
मुंबई/राजकोट । “जखन परिवार साथ छोड़ि दैत अछि, तखन सभसँ बेसी जरूरत सम्मान आ अपनापनक होइत अछि।” एहि भावनाक संग गुजरातक राजकोट स्थित ‘विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिसर’ सद्भावना वृद्धाश्रम बुजुर्ग लोकनिक लेल आशाक केंद्र बनि रहल अछि। संस्थासँ जुड़ल प्रतिनिधिक अनुसार, हुनकर उद्देश्य केवल आश्रय देब नहि, बल्कि बेसहारा, बीमार आ बिछौनापर पड़ल बुजुर्ग लोकनिकेँ परिवार जेकाँ स्नेह आ देखभाल देब अछि।
संस्थाक अनुसार, पछिला दस वर्षसँ एतय निःसंतान, दिव्यांग, कैंसर आ कोमा सँ जूझि रहल बुजुर्ग लोकनिक पूर्णतः निःशुल्क सेवा कएल जा रहल अछि। वर्तमानमे 700 सँ अधिक बुजुर्ग एतय निवास कऽ रहल छथि, जाहिमे पैघ संख्या बिछौनापर पड़ल मरीजक अछि।
प्रतिनिधि सभक कहब अछि जे 500 करोड़ रुपैयाक लागतिसँ बनि रहल नव परिसर दुनियाक सभसँ पैघ निःशुल्क वृद्धाश्रम सभमे शामिल होयत। एहि परिसरमे 5000 जरूरतमंद बुजुर्गक रहबाक व्यवस्था कएल जाएत। संस्थाक कहब अछि, “हमर प्रयास अछि जे कोनो बुजुर्ग अपनाकेँ एकाकी अथवा उपेक्षित महसूस नहि करथि।”
वृद्धाश्रममे 24 घंटा चिकित्सकीय सुविधा, फिजियोथेरेपी केंद्र, सत्संग हॉल, मंदिर, सांस्कृतिक कार्यक्रम आ आधुनिक रहबाक व्यवस्था उपलब्ध कराओल जा रहल अछि। संस्थाक मानब अछि जे बुजुर्ग लोकनिकेँ केवल दवा नहि, बल्कि सम्मान, संवाद आ भावनात्मक सहाराक सेहो आवश्यकता होइत अछि।
संस्थाक लोकसँ अपील अछि जे यदि आसपास कोनो बेसहारा अथवा लाचार बुजुर्ग देखाइ पड़थि, तँ हुनका सद्भावना वृद्धाश्रम धरि पहुँचाबयमे सहयोग करथि, जाहिसँ ओहो सम्मानपूर्ण जीवन जी सकथि।