नीतीश कुमार ककरो छटपटाए नै देथिन !

पटना। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) आबो ओही पुरनका अंदाज में छथि। सेहत जइसन हो, मुदा जखने थोड़ा समय लेल ठीक रहैत छथि, तखने साफ-साफ लकीर खींचि देथिन। सामने वाला के छटपटाए के मौका सेहो नै देथिन। धाराक उल्टा जाए पर भारी नुकसान तय मानल जाइत अछि। एखन चर्चा बिहारक नया मुख्यमंत्री के चयन के अछि, जतय फैसला भाजपा के करबाक अछि। एहि दौड़ में Samrat Choudhary सबसे आगाँ देखाइत छथि। नामक आधिकारिक घोषणा होए तक अनेको तरहक कयास जारी रहत—जइना कखनो Sachin Tendulkar सेहो 99 पर आउट भ’ जाइत छलाह, तइना अंतिम समय पर खेल बदलि सकैत अछि।

मुदा, Nitish Kumar क राजनीति कें गहराई सँ बुझबाक जरूरत अछि। मुख्यमंत्री पद छोड़बाक निर्णय के बादो ओ अपन वोट बैंक के मजबूत बना चुकल छथि। Lalu Prasad Yadav क खिलाफ राजनीतिक लड़ाई में हुनकर सफलता गैर-यादव पिछड़ा, अतिपिछड़ा आ सवर्ण समाजक एकजुटता सँ आयल छल। बाद में महिलासभक लेल अलग वोट बैंक सेहो तैयार केलनि, जे सुरक्षा आ जनकल्याणकारी योजना पर आधारित छल।

एखन जखन Nitish Kumar बिहार सँ दिल्ली दिस बढ़ि रहल छथि, त’ साफ बुझाइत अछि जे हुनकर राजनीति बहुत सोचल-समझल अछि। ‘लव-कुश’ समीकरण—जतय लव मतलब कुर्मी आ कुश मतलब कुशवाहा—ओकरा ओ मजबूती सँ गढ़लनि। एहि में धानुक जातिक योगदान सेहो रहल। लव वर्ग सत्ता तक पहुँचि गेल, मुदा कुश वर्ग इंतजार में रहल। आब विदाई के समय ओ स्पष्ट संकेत द’ रहल छथि जे हुनकर समर्थन कुश वर्ग कें अछि आ Samrat Choudhary क समर्थन खुला तौर पर करि रहल छथि।

भाजपा सेहो Samrat Choudhary के मुख्यमंत्री चेहरा के रूप में विकसित क’ रहल अछि। दोसर तरफ, Nishant Kumar के अभी बहुत आगाँ बढ़ाबय के संकेत नै अछि। एहि स्थिति में बिहार भरि में संदेश जा चुकल अछि जे नीतीश ‘लव-कुश’ समाज के धोखा नै द’ रहल छथि, बल्कि अपन बाद कुश समाज के मौका देबाक पक्ष में छथि।

एहन स्थिति में यदि भाजपा कोनो राजनीतिक चाल में फँसि क’ Samrat Choudhary के 99 पर आउट क’ देत अछि, त’ नुकसान Bharatiya Janata Party के होएत, नीतीश कुमार के नै। कारण साफ अछि—‘लव-कुश’ समाज, जे नीतीश के समर्थन देखैत अछि, ओ भाजपा सँ नाराज भ’ सकैत अछि। सत्ता में हिस्सेदारी के सवाल पर ओ समाज समझौता नै करए चाहत।

एहि कारण भाजपा लेल स्थिति चुनौतीपूर्ण अछि। बार-बार इहे संकेत भेटैत अछि जे कोनो सवर्ण चेहरा दौड़ में नै अछि। Samrat Choudhary क विकल्प सेहो संभवतः कुश समाज सँ हो सकैत अछि। मुदा ध्यान रखए के जरूरत अछि—बिहार में बहुत अधिक प्रयोग सफल नै होइत अछि, कखनो-कखनो ई प्रयोग ‘हिट विकेट’ बनि जाइत अछि।

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