गृहमंत्री अमित शाह कहलनि— अपराधक लंबित मामलासभ कम करबा लेल सुप्रीम कोर्ट आ हाई कोर्टसभक संग बनि रहल अछि व्यापक कार्ययोजना

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह आ सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रदिन नई दिल्लीमे आयोजित 26म अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 केर उद्घाटन सत्रकेँ संबोधित करैत कहलनि जे गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट आ विभिन्न हाई कोर्टसभक संग मिलि अपराधसँ संबंधित लंबित मामलासभकेँ कम करबा आ समय पर न्याय सुनिश्चित करबा लेल एकटा व्यापक कार्ययोजना तैयार कऽ रहल अछि।

एहि अवसर पर अमित शाह NCRB-अभिज्ञान, CrPI, e-Prosecution 2.0 आ e-Forensics 2.0 सहित कतेको डिजिटल प्लेटफॉर्मक शुभारंभ सेहो कएलनि, जाहिसँ देशक न्याय वितरण प्रणालीकेँ आर मजबूत बनाओल जा सकत। कार्यक्रममे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) आ केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) केर वरिष्ठ अधिकारीसभ उपस्थित छलाह।

आपराधिक न्याय प्रणालीमे परिवर्तनक नव चरण

अमित शाह कहलनि जे अगस्त 2019 सँ मोदी सरकार देशक आपराधिक कानूनसभमे व्यापक सुधारक प्रक्रिया शुरू कएने अछि। एकर उद्देश्य न्याय प्रणालीकेँ आधुनिक बनबैत विज्ञान आ प्रौद्योगिकीकेँ अपराध जांच आ अभियोजनक प्रत्येक चरणमे शामिल करब अछि।

हुनका अनुसार सरकारक लक्ष्य एफआईआर दर्ज होएबासँ लऽ कऽ अंतिम दोषसिद्धि धरि पूरा न्यायिक प्रक्रिया तीन वर्षक भीतर पूरा करब अछि। पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक संस्थान आ न्यायपालिका केर संयुक्त प्रयाससँ देश एहि लक्ष्यक निकट पहुँचि रहल अछि।

अपराध नियंत्रणमे वैज्ञानिक साक्ष्यक महत्वपूर्ण भूमिका

गृहमंत्री कहलनि जे वैज्ञानिक जांच अपराध नियंत्रणक सभसँ प्रभावी माध्यम अछि। अपराध स्थलसँ साक्ष्यक सही संग्रह आ संरक्षण दोषसिद्धिक दर बढ़ाबए मे अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाबैत अछि।

हुनका अनुसार नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) देशभरिमे कतेको जटिल अपराधक समाधानमे सहायक सिद्ध भेल अछि। ओ राज्यसभसँ आग्रह कएलनि जे अपराधी चिन्हित करबाक अतिरिक्त अपराध स्थलसँ प्राप्त फिंगरप्रिंटकेँ नियमित रूपसँ डेटाबेसमे जोड़ल जाए।

अमित शाह कहलनि, “अपराधी कतबो चतुर किएक ने हो, कानून आ विज्ञानक संयुक्त शक्ति सँ बचि नहि सकैत अछि।”

डेटा एनालिटिक्स आ कृत्रिम बुद्धिमत्तापर जोर

गृहमंत्री राज्यसभसँ अपराध संबंधी डाटाबेसक गुणवत्ता, सुरक्षा आ उपयोगिता बढ़ेबाक आग्रह कएलनि। ओ कहलनि जे केवल डेटा संग्रह करब पर्याप्त नहि अछि, बल्कि ओकरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग आ डेटा एनालिटिक्स केर माध्यमसँ उपयोगी खुफिया सूचनामे बदलनाइ आवश्यक अछि।

हुनका सुझाव छल जे प्रत्येक राज्यमे विशेष टीम गठित कएल जाए जे अपराधक पैटर्न, आदतन अपराधी आ अंतरराज्यीय-अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्कक विश्लेषण कऽ सकए।

