
नई दिल्ली। जदि कहि जे रस सं रसायन बनल अछि आ ओहि रस सं अनगितन सुस्वादु खाद्य पदार्थ कें सृजन, त कोनो अतिश्योक्ति नहि होयत। मिथिला अपन वृहत खान पान कें कारणे विश्वविख्यात अछि। लोकक पैसार जहन गाम घर सं शहर आ तकर बाद महानगर दिस भेलैन्ह त मिथिलाक खान पान सेहो दिल्ली आ मुंबई सहित आनो महानगर पहुंचल। लोकक कें गाम सं बाहर ग्रामीण स्वाद भेटैन्ह, ओहि लेल सदिखन उताहुल रहैत छथि।
मैथिलक एहि उत्कंठा कें देखैत साल 2014 मे बदलैत समयक संग राजधानी दिल्ली मे मिथिला गृह उद्योगक शुरूआत भेल। मधुबनी निवासी अमरनाथ मिश्रा मात्र दस हजार सं अपन काज शुरू केलाह आ आइ लाखों के कारोबार छन्हि। गामक तिसियौरी, अदौरी, अचार, कुम्हरौरी, चूड़ा, चाउर, मखान सं लय क सांठ-राजक बहुतो सरंजाम छन्हि हिनका लग। कहैत छथि जे दिल्ली के किछु बरखक मार्केटिंग के काज कयलौं। देखैत रहि जे सभ क्षेत्रक समान दिल्ली मे भेटैत अछि, मुदा अपन गाम घरक चूड़ा आ चाउर धरि नहि भेटैत अछि। मिथिलाक लोक चटोर मानल जाइत छन्हि, मुदा हुनका लेल ओ स्वाद कहां छन्हि। ताहिं हम मात्र दस हजार रूप्या सं काज शुरू कएल। पहिने एकसिर घरक लोक संग। ओकर लोक संग होयत गेलाह।
एक सवाल कें जवाब मे अमरनाथ मिश्रा कहैत छथि जे बाजार मे पहिने जे अचार आदि उपलब्ध रहैत छल, ओहि मे कतेको रास रसायन कें प्रयोग कएल जाइत अछि। जाहि सं स्वास्थ्य पर किछु प्रतिकूल प्रभाव पड़ैत छैक। एहन मे हम मिथिलाक पारंपरिक रूप से बनेनाय शुरू कएल। गाम घर मे माय-दाय लोकनि जेना नून आ रौद मे सुखा कय अचार बनाबैत छलीह, ओहिना मिथिला गृह उद्योग एकर शुरूआत कएल। मिथिलाक पारंपरिक तरीका स्वास्थ्यक लेल बहुत नीक रहैत छैक।
कहल जाइत छैक सोच नव हुअय आ काज करबाक उत्कंठा त रस्ता भेटैत जाइत छैक। ओना त मानब अछि जे सासु आ पुतोहु मे फंसैत रहैत अछि। मुदा जहन सासु आ पुतोहु मिलि कय नब काज शुरू करैत छथि त अनुभव आ जोश सं नव रस्ताक सृजन होइत अछि। मिथिलाक लेल एहने छथि रूचि झा आ रेणुका कुमारी। दुनू गोटे मिलि क मिथिला पेंटिंग्स कें नव मुकाम देलीह। मिथिला पेंटिंग्स पर आधारित स्टार्टअप कें शुरुआत केलीह आ आइ हिनक प्रॉडक्ट्स के खरीदार विदेशों मे छन्हि। रूचि झा बताबैत छथि जे जहन ओ गाम अयलीह त गाम मे मिथिला पेंटिंग्स कें देखिकय हुनका लगलैन्ह जे हम किएक नहि एहि कला कें दुनियाभर मे पहुंचाबी। भरोस जागल कि हम एहि काज के बखूबी कय सकैत छी। एतय सं शुरू भेल मिथिला हैंडीक्राफ्ट्स आ हैंडलूम प्राइवेट लिमिटेड कें शुरुआत।
आमतौर पर स्टार्टअप्स मे लोक अपन संगी-साथी आ बिजनेस पार्टन कें साझीदार बनबैत छथि। मुदा रुचि कें संग देलखिन्ह हुनक सास। रेणुका जी। रुचि कहैत छथि जे हुनक सास दरभंगा मे रहैत छथिन्ळ। ओ वनस्पति विज्ञान कें प्रोफेसर के तौर पर काज कय चुकल छथि। हुनका मधुबनी पेंटिंग्स मे बेस रुचि छन्हि। हमरा दुनूक मिलैत-जुलैत इंट्रस्ट कें कारण स्टार्टअप कें शुरुआतक कारण बनल। आब त बहुतो लोक मिथिला पेंटिंग्स कें पैघ शहर मे जा कय बेचि रहल छथि।
कोरोना काल बहुतो लेल अवसर लय कय आयल। दिल्ली के रोहिणी मे रहय वाली वंदना ठाकुर कहैत छथि जे हम पछिला कतेको साल सं मिथिला पैंटिंग्स करैत छी। लोक कब अबैत छलाह। मुदा कोरोना मे मिथिला पेंटिंग्स वाला मास्कक लेल त बुझू जे उजाहि उठि गेल। हमर लग एतेक ऑर्डर आबय लागल जे हम ओकरा पूरा नहि कय सकल। पहिने एकसरि काज करैत रहि, मुदा कोरोना काल मे लोक कें कूरियर कें माध्यम सं भेजनाय शुरू कएल। एहि मे घरक आरो लोक सहयोग केलाह।
किछु दिन पहिने जहन कल्पना झा आ उमा झा शार्क टैंक इंडिया लय क लोकक सोझां अयलीह, त लोकक सराहना भेटलैन्ह। जून 2021 मे बिहार मे मिथिला के पारंपरिक अचार आ चटनी कें उत्पादन करय वाला झाजी स्टोर शुरू केलैन्ह। आब शार्क टैंक इंडिया पर अयलाक बाद ई स्टार्टअप धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कय रहल अछि। कल्पना झा कहैत छथि, हमर शार्क टैंक इंडिया एपिसोड प्रसारित होबाक बाद इ अनुभव जबरदस्त रहल। लोक हमरा आ हमर व्यवसाय कें चिन्हैत छथि। पहिने एक महीने मे जतेक ऑर्डर भेटैत छल, ओ ऑर्डर अब हमें एक दिन मे भेट रहल अछि।
अर्थशास्त्र में पीएचडी कएनिहार बिहार लोक सेवा आयोग कें मुख्य परीक्षा पास कएलाक बाद राकेश कुमार झा गांव घुरलाह। राकेश मधुबनी मे मिथिला पैंटिग्स सं जुड़ल स्टार्ट अप शुरू केलाह। आजुक दिन मे हुनक संग करीब तीन सौ मिथिला पेंटिंग बनाबय वाला कलाकार कें नियमित काज भेटि रहल अछि। ओ कहैत छथि जे हम हर साल करीब 50 लाख सं बेसी कें कारोबार कय रहल छी।