निवेदिता मिश्रा झा
मिथिलाक गाथा कतओक शताब्दी धरि पसरल अछि । ई कहल गेल अछि जे गौतम बुद्ध आ वर्धमान महावीर दुनू गोटे मिथिला मे रहल छलाह । ई प्रथम सहस्त्राब्दिक दौरान भारतीय इतिहासक केंद्र छल आ विभिन्न साहित्यिक आ धर्मग्रंथ संबंधी काज मे अपन योगदान देलक। मैथिली मिथिला मे बाजय जायवला भाषा थिक । भाषाविद मैथिली कें पूर्वी भारतीय भाषा मानलनि अछि आ एहि तरहें ई हिन्दी सँ भिन्न अछि । मैथिली कें पहिने हिन्दी आ बंगला दुनूक उप-भाषा मानल जाइत छल। वस्तुतः मैथिली आब भारतीय भाषा बनि चुकल अछि। मिथिलाक सभ सँ महत्वपूर्ण संदर्भ हिन्दू ग्रंथ रामायण मे अछि, जतए एहि भूमिक राजकुमारी सीता कें रामक पत्नी कहल गेल अछि। राजा जनक सीताक पिता छलाह, जे मिथिला पर जनकपुर सँ शासन केलनि । प्राचीन समय मे मिथिलाक अन्य प्रसिद्ध राजा भानुमठ, सतघुमन्य, सुचि, उर्जनामा, सतध्वज, कृत, अनजान, अरिस्नामी, श्रुतयू, सुपाश्यु, सुटयशु, श्रृनजय, शौरमाबि, एनेना, भीमरथ, सत्यरथ, उपांगु, उपगुप्त, स्वागत, स्नानंद, शुसुरथ, जय-विजय, क्रितु, सनी, विथ हस्या, द्ववाति, बहुलाश्व आदि भेलाह ।
वर्तमान मे मैथिलीक बजबा मे लोक कें असोकर्ज होइत छैक। जौं मिथिला में कनिकों मैथिली बाचल अछि त ओ अहि मुसहरी में सदायक ओहिठाम, ओ अछि धोबियानी में साफी जीक ओहिठाम, ओ अछि दुसधटोली में पासवान जीक ओहि ठाम, ओ अछि चमरटोली में रामजीक ओहि ठाम। मैथिली बांचल अछि पात खरड़निक पथिया में, मैथिली बाचल अछि सगतोड़निक खोइछा में, मैथिली बांचल अछि चरवाहक झुंड में मैथिली बाचल अछि खेतक आडि़ में। मैथिली कें पोस पुत बना रखिनिहारक आंगन में आब सड़क कें पेड़ा नहि कहल जाइत अछि आ नहि जलखै, पनपियाइ, कलौऽ आ बेरहटक बात होइत अछि। हमार अहांक आंगन में आब झिझिया, झरनी, जट-जटिन, डोम कच्छ, पचनियाक जिक्र सेहो नहि होइत अछि। नइ जांतक दर-दरक आवाज आवैत अछि आ नहि ऊखरि आ मूसड़क धम-धमक आ नहि ढेकिक आवज निकलैत अछि मुदा सत्य कहि त मैथिली एखनो ओहि ठाम बसैत अहि जेकरा हमरा लोकनि अलग कय देलौह।
मिथिला सं पलायन पिछला कतेको दषकक रोग अछि। एकर समाधान आई धरि नहि भेल। ओना संगहि इहो गप्प उठैत अछि जे बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मिथिला मे आयोजित प्रायः प्रत्येक सभा मे बेर-बेर कहैत रहलाह अछि जे ‘मिथिलाक विकासक बिना बिहार विकास संभव नहि।’ जदि हृदय सँ मुख्यमंत्री के एहि गप्प के स्वीकार करैत छी त सवाल इहो ठाढ होइत अछि जे मिथिलाक मातृभाषा मैथिली के प्राथमिक स्तर सँ अध्ययन अध्यापनक आदेश मे बिलंब किऐक ? अन्य विषयक प्राथमिक स्तर पर मैथिली शिक्षकक नियुक्तिक प्रावधान किऐक नहि ? उच्च शिक्षा मे मैथिलीक अध्यापनक व्यवस्था रहितहुँ प्राथमिक स्तर पर मैथिलीक अध्यापन प्रावधान नहि रहला सँ महाविद्यालय आ विश्वविद्यालय स्तर पर मैथिलीक छात्र-छात्रा सभक संख्या सोचनीय अछि। एहि दुरंगी नीति के की अर्थ ?
