भोपाल। भारतीय लोक-संस्कृति, दाम्पत्य परंपरा आ पारिवारिक संस्कारक विभिन्न आयामकेँ केंद्रमे राखि कऽ लिखल गेल पुस्तक ‘कोहबर’ केर विमोचन मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष आ पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमरक कर-कमल सँ संपन्न भेल।
एहि अवसर पर पुस्तकक लेखक अनिल झा, वरिष्ठ पत्रकार आ राजनीतिक विश्लेषक कृष्णमोहन झा तथा वरिष्ठ पत्रकार रिजवान अहमद सिद्दीकी विशिष्ट अतिथिक रूपमे उपस्थित छलाह। कार्यक्रममे डॉ. एच.एम. मिश्रा, डॉ. एच.आर. रैदास, रमेश दुबे, एस.के. बेहरे, श्री शिवदत्त मिश्रा, श्री विनय कुमार झा, श्री कौशल झा, सुधीर के. झा, नविंदु मिश्रा, ज्योतिरादित्य झा आ रमेश झा सहित साहित्य, पत्रकारिता, सामाजिक आ सांस्कृतिक क्षेत्र सँ जुड़ल गणमान्य लोकनि उपस्थित छलाह।
भारतीय विवाह परंपरा आ जीवन-दर्शनक दस्तावेज
पुस्तक ‘कोहबर’ मे भारतीय विवाह परंपरामे निहित प्रेम, मर्यादा, संस्कार आ पारिवारिक जीवन-दर्शन केँ व्यापक संदर्भमे प्रस्तुत कएल गेल अछि। लेखक कोहबर केँ केवल विवाहक बाद नवदम्पतीक कक्ष नहि, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन, दाम्पत्य संस्कार आ आगाँक पीढ़ीक निर्माण सँ जुड़ल सांस्कृतिक अवधारणाक रूपमे व्याख्या कएने छथि।
कृतिमे भगवान श्रीराम आ माता सीता, भगवान शिव आ माता पार्वती, राजा अज एवं इंदुमती तथा नल-दमयंती जेकाँ पौराणिक आ साहित्यिक प्रसंगक माध्यम सँ भारतीय परंपरामे प्रेमक उदात्त आ मर्यादित अभिव्यक्ति केँ सामने आनल गेल अछि।
कोहबरक लोक परंपरामे सूर्य, चंद्रमा, नवग्रह, पशु-पक्षी, वृक्ष आ प्रकृतिक विभिन्न प्रतीकक अंकनक माध्यम सँ मानव जीवन आ प्रकृतिक बीच भारतीय दृष्टिकोण सँ स्थापित संबंध केँ सेहो पुस्तकमे रेखांकित कएल गेल अछि।
नव पीढ़ी धरि सांस्कृतिक मूल्य पहुँचाबयक प्रयास
पुस्तकक लेखक अनिल झा कहलनि जे ‘कोहबर’ लिखबाक उद्देश्य कोनो एक लोक परंपराक मात्र वर्णन करब नहि, बल्कि ओकर पाछाँ नुकायल भारतीय जीवन-मूल्य, दाम्पत्य संस्कार, पारिवारिक उत्तरदायित्व आ सांस्कृतिक चेतना केँ नव पीढ़ीक सामने राखब अछि।
ओ कहलनि जे बदलैत समयमे अनेक पारंपरिक संस्कार आ लोक परंपरा धीरे-धीरे हमर सामूहिक स्मृति सँ दूर भऽ रहल अछि। एहन समयमे अपन सांस्कृतिक विरासत केँ बुझनाइ आ ओकर मूल भाव केँ आगाँक पीढ़ी धरि पहुँचेनाइ आवश्यक अछि। ‘कोहबर’ एहि दिशामे एकटा विनम्र प्रयास अछि।
‘संस्कार भविष्य निर्माणक आधारशिला’
वरिष्ठ पत्रकार आ राजनीतिक विश्लेषक कृष्णमोहन झा अपन संबोधनमे कहलनि जे भारतीय संस्कृतिमे संस्कार केवल अतीतक स्मृति नहि, बल्कि भविष्यक निर्माणक आधारशिला अछि। ‘कोहबर’क माध्यम सँ प्रेम, दाम्पत्य, परिवार आ संस्कार केँ भारतीय जीवन-दृष्टिक व्यापक संदर्भमे बुझबाक अवसर भेटैत अछि।
ओ कहलनि जे आइ आवश्यकता अछि जे नव पीढ़ी केँ अपन परंपरा सँ केवल परिचित नहि कराओल जाए, बल्कि ओकर पाछाँ निहित जीवन-मूल्य आ सामाजिक दृष्टिकोण केँ सेहो बुझाओल जाए। एहि दृष्टि सँ ‘कोहबर’ एकटा महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कृति अछि।
नरेंद्र सिंह तोमर देलनि लेखक केँ शुभकामना
विमोचनक अवसर पर श्री नरेंद्र सिंह तोमर ‘कोहबर’ केँ भारतीय लोक-संस्कृति आ पारिवारिक संस्कार सँ जुड़ल महत्वपूर्ण कृति बतबैत लेखक अनिल झा केँ शुभकामना देलनि।
ओ कहलनि जे भारतीय परंपरामे विवाह केवल दू व्यक्तिक संबंध नहि, बल्कि परिवार, समाज आ आगाँक पीढ़ी प्रति उत्तरदायित्वक संकल्प सेहो अछि।
ओ विश्वास व्यक्त कएलनि जे ‘कोहबर’ जेकाँ पुस्तक भारतीय सांस्कृतिक परंपरा आ जीवन-मूल्य केँ नव पीढ़ी धरि पहुँचाबयमे उपयोगी भूमिका निभा सकैत अछि।
कार्यक्रम सादगीपूर्ण आ गरिमामय वातावरणमे संपन्न भेल। उपस्थित अतिथि सभ लेखक अनिल झा केँ पुस्तकक प्रकाशन आ विमोचन पर बधाई देलनि आ एकर व्यापक प्रसारक कामना कएलनि।
