अपन पसंद या जाति अनुसार जांच अधिकारी मांगब अस्वीकार्य: हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट एक महत्वपूर्ण टिप्पणी मे कहलक अछि जे कोनो व्यक्ति ई मांग नहि क’ सकैत अछि जे ओकर मामला के जांच ओकर मनपसंद अधिकारी या खास जाति/समुदाय के अधिकारी सँ करायल जाए। अदालत साफ कहलक जे एहन मांग कानून के विरुद्ध अछि।

जस्टिस अब्दुल शाहिद के पीठ एससी/एसटी एक्ट सँ जुड़ल एक मामला मे सुनवाई करैत आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा देलक।

शिकायतकर्ता फेर सँ जांच के मांग करैत विशेष रूप सँ अनुसूचित जाति के पुलिस अधिकारी सँ जांच कराबय के आग्रह केने छल। कोर्ट प्रथम दृष्टया मानलक जे ई आग्रह कानून के विरुद्ध अछि आ न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के संकेत दैत अछि।अदालत स्पष्ट रूप सँ कहलक जे कोनो पक्ष ई तय नहि क सकैत अछि जे जांच ककरा द्वारा कएल जाए।

मामला के अनुसार, पहिने आरोपित पक्ष द्वारा शिकायत दर्ज कएल गेल छल। ओकर बाद कथित जवाबी कार्रवाई में शिकायतकर्ता एफआइआर दर्ज करौलक। पुलिस जांच के बाद कोनो अपराध नहि भेटल आ अंतिम रिपोर्ट दाखिल कएल गेल। तत्पश्चात शिकायतकर्ता विरोध याचिका दायर कय जांच पर पक्षपात के आरोप लगौलक आ फेर सँ जांच के मांग कएलक। संगहि ई सेहो आग्रह कएलक जे जांच अनुसूचित जाति के अधिकारी सँ करायल जाए।

हाईकोर्ट कहलक जे शिकायतकर्ता साफ नीयत सँ अदालत नहि आयल अछि आ ओ प्रक्रिया के अपन हिसाब सँ चलाबय चाहैत अछि, जे स्वीकार्य नहि अछि। अदालत एहि आधार पर मामला के कार्यवाही पर रोक लगबैत अगिला सुनवाई 30 अप्रैल के तय कयलक।

न्यायालय के टिप्पणी स स्पष्ट अछि जे न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष रहबाक चाही, ओहिमे कोनो व्यक्ति के पसंद या जातिगत आधार के कोनो स्थान नहि अछि।

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