
सुधा झा
नई दिल्ली। भारतक वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता आ नवाचारक वैश्विक नेतृत्वकेँ नव दिशा देबाक उद्देश्यसँ इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 केर आयोजन 27 सँ 29 अक्टूबर धरि नई दिल्लीक भारत मंडपममे कएल जा रहल अछि। 27 अक्टूबर 2026 केँ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एहि महत्त्वपूर्ण सम्मेलनक उद्घाटन कयलनि। एहि अवसर पर देश-विदेशक नोबेल पुरस्कारसँ सम्मानित वैज्ञानिक, केंद्रीय विज्ञान आ प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत सरकारक प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद आ देशक अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक, शोधकर्ता आ नवप्रवर्तक उपस्थित छलाह।
ई सम्मेलन केवल विज्ञान आ तकनीकी उपलब्धिक प्रदर्शनक मंच नहि, बल्कि भारतक भविष्यक विकास-दिशा निर्धारित करबाक एकटा महत्त्वपूर्ण अवसर थिक। एकर केंद्रमे वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी आत्मनिर्भरता, उद्योग आ शिक्षण संस्थानक सहयोग तथा शोधक परिणामकेँ आम जनताक जीवन धरि पहुँचयबाक संकल्प निहित अछि। एहि दृष्टिसँ ESTIC 2026 मिथिला सहित देशक ग्रामीण आ क्षेत्रीय समाज लेल सेहो विशेष महत्त्व रखैत अछि।
वैश्विक नवाचारक केंद्र बनबाक दिशा मे भारत
भारत सरकारक प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद भारतकेँ वैश्विक नवाचारक प्रमुख केंद्र बनयबाक रोडमैप प्रस्तुत कयलनि। विज्ञान, प्रौद्योगिकी आ नवाचार आबयवला दशकमे भारतक आर्थिक, सामाजिक आ औद्योगिक प्रगतिक प्रमुख आधार बनत। एहि लक्ष्यक प्राप्ति लेल वैज्ञानिक अनुसंधानकेँ देशक वास्तविक आवश्यकता, उद्योगक विकास आ आम नागरिकक जीवनसँ जोड़ब आवश्यक अछि।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भारतक वैज्ञानिक प्रगतिक उल्लेख करैत एहि बात पर जोर देलनि जे भारत आब वैश्विक नवाचारक क्षेत्रमे मात्र दोसर देशक तकनीक अपनाबयवला राष्ट्र नहि रहल, बल्कि नव तकनीकक विकास आ निर्माणमे सक्रिय भूमिका निभा रहल अछि। भारतक ई परिवर्तन वैज्ञानिक आत्मविश्वास, अनुसंधान क्षमता आ तकनीकी उद्यमशीलताक बढ़ैत सामर्थ्यकेँ दर्शबैत अछि।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सेहो वैज्ञानिक समुदायकेँ आह्वान कयलनि जे भारतकेँ केवल तकनीकक उपभोक्ता बनि कऽ नहि रहबाक चाही, बल्कि वैश्विक स्तर पर तकनीकक निर्माता, नवाचारक अग्रदूत आ मानवताक समस्या सभक समाधान प्रस्तुत करयवला राष्ट्र बनबाक दिशा मे आगू बढ़बाक चाही।
प्रयोगशालासँ जनजीवन धरि विज्ञान
प्रधानमंत्रीक संबोधनक एकटा प्रमुख संदेश छल—वैज्ञानिक अनुसंधानक लाभ प्रयोगशालाक चारि देवाल धरि सीमित नहि रहय। शोधक परिणाम खेत-खलिहान, उद्योग, विद्यालय, अस्पताल आ ग्रामीण जीवन धरि पहुँचलापर तखने ओकर वास्तविक सामाजिक महत्त्व सिद्ध होयत।
आगामी तीन वर्षमे नवाचारक माध्यमसँ गाम-घरक सामाजिक आ आर्थिक चुनौती सभक समाधान खोजबाक आह्वान एहि सोचकेँ स्पष्ट करैत अछि। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल प्रबंधन आ पर्यावरण जेकाँ क्षेत्रमे वैज्ञानिक समाधान विकसित करब देशक प्राथमिकता बनबाक चाही।
मिथिला जेकाँ क्षेत्र, जतय कृषि, बाढ़ि, जलजमाव, ग्रामीण रोजगार आ स्थानीय उत्पादक उचित मूल्य भेटब प्रमुख चुनौती अछि, ओतय एहि प्रकारक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विशेष उपयोगी भऽ सकैत अछि। जँ विश्वविद्यालय, शोध संस्थान, स्थानीय उद्यमी आ किसान आपसमे सहयोग करथि, तँ स्थानीय समस्या सभक समाधान स्थानीय स्तर पर विकसित करबाक संभावना बढ़त।
जीन अनुसंधान: भारतक जैव-विविधता एकटा वैश्विक संपदा