आपराधिक न्याय प्रणालीक विशाल डिजिटल आधारभूत संरचना

अमित शाह देशमे डिजिटल न्याय प्रणालीक प्रगतिक उल्लेख करैत कहलनि—

  • देशक सभ 17,840 पुलिस स्टेशन CCTNS नेटवर्कसँ जुड़ि गेल अछि।
  • 37.68 करोड़सँ अधिक एफआईआर आ पुरान रिकॉर्ड डिजिटल रूपमे उपलब्ध अछि।
  • लगभग 22,000 न्यायालय e-Courts प्रणालीसँ जुड़ल अछि।
  • e-Prisons प्लेटफॉर्म पर 2.29 करोड़ कैदीक रिकॉर्ड उपलब्ध अछि।
  • e-Forensics मे 34.48 लाख फॉरेंसिक मामलाक डेटा संग्रहित अछि।
  • Cri-MAC प्लेटफॉर्म पर 43.16 लाखसँ अधिक अलर्ट उपलब्ध अछि।

ओ कहलनि जे आब चुनौती एहि विशाल डाटाबेसक प्रभावी उपयोग अपराध रोकथाम आ जांचमे करबाक अछि।

लंबित मामलासभ कम करबाक दिशा मे पहल

न्यायिक सुधार पर चर्चा करैत अमित शाह कहलनि जे गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट आ हाई कोर्टसभक संग विचार-विमर्श कऽ रहल अछि, जाहिसँ लंबित मामलासभकेँ शीघ्र निपटाओल जा सकए।

ओ कहलनि जे संध्याकालीन अदालत (Evening Courts) आ अन्य नव व्यवस्था लागू करबाक संभावनापर विचार चलि रहल अछि, जाहिसँ उच्च न्यायालय आ सर्वोच्च न्यायालयमे लंबित आपराधिक मामलासभक शीघ्र निपटारा सुनिश्चित भऽ सकए।

हुनका अनुसार नव आपराधिक कानूनक मूल उद्देश्य एहि बातकेँ सुनिश्चित करब अछि जे देशमे कतहु दर्ज अपराधक पूरा न्यायिक प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट धरिक अपील सहित, तीन वर्षक भीतर पूरा भऽ जाए।

प्रशिक्षण आ क्षमता निर्माण पर बल

गृहमंत्री सभ राज्य पुलिस बलसँ आग्रह कएलनि जे आगामी एक वर्ष धरि प्रत्येक सप्ताह कमसँ कम एक दिन नव आपराधिक कानून, फॉरेंसिक प्रक्रिया आ डिजिटल उपकरणसभक प्रशिक्षण लेल निर्धारित कएल जाए।

ओ कहलनि जे प्रशिक्षण केवल एप्लिकेशन चलाबए धरि सीमित नहि रहए, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह, संक्षिप्त चार्जशीट तैयार करबा आ पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक विशेषज्ञ आ न्यायालयक बीच बेहतर समन्वय स्थापित करबापर केंद्रित होए।

एनसीआरबीक भूमिका आर महत्वपूर्ण बनल

अमित शाह राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) आ पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) केर सराहना करैत कहलनि जे दुनू संस्थान देशमे आपराधिक न्याय सुधार लागू करबा मे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहल अछि।

ओ कहलनि जे एनसीआरबी आब केवल रिकॉर्ड संकलन करनिहार संस्था नहि रहि गेल अछि, बल्कि डेटा-आधारित पुलिसिंग आ अपराध रोकथामक दिशा मे एकटा खुफिया-केन्द्रित संस्थाक रूप धारण कऽ रहल अछि।

समापनमे गृहमंत्री कहलनि जे भारतक भविष्यक आपराधिक न्याय प्रणाली प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक साक्ष्य, एकीकृत डाटाबेस आ समयबद्ध न्याय पर आधारित होएत, जाहिसँ अपराध नियंत्रण मजबूत होएत आ कानूनक शासन प्रति आमजनक विश्वास आर बढ़त।

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