
अफ्रीकाक सहारा मरुभूमि मे बसोबास करनिहार तुआरेग समाज अपन अजगुट विवाह परंपरा आ महिला कें प्राप्त विशेषाधिकारक कारण दुनियाभरि मे विख्यात अति।
नई दिल्ली। विवाहक बाद सामान्यतः दुल्हिन अपन घर छोड़ि ससुराल जाइत छथि, मुदा अफ्रीकाक सहारा मरुभूमि मे बसनिहार तुआरेग समाज मे एकर ठीक उल्टा परंपरा अछि। एहि समाज मे विवाहक बाद दुल्हा अपन घर छोड़ि पत्नीक घर मे रहए जाइत छथि। एतबे नहि, वयस्क होइतहि पुरुष चेहरा पर नकाब धारण करैत छथि, जखनकि महिला चेहरा नहि झांपैत छथि।
तुआरेग समाज मुख्य रूप सँ माली, नाइजर, अल्जीरिया, लीबिया आ बुर्किना फासो मे बसोबास करैत अछि। मरुभूमिक कठोर जीवनक बादो ई समाज अपन प्राचीन परंपरा आ सांस्कृतिक पहचान कें आइधरि जोगौने अछि।
एहि समाजक परिवार मे महिलासभक भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण मानल जाइत अछि। विवाहक बाद पति पत्नीक परिवारक संग रहैत छथि। कतेको स्थान पर घर आ संपत्ति सँ जुड़ल अधिकार महिला लग’ रहैत अछि। पारिवारिक निर्णय मे सेहो हुनकर राय के विशेष महत्व देल जाइत अछि।
तुआरेग समाजक दोसर खास पहचान पुरुषसभक नकाब अछि। वयस्क भेलाक बाद पुरुषसभ विशेष प्रकारक नील रंगक कपड़ा सँ चेहरा झांपैत छथि। ई नकाब केवल मरुभूमिक धूलि-रेतिसँ बचबाक साधन नहि, बल्कि सम्मान, परिपक्वता आ सामाजिक पहचानक प्रतीक सेहो मानल जाइत अछि।
एहि समाज मे महिला के अपेक्षाकृत बेसी सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्त अछि। ओ शिक्षा, व्यापार, सांस्कृतिक गतिविधि आ पारिवारिक जीवन मे सक्रिय भूमिका निभाबैत छथि। एहि कारण तुआरेग समाज के दुनिया के सभसँ विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था मे गिनल जाइत अछि।