
मुंबई । पहिल एंग्लो-बर्मी युद्धक अनकहल पीड़ा, बनारसक संकरी गलीसभ सँ उठैत एक स्त्रीक करुण पुकार आ लोकसंगीतक आत्मा—कोक स्टूडियो भारतक नवीनतम गीत ‘कचौड़ी गली’ केवल एकटा गीत नहि, बल्कि इतिहासक बिसरल घाव केँ फेर सँ जीवंत करैत गहन भावनात्मक अनुभव बनिकऽ सामने आयल अछि।
ई गीत एकटा एहन पत्नी केर दृष्टिकोण सँ आगाँ बढ़ैत अछि, जकर पति केँ ब्रिटिश सेना जबरदस्ती मिर्जापुर सँ रंगून युद्ध लड़बाक लेल लऽ जाइत अछि—एहन युद्ध, जे ओ स्वयं कखनो नहि चुनने छल। हुनकर बिछोह, प्रतीक्षाक पीड़ा आ विरहक वेदना लोकधुनमे एतेक मार्मिक ढंग सँ पिरोएल गेल अछि जे श्रोता अपनाकेँ बनारसक पुरान गल्लीसभमे ठाढ़ अनुभव करैत छथि।
प्रसिद्ध गायिका रेखा भारद्वाज अपन गूंजदार आ आत्मीय स्वर सँ एहि रचनामे गहर भावनात्मक प्रभाव जोड़ने छथि। ओतहि उतपल उदित भोजपुरी लोकसंगीतक सहजता आ मौलिकता केँ अत्यंत सुंदर ढंग सँ सहेजने छथि। संगहि ख्वाब अपन सूक्ष्म, मुदा प्रभावशाली योगदान सँ गीतक भावनात्मक धरातल केँ आरो समृद्ध बनबैत छथि।
‘कचौड़ी गली’ एक बेर फेर साबित करैत अछि जे लोककथा केवल अतीतक स्मृति नहि होइत अछि, बल्कि ओ आइयो लोकक हृदयमे साँस लैत अछि। कोक स्टूडियो भारत एहि प्रस्तुति द्वारा इतिहास, लोकसंस्कृति आ मानवीय संवेदनाक अद्भुत संगम प्रस्तुत कयने अछि, जे श्रोताक मन पर गहिर छाप छोड़ैत अछि।