सीता के ई सन्देश सदैव स्मरणीय अछि जे “सत्य, धैर्य आ आत्मसम्मान सँ बढ़ि कऽ किछु नहि

 

नई दिल्ली: जानकी नवमी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में वैदेही फाउंडेशन द्वारा ग्यारहम वार्षिक आयोजन ‘ग्यारहम जानकी प्राकट्योत्सव 2026’ वैशाख शुक्ल नवमी के दिन राजेन्द्र भवन सभागार में भव्य आ दिव्य रूप सँ मनायल गेल। एहि अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु आ गणमान्य व्यक्तित्व सभ के उपस्थिति रहल।
कार्यक्रमक शुरुआत मिथिला सँ आयल धनिक लाल मंडल आ हुनकर टीम द्वारा महाकवि विद्यापति आ अन्य भक्ति गीतक प्रस्तुति सँ भेल। तत्पश्चात अहमदाबादक मनीषा झा द्वारा नृत्य-नाटिका प्रस्तुत क’ वातावरण के भक्तिमय बना देल गेल।
माता सीता के चित्र पर पुष्प अर्पण आ दीप प्रज्वलन क’ कार्यक्रमक औपचारिक शुभारंभ कएल गेल, जाहि में सभ अतिथि आ वक्ता सहभागी भेलाह।
वैदेही फाउंडेशनक संस्थापक अमर नाथ झा अपन स्वागत भाषण में गत 11 वर्ष सँ निरंतर आयोजित भ’ रहल जानकी उत्सवक यात्रा पर प्रकाश देलनि। ओ नारी के शक्ति आ जगत जननी के स्वरूप बतबैत समाज में नारी सम्मान के आओर सुदृढ़ बनावे पर जोर देलनि। कार्यक्रमक संचालन डॉ. संजीत कुमार सरस द्वारा कएल गेल। पहिल आमंत्रित वक्ता रूप में तनुजा शंकर खान, जे विदेश में भारत सरकारक संस्कृति विशेषज्ञ आ प्रख्यात मीडिया एजुकेटर छथि, अपन विचार मैथिली भाषा में प्रस्तुत कएलनि। ओ अपन माताजी पद्मश्री उषा किरण खान के कृति “भामती” आ “जाय स पहिने” पर चर्चा करैत नारी के धैर्य आ शक्ति के विशेष रूप सँ उजागर कएलनि।

नई दिल्ली में धूमधाम सँ मनायल गेल ‘ग्यारहम जानकी प्राकट्योत्सव 2026’

वैदेही फाउंडेशन के अध्यक्ष कुमकुम झा के कहब छेन्ह जे भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक संरचना के मूल में जे अमर ग्रंथ सभक प्रभाव रहल अछि, ओहि में रामायण के स्थान अत्यन्त उच्च अछि। विशेष कय मिथिला क्षेत्र में, जतय के जन-जीवन, परंपरा, विवाह-संस्कार आ नारी-पुरुष संबंधक आदर्श स्वयं सीता आ राम सँ अनुप्राणित अछि, ओतय सीता केवल एक ऐतिहासिक अथवा पौराणिक पात्र नहि, बल्कि जीवंत चेतना छथि। अपन गप्प के आगा बढ़बैत ओ कहलीह जे सीता के जीवन केवल भारत या मिथिला तक सीमित नहि, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लेल प्रेरणास्रोत अछि। सीता नवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहि, बल्कि आत्ममंथन के अवसर अछि। ई हम सभ के स्मरण करबैत अछि जे नारी के सम्मान, सुरक्षा आ सशक्तिकरण केवल सरकार या कानून के जिम्मेदारी नहि, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के कर्तव्य अछि।आई आवश्यकता अछि जे हम सब सीता के जीवन सँ प्रेरणा लऽ अपन सोच बदली ,नारी के सम्मान करी, बेटीसभ के सशक्त बनाबी आ एक एहन समाज के निर्माण करी, जतय सब नारी सुरक्षित, सम्मानित आ स्वतंत्र महसूस करथि।अंत में, सीता के ई सन्देश सदैव स्मरणीय अछि जे “सत्य, धैर्य आ आत्मसम्मान सँ बढ़ि कऽ किछु नहि।”

अन्य वक्ता सभ में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. राम नाथ झा माता सीता पर गहन विचार रखलनि, जबकि साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के स्वाति चंद्रा आधुनिक संदर्भ में सीता के पुनर्व्याख्या (revisit) पर जोर देलनि। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार कहलनि जे सीता के केवल रामक दृष्टिकोण सँ नहि, बल्कि समग्र रूप में बुझबाक आवश्यकता अछि।
एहि अवसर पर वैदेही फाउंडेशन द्वारा “वैदेही स्त्री शक्ति सम्मान”, “लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान” आ “स्वर्णिम दाम्पत्य सम्मान” सहित विभिन्न सम्मान प्रदान कएल गेल। साहित्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान लेल प्रो. विद्यानंद झा ‘विदित’ के लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान सँ सम्मानित कएल गेल। कार्यक्रम के सफल बनाब’ में सेंट स्टीफेंस कॉलेज के प्रो. पंकज कुमार मिश्र, वरिष्ठ स्तंभकार उमेश चतुर्वेदी, डॉ. विभा कुमारी, कुमकुम झा सहित अनेक विद्वान सभक महत्वपूर्ण योगदान रहल। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एहि भव्य कार्यक्रम में सैकड़ों लोकनिक उपस्थिति रहल, जे आयोजन के अत्यंत सफल आ प्रेरणादायक बनौलक।

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