शोक संवेदनाक लाथे

जे देखाइत छै, लगितो छै, से व्यक्ति एहन-ओहन नहि सोचि सकैत छै । ओ बिंदास देखायत । मानू सूखल गाछ मे कनोजरि आनि देअय !

तैं हम विश्वासपूर्वक नहि कहि सकैत छी जे ई व्यक्ति असमय चलि देबाक ठानि लेत, तँ चलि देत । निर्णय तँ अंदर मे नुकायल रहैत छै । बाहर सँ आकलन करब हमर-अहाँक अल्प ज्ञान अछि ।

सायास मृत्युक वरण करब, असल मे एक साहसपूर्ण निर्णय अछि । एहने व्यक्ति एहन दु:साहस क’ सकैत अछि ।

ई तँ आम व्यवहार छै कि हम ककरो गेला पर भारी मोन सँ कहि दैत छिऐ जे ओ तँ एहन नहि छलै ! किंतु हमर स्पष्ट कहब अछि जे कोनो व्यक्तिक अंदरक पीड़ा कें चलैत-फिरैत, अबैत-जाइत, बतियाइत बूझि लेब, असंभव अछि ।

मृत्यु एक साधना थिक । ई सभ सँ संभव नहि होइछ । दृढ़ इच्छाशक्ति वला व्यक्तिये एहन साधना कें परिणाम द’ सकैत अछि ।

आइ हम नोर बहा रहल छी । दुख प्रकट क’ रहल छी । ओकरा एहन नहि करबाक चाहैत छलै । की एहन भ’ गेलै जे अंतिम-यात्रा लेल ठानि लेलक !

एही ठाम हमर प्रश्न अछि । ई जे आँखि ढबकि रहल अछि आइ देश भरि मे, अभिनेता सुशांतक लेल, जीबैत जँ एहन चिंता होइतिऐ, तँ तकर किछु सकारात्मक निदान क’ पबितिऐ…

एहि प्रकारक अभिनय सँ बची, आ दिवंगतक लेल ओकर नीक काजक चर्चा करी, विमर्श करी, सकारात्मक भ’ क’…●

(विभूति आनंद जी कें फेसबुक वाॅल सं साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *