
– प्रकाश झा
एहन एकटा किताब हाथमे आयल अछि जकरा देखितहि अनायासे हम अपन अतीत दिस लौटैत चलि गेलहुँ अछि । पोथी पर लिखल नाम ‘बिजलिया भौजी’ देखिते हजारो स्मृति फिल्मक रील जकाँ खुजल आँखिक आगाँसँ ससर’ लागल अछि। ई पोथी नुक्कड़ नाटक सभक संग्रह छै जकर भाषा हिंदी अछि । स्व. वागीश कुमार झा द्वारा लिखल नुक्कड़ नाटक सभक संपादन आ संकलन प्रो. कमलानंद झा कएने छथि । ‘बिजलिया भौजी एवं अन्य नाटक’ नामक एहि संग्रहमे कुल सातटा नुक्कड़ नाटक संकलित अछि । एहि नाटकक नाम छैक – बिजलिया भौजी, शिवालयक प्रेत, ये पुल हिल रहा है, महाभारत एक्सटेंशन, बुद्ध की वापसी, रक्तबीज आ ईदगाह ।
संपादक प्रो. कमलानंद झा अर्थात् हमर सभक प्रिय विभूति भैया, अपन भूमिकामे ‘नुक्कड़ नाटक : मुद्दों को समझने का साझा जरिया’ शीर्षकसँ विस्तृतरूपेँ लिखने छथि । संगहि स्व. वागीश जीक लेखनी, जे.एन.यू. परिसरक तत्कालीन वातावरण, सांस्कृतिक समूह ‘जुगनू’ आ हुनक संगी-साथी सभपर सेहो विस्तारसँ चर्चा कएने छथि।
मुदा, हम तँ एखनहुँ अपन स्मृतिएमे डुम्मी लगाब’ चाहैत छी, जे लगभग 26-27 वर्ष पहिले (1999-2000) शायद मार्च-अप्रैल मासमे :
– कोना विभूति भैया मधुबनीक टाउन हाउलक कैम्पसमे ‘बिजलिया भौजी’ नाटकक फोटोकॉपी ल’ क’ हमरा सभक बीच आएल छलाह,
– कोना पुरा राति जागि क’ हम ओकरा हाथसँ कॉपी पर उतारने रही । जे मूल एखनो हमरा लग अछि ।
– कोना पूर्वाभ्यास शुरू भेल छल । की-की परेशानी होइत रहय ।
– महिला पात्र नहि भेटथि, तँ कोना बमबम भैया मधुमिता, भावना आ नलिनी केँ हमरा सभक संग जुड़लाह ।
– कोना-कोना पूरा मधुबनी शहरक प्रायः सभ स्कूल-कॉलेजमे जा-जा क’ ‘बिजलिया भौजी’क मंचन कयल गेल छल।
– जयनगरक प्रस्तुतिमे भेल झगड़ा… आ कोना श्री भवनाथ जी हमरा सभकेँ पुलिस सुरक्षा संग मधुबनीक लेल ट्रेनमे बैसौने छलाह – ई सभ दृश्य आइयो मोनमे हरियायले अछि।
पटना, दरभंगा, राजनगर, जयनगर, रहिका – कत’-कत’ नहि एहि नाटकक प्रस्तुति भेल, आ सभ ठाम लोक चमत्कृत भ’ जाइत छल । कतेक ताजगी भरल छल ओ नाट्य प्रस्तुति ! आइयो ओहि समयक स्मृति एखनो रोमांचित क’ दैत अछि । की शानदार समूह छल हमर सभहक ओहि समयमे ! हम सभ मधुबनी इप्टासँ जुड़ल रही । बिजलिया भौजीक टीममे रहथि – ऋषि झा, रविभूषण, मधुमिता, नलिनी, भावना, दीपेंद्र कर्ण, विजय वर्मा, राकेश मिश्रा, यदुवीर यादव, मायानंद, अभिषेक, नीलेश, मनोज सिंहा, संतोष कुमार, टॉनी आनंद, संजीव कुमार, रवि कुकरेजा आ हम प्रकाश । निर्देशक विभूति भैया आ हमर सबहक मुख्य कर्ताधर्ता बमबम भैया ।
‘बिजलिया भौजी’क टाइटल गीत श्री सियाराम झा ‘सरस’ लिखने छलाह । आइयो ओकर समवेत स्वर कानमे गूँजैत रहैत अछि। –
सारा देश अगर कौरव की, मौन सभा बन जाए…
पाप करे कोई, अहल्या क्यों पत्थर बन जाए…
ऐसे सारे षडयंत्रों की, गांठे खोलेगी… बिजलिया भौजी बोलेगी…
एहि पोथीमे संग्रहित सातमे स’ तीन टा नाटकक मंचन – ‘बिजलिया भौजी’, ‘महाभारत एक्स्टेंशन’ आ ‘शिवालय का प्रेत’ के मंचन हम सब कयने छी । एहि अद्भुत पोथी सम्पादित करबा लेल आदरणीय विभूति भैया (प्रो. कमलानंद झा) केँ हृदय स’ बधाई ।
पुस्तक : बिजलिया भौजी एवं अन्य नाटक
मूल लेखक :वागीश कुमार झा
सम्पादन : कमलानंद झा
पृष्ठ संख्या :176; मूल्य : 250/-
प्रकाशक : नवारुण, ग़ाज़ियाबाद
(साभार : डॉ प्रकाश झा जी के फेसबुक सं)