भागीदारी आ सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि संवेदनशील जानकारी प्रसारित करबाक जिम्मेदारी पर फेर चर्चा शुरू भऽ गेल अछि। विशेषज्ञसभक अनुसार, राजनीतिक प्रदर्शनमे नाबालिगसभ केँ शामिल करब हुनकर अधिकार, सुरक्षा आ मानसिक स्वास्थ्य दुनूक लेल जोखिमपूर्ण भऽ सकैत अछि।
एनएचआरसीक एहि कार्रवाईसँ स्पष्ट संदेश गेल अछि जे मानवाधिकारसँ जुड़ल संवेदनशील मामलामे तथ्यक पुष्टि बिना दावा करब गंभीर कानूनी परिणाम दऽ सकैत अछि। जांच पूरा भेला पर यदि आरोप सही साबित होइत अछि तँ दोषीसभ पर कड़ी कार्रवाई होएत, आ यदि दावा गलत साबित होइत अछि तँ संबंधित व्यक्ति विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया शुरू कएल जाएत।