आनुवंशिक अनुसंधान आ जैव-विविधताक संदर्भमे भारतक विशिष्टताक उल्लेख करैत डॉ. जितेंद्र सिंह देशक समृद्ध आनुवंशिक आ शारीरिक लक्षणगत विविधताकेँ महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक संसाधनक रूपमे देखबाक आवश्यकता पर जोर देलनि। भारतक एहि विविधताक व्यवस्थित अध्ययनसँ विभिन्न रोगक आनुवंशिक आधार, रोगक स्वरूप आ उपचारक नव संभावना बुझयमे सहायता भेटि सकैत अछि।
आनुवंशिक अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी आ आधुनिक चिकित्सा विज्ञानक समन्वयसँ भविष्यमे अनेक जटिल रोगक निदान आ उपचारक नव रास्ता खुलि सकैत अछि। मुदा एहि क्षेत्रमे वैज्ञानिक प्रमाण, व्यक्तिगत जानकारीक सुरक्षा आ नैतिक मानदंडक पालन सेहो अत्यंत आवश्यक अछि।
सेमीकंडक्टर आ रणनीतिक तकनीकमे आत्मनिर्भरता
आधुनिक अर्थव्यवस्थामे सेमीकंडक्टर चिप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक आ परमाणु ऊर्जा जेकाँ क्षेत्रक महत्त्व निरंतर बढ़ि रहल अछि। प्रधानमंत्री भारतक वैज्ञानिक आ औद्योगिक क्षमता पर बल दैत एहि क्षेत्र सभमे स्वदेशी अनुसंधान, निर्माण आ नवाचारकेँ प्रोत्साहित करबाक आवश्यकता रेखांकित कयलनि।
सेमीकंडक्टर निर्माणमे भारतक बढ़ैत भागीदारी देशक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, डिजिटल सेवा आ वैश्विक आपूर्ति शृंखलामे भागीदारीकेँ मजबूत कऽ सकैत अछि। तहिना अंतरिक्ष क्षेत्रमे वैज्ञानिक उपलब्धिक संग व्यावसायिक अवसर, आ जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ताक विकास भारत लेल नव संभावना उत्पन्न कऽ रहल अछि।
एहि सभ प्रयासक मूल उद्देश्य तकनीकी निर्भरता कम करब, देशक भीतर नव रोजगार सृजित करब आ भारतकेँ भविष्यक तकनीकक विकासमे अग्रणी बनायब अछि।
मिथिला आ मैथिल समाज लेल विज्ञानक नव अवसर
ESTIC 2026 मे उठाओल गेल वैज्ञानिक आ तकनीकी विषय मिथिलाक विकास, मैथिली भाषाक संवर्धन आ स्थानीय युवाक भविष्यसँ सेहो जुड़ल अछि। विज्ञानक लाभ तखने व्यापक होयत, जखन आधुनिक तकनीक स्थानीय भाषा, स्थानीय आवश्यकता आ आम जनजीवन धरि पहुँचत।

1. मातृभाषामे विज्ञान शिक्षा आ मैथिलीक डिजिटल भविष्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा आ भारतीय भाषामे शिक्षाकेँ प्रोत्साहित करबाक महत्त्वपूर्ण दिशा दैत अछि। विज्ञान आ तकनीकी विषय सभकेँ मैथिलीमे सरल, सहज आ रोचक ढंगसँ प्रस्तुत कयलासँ छात्र-छात्रा सभमे वैज्ञानिक सोच विकसित करबाक अवसर बढ़त।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा मॉडल, आवाज पहचानयवला सॉफ्टवेयर, स्वचालित अनुवाद आ डिजिटल शिक्षण सामग्रीक विकास मैथिलीक डिजिटल उपस्थिति मजबूत कऽ सकैत अछि। एहि लेल मैथिली भाषाक गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री, शब्दावली, ध्वनि-अभिलेख आ भाषाई आँकड़ा तैयार करब आवश्यक होयत।
2. अंतरिक्ष तकनीक आ ड्रोनसँ कृषि आ बाढ़ि प्रबंधन
मिथिलाक सामाजिक आ आर्थिक जीवनमे बाढ़ि, जलजमाव आ कृषि प्रमुख मुद्दा रहल अछि। उपग्रहसँ प्राप्त चित्र, मौसम संबंधी आँकड़ा, भौगोलिक सूचना प्रणाली आ ड्रोनक उपयोगसँ फसलक स्थिति, जलजमाववला क्षेत्र आ प्राकृतिक आपदाक प्रभावक बेहतर आकलन कयल जा सकैत अछि।
समय पर विश्वसनीय पूर्वानुमान आ प्रशासनिक तैयारीसँ बाढ़िक क्षति कम करबाक प्रयासकेँ बल भेटि सकैत अछि। तहिना मखाना आ धानक खेतीमे ड्रोनक माध्यमसँ फसलक निगरानी, कीट-रोगक पहचान आ आवश्यकतानुसार छिड़काव कयल जा सकैत अछि। मुदा एहि तकनीकक सफल उपयोग लेल स्थानीय परिस्थिति, किसानक प्रशिक्षण आ लागत पर ध्यान देब जरूरी अछि।
3. स्वच्छ ऊर्जा आ ग्रामीण अर्थव्यवस्थाक विकास
सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन आ परमाणु ऊर्जाजेकाँ क्षेत्र भारतक स्वच्छ ऊर्जा संबंधी प्रयासक महत्त्वपूर्ण हिस्सा अछि। भारतक घोषित लक्ष्य 2070 धरि शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करब अछि।
मिथिलाक ग्रामीण क्षेत्रमे सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, खाद्य प्रसंस्करण, शीत भंडारण आ लघु उद्योग सभक विकाससँ ऊर्जा संबंधी चुनौती कम करबाक संभावना अछि। मखाना, फल आ कृषि उत्पादक सुरक्षित रखबाक लेल ऊर्जा-कुशल भंडारण व्यवस्था किसान आ स्थानीय उद्यमी दुनू लेल लाभकारी भऽ सकैत अछि।
4. जैव-नवाचार आ कृषि तकनीकसँ स्थानीय उत्पादक पहचान
मिथिलाक मखाना, मालदह आम आ कतरनी धान अपन विशिष्टताक लेल प्रसिद्ध अछि। आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी, कृषि अनुसंधान, खाद्य प्रसंस्करण आ फसल कटाइ-पछात तकनीकक उपयोगसँ एहि उत्पाद सभक गुणवत्ता, भंडारण क्षमता आ बाजारमे पहुँच बेहतर बनाओल जा सकैत अछि।
वैज्ञानिक पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण, मूल्य संवर्धन आ डिजिटल विपणनक माध्यमसँ स्थानीय उत्पादकेँ राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय बाजार धरि पहुँचयबाक अवसर बढ़ि सकैत अछि। एहि प्रक्रियामे किसान उत्पादक संगठन, कृषि विश्वविद्यालय, शोध संस्थान आ स्टार्टअप महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकैत अछि।
5. छोट शहरक युवा आ डीप-टेक स्टार्टअप
भारतमे स्टार्टअप संस्कृति तेजी सँ विकसित भऽ रहल अछि। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, कृषि तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा आ अंतरिक्ष तकनीक जेकाँ क्षेत्रमे नव उद्यमक संभावना बढ़ि रहल अछि।
दरभंगा, मधुबनी, सहरसा आ मिथिलाक अन्य शहरक युवा स्थानीय समस्या सभकेँ नवाचारक अवसरमे बदलि सकैत छथि। मैथिली भाषा आधारित डिजिटल सेवा, कृषि उपजक बाजार-संपर्क, बाढ़ि संबंधी सूचना, ग्रामीण स्वास्थ्य आ शिक्षा लेल तकनीकी समाधान एहि क्षेत्रमे उपयोगी स्टार्टअपक आधार बनि सकैत अछि।
एहि लेल उच्च शिक्षण संस्थान, उद्योग, निवेशक आ सरकारी योजनाक बीच प्रभावी सहयोग आवश्यक अछि। संगहि, नव उद्यमी सभकेँ तकनीकी प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता आ बाजार धरि पहुँच उपलब्ध करयबाक जरूरत अछि।
विज्ञान जन-जनक प्रगतिक आधार बनय
ESTIC 2026 भारतक वैज्ञानिक क्षमता, नवाचार आ तकनीकी आत्मनिर्भरता पर राष्ट्रीय विमर्शकेँ नव दिशा दैत अछि। एहि सम्मेलनक व्यापक संदेश स्पष्ट अछि—वैज्ञानिक अनुसंधानक सफलता केवल प्रयोगशालाक उपलब्धिसँ नहि, बल्कि समाज आ अर्थव्यवस्थापर ओकर सकारात्मक प्रभावसँ मापल जेबाक चाही।
सरकार, निजी क्षेत्र, विश्वविद्यालय, शोध संस्थान आ नव उद्यमी सभक बीच सहयोग मजबूत कयलासँ भारत नव तकनीकक विकास आ उपयोगमे आगू बढ़ि सकैत अछि। एहि क्रममे ग्रामीण क्षेत्र, स्थानीय भाषा आ क्षेत्रीय आवश्यकताकेँ प्राथमिकता देब सेहो जरूरी अछि।
मिथिलाक लेल ई अवसर अछि जे ओ अपन पारंपरिक ज्ञान, कृषि संपदा, भाषाई विरासत आ युवा प्रतिभाकेँ आधुनिक विज्ञान आ तकनीकसँ जोड़य। मैथिलीमे वैज्ञानिक सामग्रीक निर्माण, स्थानीय समस्याक तकनीकी समाधान आ नव उद्यमशीलताकेँ प्रोत्साहन देबाक माध्यमसँ एहि क्षेत्रक विकास यात्राकेँ नव गति भेटि सकैत अछि।
विकसित भारतक संकल्प तखने पूर्ण होयत, जखन विज्ञानक उपलब्धि देशक प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक भाषा आ समाजक अंतिम व्यक्ति धरि पहुँचत। मिथिला आ मैथिली लेल एहि वैज्ञानिक युगक सार्थक संदेश सेहो एतबे अछि—परंपराक जड़िसँ जुड़ल रहैत आधुनिक ज्ञान आ नवाचारक बाट पर आत्मविश्वासक संग आगू बढ़ब।