ओना राज्य सरकार विद्यापति पर्व समारोह के राजकीय पर्व समारोह आ जानकी नवमी के दिन सार्वजनिक अवकाशक घोषणा कऽ एहि क्षेत्रक लोकनिक मुँह बन्न करबाक प्रयास अवश्य कयलक अछि। मुदा एहि सँ मातृभाषा मैथिलीक विकास कतय धरि संभव भऽ सकत ? मिथिलाक विकासक लेल ओकरा जमीनी लीडरशिप चाही। एहन एहन ग्रुप बनए जे ग्रुप मिथिलाक सुदूर देहात मे घुमि लोक सभ क’ जागृत करए, जेकर भाषा मात्र मैथिली छैक। ओ जे बजैत अछि सैह मैथिली छैक। मैथिलीक संग कतेक षड़यंत्र भ’ रहल छैक। कनेक टेढ़ बाजू त’ मैथिली ,बज्जिका , अंगिका मुंगेरिया आ आर कतेक भाषा मे परिणत भ’ जायत छैक। मुदा से गलत छैक। कोनो भाषा शुद्ध सभठाम नहि बाजल जायत छैक। जे हिंदी इलहाबादक छैक से कतौ दोसर ठामक छैक की ? जतेक प्रान्त ओतेक तरहक हिंदी। बनारस ,पटना ,कोलकोता ,भोपाल ,चंडीगढ़ ,दिल्ली आ दक्षिण भारत कतौक हिंदी मानक नहि मुदा ओ सभ हिंदी छैक। हर भाषा मे वैह गप छैक मुदा मैथिली संग सौतेला जकां व्यवहार। एकर मूल कारण जे ग्रासरूट पर हम सभ मैथिल के एखन तक जागृत नहि कयल। सहरसा, पूर्णिया आ कटिहार जिलाक सुदूर देहात मे जाइत छलौ त’ देखियैक मैथिली छोरि कोनो भाषा केकरो नहि बाजल होयक। पुछला पर उत्तर भेटय जे हमरा सभक मातृभाषा हिंदी अछि। ईहो गप मैथिली मे बजैत छल। एक बेर सहरसा जिलाक एकटा कालेज टीचर स गपक काल कहलनि जे हुनकर मातृभाषा हिंदी छनि।
भारत आ नेपाल दुनू ठाम मैथिली संवैधानिक भाषाक दर्जा त प्राप्त केने अछि मुदा आम मैथिल जन एखन धरि मैथिलीक विषय में नहि त बात केनाइ उचित मानैत छथि आ नहि मैथिली कें भाषाक पूर्ण दर्जा देवाक प्रति मैथिल समाज सजग छथि। अहि में नेपालाक मैथिल समाजक प्रयास आ हुनक मैथिलीक प्रति भावनात्मक लगाव अवश्य देखल जाइत अछि मुदा भारत दिस मैथिली कतौ ने कतौ उपेक्षित हेवाक अभिषाप पावि हक्कन कानि रहल अछि। अहिक पाछु बहुत रास बात छैक जे मैथिली कें उपेक्षित हेवाक लेल विवश कय रहल अछि। सब सं प्रमुख कारण थिक जे मैथिल स्वंय मैथिली कें वर्ण आ वर्ग विशेष में बाटि देने छथि आ ओहि ठाम सं मैथिलीक पतन शुरू भय जाइत अछि।
अहिक लेल समाजक किनो एक व्यक्ति विशेष दोषी नहि अपितु ओ वर्ग जे मैथिली कें दू दिशा में विभाजित कय ओकरा भिनौज कय देलनि। जतेक दोषी बटनिहार छथि ओतबे दोषी ओहि बखरा कें स्वीकार केनिहार सेहो छथि। दोषी ओहो छथि जे मैथिली कें बपौती संपत्ति बुझि ओकरा हथिया लेलनि आ दोषी ओहो छथि जे इ कहि संतोष कय लेलनि जे मैथिली हमर नहि थिक। जे वर्ग मैथिली कें हथिया लेलनि आब ओ वर्ग अपना आप कें संभ्रांत कहेवा में बेसी गौरवांवित महसूस कय रहला अछि। मुदा हुनक मान आ सम्मानक पाछु मैथिलीक जे दुर्दशा भय रहल अछि ओ ककरो सं छुपल नहि अछि। कहवाक अभिप्राय इ जे मैथिली आब झा जी, मिश्रा जी, ठाकुार जी, खॉ जी, चॉधरी जी, सिंह जी सहित कतेको जीक दरबज्जा पर नहि अपितु कतौ आओर बसैत अहि।
