
नई दिल्ली। भारतीय रेल यात्री के लेल एकटा पैघ राहतक तैयारी कए रहल अछि। आब स्टेशन लग पहुँचिते ट्रेनक गति बहुत कम होयबाक आ आउटर वा लूप लाइन पर देर धरि ठाढ़ रहबाक समस्या सँ छुटकारा भेटबाक मार्ग प्रशस्त भ’ रहल अछि। रेलवे स्टेशनक लूप लाइन आ प्लेटफॉर्मक पटरि कें आधुनिक स्वदेशी बैलास्ट-लेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाला ट्रैक) मे बदलए के तैयारी क’ रहल अछि। एहि नव तकनीक सँ प्लेटफॉर्म आ लूप लाइन पर ट्रेन 60 किलोमीटर प्रति घंटा धरि पहुँच सकत।
रेलवे स्वदेशी बैलास्ट-लेस ट्रैक बिछेबाक तैयारी मे, आउटर पर ट्रेन रुकबाक समस्या सँ भेटत छुटकारा।
अखन स्टेशनक आसपास पुरान गिट्टीयुक्त ट्रैक पर सुरक्षा कारण सँ ट्रेनक गति लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटा धरि सीमित राखल जाइत अछि। एहि कारणे प्लेटफॉर्म पर पहुँचए मे बेसी समय लगैत अछि आ पाछाँ आबि रहल एक्सप्रेस तथा सुपरफास्ट ट्रेनसभ कें सेहो आउटर पर प्रतीक्षा करए पड़ैत अछि। परिणामस्वरूप यात्रीक समय बर्बाद होइत अछि।
स्वदेशी ‘बीएलटी-एएफएस (सीटी-52)’ तकनीकक उपयोग
रेलवे बोर्डक कार्यकारी निदेशक (ट्रैक) अनुराग कुमार द्वारा एहि संबंध मे आदेश जारी कएल गेल अछि। अकर अनुसार, रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित स्वदेशी बीएलटी-एएफएस (सीटी-52) तकनीकक उपयोग कएल जाएत। ई एकटा मजबूत कंक्रीट आधारित बैलास्ट-लेस ट्रैक प्रणाली अछि, जे 25 टन एक्सल लोड धरि भारी ट्रेनसभक संचालन सहज रूप सँ क’ सकैत अछि।
आउटर पर ठाढ़ रहबाक झंझट होएत कम
नव ट्रैक प्रणाली लागू भेला पर स्टेशन लग ट्रेनक आवाजाही अधिक सुचारु भऽ सकैत अछि। जाहि सँ आउटर पर ट्रेनक अनावश्यक प्रतीक्षा कम होयबाक संभावना अछि। प्लेटफॉर्मक पटरिक बीच कंक्रीट ब्लॉक रहला सँ साफ-सफाई सेहो आसान होएत। संगहि, पटरिक धँसब, टूटब वा रखरखाव संबंधी समस्या सेहो काफी हद धरि घटत।
रेलवे द्वारा निर्धारित प्रावधानक अनुसार ट्रैक निर्माण करनिहार कंपनीसभ के पाँच वर्षक परफॉर्मेंस वारंटी देब’ अनिवार्य होएत। शुरुआती तीन परियोजनाक निगरानी आरडीएसओ स्वयं करत।
देशभर मे लागू हो सकैत अछि व्यवस्था
यदि शुरुआती परियोजना सफल रहैत अछि तऽ भविष्य मे एहि प्रणाली के देशक अन्य स्टेशनसभ पर सेहो लागू कएल जा सकैत अछि। रेलवे के अनुसार एहि सँ ट्रेनक परिचालन गति, सुरक्षा, समयपालन आ यात्री सुविधा मे उल्लेखनीय सुधार होएत।