
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत के लाक्षागृह के दरगाह बना वक्फ संपत्ति घोषित करबाक विवादक पटाक्षेप आब भ’ गेल अछि। महाभारतकालीन प्रसिद्ध लाक्षागृह केँ आब वक्फ संपत्तिक सूची सँ बाहर क’ देल गेल अछि। सरकार ई निर्णय कोर्टक निर्णय के आधार पर लेलक अछि। पाँच माह पूर्व एहि ऐतिहासिक स्थल केँ उम्मीद पोर्टल पर ‘दरगाह’ केर रूप मे दर्ज कयल गेल छल, जाहि सँ विवाद शुरू भ’ गेल छल।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाशचंद तिवारी कहलनि जे कोर्टक आदेशक आलोक मे पूरा रिपोर्ट सरकार केँ पठाओल गेल छल। जिला स्तर पर कोनो कार्रवाई संभव नहि छल, मुदा आब सभ तथ्यक समीक्षा क’ लाक्षागृह केँ उम्मीद पोर्टल सँ हटा देल गेल अछि।
बरनावा निवासी मुकीम खान साल 1970 मे मेरठ कोर्ट मे मुकदमा दायर कयने छल। ओ दावा कयने छल जे प्राचीन टीला पर स्थित जमीन दरगाह, बदरुद्दीनक मजार आ कब्रिस्तान अछि। एहि मामला मे लाक्षागृह गुरुकुलक संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज केँ पक्षकार बनाओल गेल छल।
1977 मे मेरठ सँ अलग भ’ बागपत जिला बनलाक बाद मामला बागपत कोर्ट मे ट्रांसफर भ’ गेल। दुनू पक्ष अपन-अपन दावाक समर्थन मे सबूत पेश कयलक।
5 फरवरी 2024 केँ सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम कोर्ट अपन निर्णय मे एहि प्राचीन टीला केँ लाक्षागृह मानलक आ मुस्लिम पक्षक दावा निरस्त क’ देलक। यद्यपि, मुस्लिम पक्ष एहि निर्णय के विरोध मे अपील कयने अछि, जाहि पर सुनवाई एखन चलि रहल अछि।
एहि बीच दिसंबर 2025 मे देशभरिक वक्फ संपत्ति सभक उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करबाक प्रक्रिया मे लाक्षागृह केँ फेर ‘दरगाह’ बताक’ पोर्टल पर दर्ज क’ देल गेल छल। एहि पर स्थानीय लोकक संगहि श्री गांधी धाम समिति गुरुकुल लाक्षागृह के मंत्री राजपाल त्यागी आपत्ति दर्ज करौलनि।
विरोध बढ़लाक बाद सरकार कोर्टक निर्णय के आधार पर आब लाक्षागृह केँ वक्फ संपत्तिक सूची सँ हटा देलक अछि।