नई दिल्ली। मैथिली रंगमंच मे महिला निर्देशकक अभाव स जुड़ल विमर्श सोशल मीडिया पर किछु दिन पहिने जोर पकड़ने छल। बहुतो रंगकर्मी आ कला प्रेमी एहि विषय पर अपन-अपन विचार रखने छलाह। वास्तव मे देखल जाए त एहि बात केँ सोझे- सोझ खारिज करब उचित नहि होयत, मुदा एहि निष्कर्ष पर पहुँचब सेहो अतिशयोक्ति होयत जे मैथिली रंगमंच मे महिला निर्देशकक स्थिति कमजोर अछि।
एहि बहसक बीच मलंगिया आर्ट्स आ वरिष्ठ रंगकर्मी ऋषि कुमार झा ‘मलंगिया’ द्वारा आयोजित मलंगिया महोत्सव एकटा महत्वपूर्ण अवसर बनि सामने आयल। भारत आ नेपालक मैथिली रंगमंचक लगभग समग्र प्रतिनिधित्व एहि मंच पर एकजुट भेल, जतय न केवल रंगकर्मक विविधता देखबाक अवसर भेटल, बल्कि महिला निर्देशनक स्थिति सेहो स्पष्ट रूप सँ उभरि क’ सामने आयल।
महोत्सव मे कुल 35टा नाटकक मंचन भेल, जाहि मे सँ 5टा नाटक महिला निर्देशक सभक स्वतंत्र निर्देशन मे प्रस्तुत कयल गेल। खास बात ई रहल जे पाँचू निर्देशिकाक प्रस्तुति दर्शक आ समीक्षक दुनू स्तर पर प्रभाव छोड़ए मे सफल रहल। एहि सँ स्पष्ट संकेत भेटल जे मैथिली रंगमंच मे महिला निर्देशक सभक उपस्थिति न केवल सशक्त अछि, बल्कि भविष्य लेल आश्वस्त करए बला सेहो अछि।
महिला निर्देशक सभ आ हुनकर नाटक एहि प्रकार सँ रहल—
1. सुश्री सुप्रीता वात्स्यायन
हिनकर निर्देशन मे “भूत” नाटकक मंचन मल्लर सभागार मे भेल। प्रस्तुति यात्री, मधुबनी/दिल्ली द्वारा कयल गेल।
2. सुश्री सुनीता झा
हिनकर निर्देशन मे “फटफटिया काका” नाटक मल्लर सभागार मे प्रस्तुत भेल। प्रस्तुति सखी बहिनपा, दिल्लीक रहल।
3. सुश्री नीरा झा
हिनकर निर्देशन मे “एक टुकड़ा पाप” नाटक सफीक सभागार मे मंचित भेल। प्रस्तुति क्षमा नीरा फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा देल गेल।
4. सुश्री सोनी निलू झा
हिनकर निर्देशन मे “बिरजू बिल्टू आ बाबू” नाटकक मंचन सफीक सभागार मे भेल। प्रस्तुति अपराजिता, दिल्लीक रहल।
5. सुश्री ज्योति झा
हिनकर निर्देशन मे “बुलबुला” नाटक साञ्झा सभागार मे प्रस्तुत भेल। प्रस्तुति जय जोहार फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा कयल गेल।
दिलचस्प बात ई अछि जे मैथिली रंगमंचक भविष्य मानल जा रहल एहि पाँचू निर्देशिका मूल रूप सँ मधुबनी आ दरभंगाक निवासी छथि। एहिमे सँ सबसँ बेसी अनुभव सुश्री सुप्रीता वात्स्यायन केँ अछि। हिनकर रंगमंचीय यात्रा वर्ष 2002 मे मधुबनी सँ एक अभिनेत्री केर रूप मे शुरू भेल छल। बाँकी चारू निर्देशिकाक रंगमंचीय शुरुआत दिल्ली सँ भेल अछि।
आइ ई सभ महिला कलाकार केवल सशक्त अभिनेत्री मात्र नहि छथि, बल्कि कुशल निर्देशिका केर रूप मे सेहो अपन पहचान बना चुकल छथि। मलंगिया महोत्सव एहि बातक प्रमाण देलक जे मैथिली रंगमंच मे महिला नेतृत्वक संभावना प्रबल अछि, आ आब एहि दिशा मे प्रोत्साहन आ अवसरक निरंतरता आवश्यक अछि।
