ज्ञान भारतम मिशनक तहत सहरसामे भेटल 400-500 वर्ष पुरान दुर्लभ पांडुलिपि, मिथिलाक ज्ञान परंपरा पर शोधक खुलत नव द्वार

सहरसा (बिहार) : भारत सरकारक संस्कृति मंत्रालयक महत्त्वाकांक्षी ज्ञान भारतम मिशन परियोजनाक अंतर्गत देशव्यापी पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियानक दौरान बिहारक सहरसा जिलामे एकटा महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल भेल अछि। जिला मुख्यालयसँ सटल कहरा गाममे विशेष सर्वेक्षणक दौरान 400 सँ 500 वर्ष पुरान अनेक दुर्लभ आ बहुमूल्य पांडुलिपि प्राप्त भेल अछि, जाहि केँ भारतीय ज्ञान परंपराक अमूल्य धरोहर मानल जा रहल अछि।

जिला पदाधिकारी दीपेश कुमारक निर्देशनमे जिलामे व्यापक स्तर पर पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान चलाओल जा रहल अछि। एहि क्रममे जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झाक नेतृत्वमे गठित विशेषज्ञ दल कहरा गाममे विशेष सर्वेक्षण कयलक। एहि दौरान सेवानिवृत्त कृषि विभाग निदेशक अभय कांत ठाकुरक आवाससँ बड़ी संख्या मे प्राचीन आ ज्ञानवर्धक पांडुलिपिक संग्रह कयल गेल।

पीढ़ीसँ संरक्षित अछि ज्ञानक धरोहर

75 वर्षीय अभय कांत ठाकुर, जे स्वयं संगीत तथा संस्कृत भाषा-साहित्यक गहन अध्येता छथि, कहलनि जे हुनकर परिवारमे ज्ञान आ विद्वताक परंपरा अनेक शताब्दीसँ चलैत आबि रहल अछि। हुनका अनुसार हुनकर नाना बलराम झा आ पिता भागवत झा द्वारा संरक्षित पांडित्य परंपराक जीवंत प्रमाण ई पांडुलिपिसभ छथि।

हजारों पुस्तकसँ सुसज्जित अपन निजी पुस्तकालय देखबैत हुनका कहलनि जे परिवार एहि धरोहरसभ केँ वर्षौंसँ सुरक्षित रखने अछि, जाहिसँ आगामी पीढ़ी सेहो भारतीय ज्ञान परंपरासँ परिचित भऽ सकय।

ज्योतिष, वास्तु आ वर्षकृत्यसँ संबंधित अछि पांडुलिपिसभ

महिषी स्थित श्री उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालयमे वेद संकायक प्रमुख आ प्राचीन लिपिक विशेषज्ञ डॉ. आनंद दत्त झा प्राप्त पांडुलिपिसभक अवलोकन कएला बाद बतौलनि जे एहि सभमे ज्योतिष, वास्तुशास्त्र तथा वर्षकृत्यसँ संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध अछि।

हुनकर अनुसार एहि पांडुलिपिसभक अध्ययन भारतीय ज्ञान-विज्ञानक ऐतिहासिक परंपराक बेहतर समझ विकसित करबामे अत्यंत उपयोगी सिद्ध भऽ सकैत अछि।

शोधक अपार संभावना

दिल्ली विश्वविद्यालयक सेंट स्टीफेंस कॉलेजक संस्कृत विभागक एक प्रोफेसर सेहो एहि पांडुलिपिसभक महत्त्व स्वीकार करैत कहलनि जे सहरसा आ मिथिला क्षेत्रसँ प्राप्त होमय वाली एहन पांडुलिपिसभ पर व्यापक आ व्यवस्थित शोधक आवश्यकता अछि।

विशेषज्ञसभक मानब अछि जे एहि दस्तावेजसभक अध्ययनसँ मिथिलाक समृद्ध बौद्धिक, दार्शनिक आ वैज्ञानिक परंपराक अनेक अनछूएल पक्ष पर प्रकाश पड़ि सकैत अछि।

15 जून धरि जारी रहत सर्वेक्षण अभियान

ज्ञान भारतम मिशनक तहत जिलामे पांडुलिपि सर्वेक्षणक कार्य आगामी 15 जून धरि जारी रहत। जिला प्रशासन आ कला एवं संस्कृति विभाग जिलावासीसँ अपील कयने अछि जे जँ हुनकर पास कोनो प्रकारक प्राचीन पांडुलिपि उपलब्ध हो तऽ ओकर जानकारी प्रशासन केँ जरूर दिअ।

अधिकारीसभ आश्वस्त कयने छथि जे विशेषज्ञ दल द्वारा एहि पांडुलिपिसभक संरक्षण आ दस्तावेजीकरण कयल जाएत, जाहिसँ ई अमूल्य धरोहर भविष्यक पीढ़ीसभ लेल सुरक्षित रहि सकय।

उल्लेखनीय अछि जे एहि अभियानक नेतृत्व जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी झा कऽ रहल छथि, जखनकि सर्वेक्षण दलमे अमित आनंद सहित आन विशेषज्ञ सेहो शामिल छथि।

ज्ञान भारतम मिशनक अंतर्गत सहरसामे भेटल ई दुर्लभ पांडुलिपिसभ केवल मिथिलाक गौरवशाली ज्ञान परंपराक प्रमाण नहि, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासतक संरक्षणक दिशा मे एक महत्वपूर्ण उपलब्धिक रूपमे सेहो देखल जा रहल अछि।

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