
नई दिल्ली/चेन्नई। देशभरि मे वक्फ संपत्ति आ धार्मिक स्थलसभक स्वामित्व के लऽ विवादक बीच मद्रास हाईकोर्ट एक महत्वपूर्ण फैसला सुनबैत स्पष्ट केलक अछि जे कोनो जमीन पर दरगाह, मजार अथवा कब्रक मौजूदगी मात्र सँ ओ स्वतः वक्फ संपत्ति नहि बनि जाइत। अदालत कहलक जे वक्फ बोर्डक अधिकारक दावा खाली तखने मान्य होएत, जखन संबंधित संपत्ति कें कानूनन वक्फ घोषित कएल गेल हो आ ओकर आवश्यक प्रक्रिया पूरा भेल हो।
मामला तमिलनाडुक राजधानी चेन्नईक ट्रिप्लिकेन क्षेत्र स्थित एक दरगाह सँ जुड़ल अछि। विवादित जमीन मूल रूप सँ लोक निर्माण विभागक स्वामित्व मे बताओल गेल अछि। अपीलकर्ता के दावा छल जे हुनकर परिवार कतेको दशक सँ उक्त दरगाहक देखरेख करैत आबि रहल अछि, मुदा तमिलनाडु वक्फ बोर्ड हुनका मुतवल्ली मानय सँ इनकार करैत दोसर व्यक्तिक नियुक्ति कए देने छल।
वक्फ बोर्डक एहि निर्णयक विरुद्ध मामला अदालत पहुँचल, जतय सुनवाईक दौरान बोर्ड ई दावा कएलक जे दरगाह वक्फ संपत्ति अछि आ नियमक अनुसार जांचक बाद नियुक्ति कएल गेल अछि। मुदा न्यायालय जखन उपलब्ध अभिलेख आ दस्तावेजक जांच कएलक, तखन एहि दावा के समर्थन मे कोनो वैधानिक प्रमाण नहि भेटल।
न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलकावडीक पीठ अपन फैसला मे स्पष्ट कहलनि जे वक्फ अधिनियमक तहत कोनो संपत्ति के वक्फ घोषित करबाक लेल वैधानिक सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण आ सरकारी अधिसूचना अनिवार्य अछि। एहि प्रक्रिया बिना कोनो संपत्ति पर वक्फ बोर्ड अपन अधिकार स्थापित नहि कऽ सकैत।
अदालतक स्पष्ट संदेश—कानूनी सर्वेक्षण आ अधिसूचना बिना कोनो संपत्तिकेँ वक्फ घोषित नहि कएल जा सकैत। हाईकोर्टक फैसला सँ सुलझि सकैत अछि कतेको विवाद।
अदालत एहि दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी सेहो कएलक जे प्रत्येक कब्र, दरगाह अथवा मजार स्वतः वक्फ संपत्ति नहि मानल जा सकैत। केवल एहि आधार पर जे ओतय वर्षों सँ धार्मिक गतिविधि चलि रहल अछि, कोनो जमीनक कानूनी स्वरूप परिवर्तित नहि भऽ जाइत।
पीठ स्पष्ट रूप सँ कहलनि जे कोनो धार्मिक स्थल मुस्लिम समुदाय सँ जुड़ल होएबाक आधार मात्र पर वक्फ बोर्ड ओकर प्रशासनिक अथवा कानूनी नियंत्रणक दावा नहि कऽ सकैत अछि। ‘वक्फ बोर्डक अधिकार कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया पर आधारित होएबाक चाही, अनुमान अथवा परंपरागत मान्यता पर नहि’, एहि टिप्पणीक संग हाईकोर्ट तमिलनाडु वक्फ बोर्ड द्वारा नियुक्त मुतवल्लीक नियुक्ति रद्द कऽ देलक आ बोर्डक कार्रवाई के कानूनी दृष्टि सँ अवैधानिक ठहरौलक।
कानूनी विशेषज्ञसभक मानब अछि जे मद्रास हाईकोर्टक ई फैसला वक्फ संपत्ति सँ जुड़ल अनेक विवादक सुनवाई मे महत्वपूर्ण संदर्भक रूपमे उपयोग होएत। अदालतक निर्णय स्पष्ट करैत अछि जे धार्मिक संरचनाक अस्तित्व आ वक्फ संपत्तिक कानूनी दर्जा—दूनू अलग-अलग विषय अछि।
एहि निर्णयक बाद भविष्य मे कोनो संपत्ति कें वक्फ घोषित करबाक पूर्व वक्फ अधिनियम, 1995 अंतर्गत निर्धारित सर्वेक्षण, अभिलेखीय सत्यापन आ अधिसूचना प्रक्रियाक पालन आवश्यक मानल जाएत।