किएक शिक्षा मंत्री बनिते निशानापर छथि मिथिलेश तिवारी?

पटना। Bihar क राजनीति मे एकटा पुरान कहावत फेर सच साबित होइत देखाइत अछि— “शिक्षा मंत्रीक पद फूलक सेज नहि, कांटक ताज होइत अछि।” सरकार कोनो हो, शिक्षा विभाग सदिखन दबाव, विवाद आ राजनीतिक खींचतानक केंद्र रहल अछि। नव गठित सरकारमे मिथिलेश कुमार तिवारी केँ शिक्षा मंत्रीक जिम्मेदारी भेटलाक संगहि ओ राजनीतिक चक्रव्यूहक केंद्रमे आबि गेल छथि।

सरकार एखन अपन शुरुआती दौरमे अछि। सामान्यतः नव सरकार आ मंत्रीसभ केँ काजक मूल्यांकन लेल किछु समय देल जाइत अछि, मुदा मिथिलेश तिवारीक मामला मे तस्वीर किछु अलग देखाइत अछि। शपथ ग्रहणक तुरंत बादसँ सोशल मीडिया पर हुनका खिलाफ चलि रहल अभियान राजनीतिक गलियारामे अनेक सवाल ठाढ़ कऽ रहल अछि। स्थिति एहन प्रतीत होइत अछि मानू तय रणनीतिक तहत लगातार हुनका ट्रोल आ टारगेट कएल जा रहल होथि।

हालहि मे शिक्षक अभ्यर्थीसभक प्रदर्शन आ ओकरा पर भेल लाठीचार्ज सँ निश्चित रूपसँ हुनकर मुश्किल बढ़ल अछि। एकटा पुरान मामला सेहो फेर चर्चामे आनल जा रहल अछि, जकरा संबंधमे जानकारी अनुसार Patna High Court क रोक एखनहु प्रभावी अछि। राजनीतिक विश्लेषक मानैत छथि जे वास्तविक मुद्दासँ बेसी माहौल बनेबाक कोशिश देखाइत अछि।

असल मे बिहारक शिक्षा विभाग सिर्फ एकटा मंत्रालय नहि, बल्कि करोड़ों छात्र, लाखों शिक्षक आ असंख्य अभ्यर्थीसभक उम्मीदिसँ जुड़ल अत्यंत संवेदनशील विभाग अछि। एतय लेल गेल निर्णयक असर गांवसँ राजधानी धरि महसूस कएल जाइत अछि। एहि कारण शिक्षा मंत्री सदिखन राजनीतिक, प्रशासनिक आ सामाजिक दबावक केंद्रमे रहैत छथि।

Gopalganj जिलासँ आबएवला मिथिलेश तिवारी लेल राजनीतिक राह पहिनेसँ आसान नहि रहल अछि। स्थानीय राजनीति सँ लऽ कऽ संगठनात्मक प्रतिस्पर्धा धरि, विरोधीसभक लंब सूची सदिखन हुनका संग रहल अछि। जकर सामाजिक आ जातीय समीकरणक आधार पर हुनका मंत्रिमंडलमे स्थान भेटल अछि, ओतहु प्रतिस्पर्धा तीव्र अछि। एहि परिस्थिति मे राजनीतिक प्रहार स्वाभाविक मानल जा रहल अछि।

दिलचस्प बात ई अछि जे ई पहिल बेर नहि भऽ रहल अछि। एहि सँ पहिने जखन भाजपा हुनका Buxar Lok Sabha constituency सँ उम्मीदवार बनौने छल, तखनहु हुनका खिलाफ एकटा संगठित नैरेटिव उभरैत देखल गेल छल। आब शिक्षा मंत्री बनलाक बाद फेर ओहने माहौल बनैत नजर आबि रहल अछि।

हालांकि मिथिलेश तिवारीक राजनीति केँ नजदीकसँ जानएवला लोकसभ कहैत छथि जे ओ विरोधसँ घबराएवला नेता नहि छथि। करीब साढ़े तीन दशकक राजनीतिक संघर्षक बाद पहिल बेर राज्य मंत्रिमंडलमे स्थान भेटल अछि। समर्थकसभक दावा अछि जे ओ भलीभांति बुझैत छथि जे जतेक विरोध बढ़त, ओतेक बेसी सक्रियता आ प्रखरताक संग काज करए पड़त।

मुदा ईहो सत्य अछि जे केवल राजनीतिक बयानबाजी सँ शिक्षा विभाग नहि चलत। शिक्षा मंत्रीक रूपमे हुनकर असली परीक्षा आब शुरू भेल अछि। शिक्षक बहाली प्रक्रिया मे तेजी आनब, विद्यालयसभमे पढ़ाईक गुणवत्ता सुधारब, शिक्षा व्यवस्थामे पारदर्शिता आनब आ अभ्यर्थीसभक विश्वास बहाल करब— ई सभ चुनौती सीधा हुनका सामने ठाढ़ अछि।

लोकतंत्रमे आलोचना स्वाभाविक अछि, मुदा नव मंत्री केँ काज करबाक अवसर भेटब सेहो जरूरी मानल जाइत अछि। सोशल मीडिया क युगमे जँ नकारात्मक अभियान चलि रहल अछि, तँ संतुलित आ सकारात्मक विमर्शक आवश्यकता सेहो ओतबे अछि। आखिरकार शिक्षा विभागक भविष्य राजनीतिक शोर नहि, बल्कि ठोस परिणामसँ तय होएत।

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