रजनी पल्लवी : संगीत साधिका

रजनी पल्लवी – बस नाम सुनैत कान मे सुमधुर गीत-संगीत झंकृत होमय लगैत अछि, आंखिक सामने सोशल मीडिया पर प्रवाहित भ रहल सुर-ताल के तरंगक हिलोड़ि उठय लगैत अछि, ‘जय जय भैरवि’ आ ‘जगदम्ब अहीं अवलंब हमर’ के भक्तिमय प्रार्थना स मन-मस्तिष्क आ समस्त चेतना मिथिला के माटिक सुगंध स आप्लावित होमय लगैत अछि। स्वर लहरी के झंकारक जादू नहि सिर्फ मिथिला या देशक महानगर अपितु नेपाल आ सात समुद्र पार पाश्चात्य देश धरि श्रोता के आत्मविभोर क दैत छैक। पारम्परिक गीत-संगीत होय वा नव विधा के गीत स्वर कोकिला रजनी पल्लवी के हस्ताक्षर सब ठाम अपन अपन सशक्त उपस्थिति स श्रोता के मन मोहबा मे सफल रहल अछि।

रजनी पल्लवी मूलतः मधुबनी जिला के पिलखवार गामक रहनिहारि छथि। हिनक प्रारंभिक शिक्षा एमआरएम, दरभंगा मे भेलन्हि। जेडी विमंस कॉलेज, पटना स ई बॉटनी आनर्स के पढ़ाई केलन्हि। प्रयाग संगीत समिति स ‘संगीत प्रवीण’ के उपाधि स सेहो विभूषित छथि। पटना रेडियो स्टेशन स हिनक गीत से हो प्रसारित होइत छल। 2004 मे दरभंगा जिला के हरिनगर  निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर ज्ञानशंकर झा संग परिणय सूत्र मे बंधि गेलीह। ओना त कहल जाइत छैक जे प्रत्येक पुरुख के सफलता मे हुनक पत्नि के अहम योगदान रहैत छैक मुदा रजनीजी के मामला मे ई कहावत उल्टा पड़ि जाइत छैक। वस्तुतः रजनी ओहि किछु भागवंत महिला मे शामिल छथि जिनका पति स भेटल सहयोग आ प्रोत्साहन ‘पल्लवित’ केलकैन्हि।

रजनी के संगीत यात्रा आ सफलता के वास्तविक खिस्सा विवाहोपरांत बेंगलुरु अयलाह के बाद शुरु भेलन्हि। आई ओ फेसबुक पर खूब चिन्हल-जानल नाम छथि। तथापि बहुत कम लोक के पता छन्हि जे ओ सबस पहिने ‘ऑरकुट’ नामक सोशल मीडिया पर एक्टिव छलीह आ आभासी दुनिया मे संगीत यात्रा के शुरुआत अहि प्लेटफार्म स शुरु कयने छलीह।

15 साल स सोशल मीडिया के माध्यम स मैथिली गीत-संगीत के सेवा मे समर्पित रजनी के यात्रा ओतेक आसानो नही छल मुदा अपन लगन स ओ एकरा सुगम बना लेलीह। पहिने ओ कोनो स्टूडियो मे गीत रिकॉर्डिंग करैत छलीह जाहि लेल ओ बहुतो रुपैया खर्च क चुकल छथि। बाद मे ओ साउंड इंजीनियरिंग के कोर्स केलीह आ घरे मे ऑडियो-वीडियो के ‘होम स्टूडियो’ बना लेलीह। ‘जगदम्ब अहीं अवलंब हमर’ हुनक होम स्टूडियो के पहिल प्रॉडक्शन छल।

ओ मूलतः विद्यापति गीतक संगहि पारम्परिक संस्कार गीत, विवाह गीत गबैत छथि मुदा वर्तमान कवि के रचना आ नव विधा के प्रयोग सेहो बीच-बीच मे करैत रहैत छथि। विलुप्त होइत गीत के सहेजब आ पुनः लोक सामने आनि ओकरा लोकप्रिय बनायब हुनक ड्रीम प्रोजेक्ट मे शामिल छन्हि। अहि उद्देश्य स ओ २०१० स नियमित रूप स मिथिला के ‘ट्रिप’ लगबैत छथि निक ‘गीतगाइन’ स गीत सिखैत छथि आ ओकर रिकॉर्डिंग सेहो करैत छथि। अहि क्रम मे ओ झिझिया के सेहो ‘शूट’ कयने छलीह। गीतगाइन के ओ आर्थिक सहयोग सेहो करैत छथिन्ह।
२०१६ मे ओ बेंगलुरु मे रहनिहार मैथिल समुदाय के जोड़बाक उद्देश्य स ‘मिथिलाबासी @बेंगलुरु के स्थापना केलीह, जे आब रजिस्टर्ड संस्था भ चुकल अछि। ओनाहि मैथिली संगीत स मैथिल के जोड़बाक लेल ओ “मैथिली संगीत मिल” के शुरुआत केलीह जाहि मे विभिन्न क्षेत्र मे काज केनिहार मैथिल संगातप्रेमी सब जुड़ल छथिन्ह। अहि “मिल” मे गीतक ‘ मैन्युफैक्चरिंग’ कयल जाइत अछि।
सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय रहला के बादो ओ कोनो मंच स या समारोह मे गीत गयबा स बचैत रहैत छथि जखनकि ओ स्वयं अकरा पब्लिसिटी के पैघ माध्यम मानैत छथि। अहि विरोधाभास पर हुनक कहब छनि जे मंच वा समारोह के हुनक अनुभव निक नहि छन्हि। संगहि अहिठाम दीप प्रज्जवलन आ भाषणबाजी मे बहुत बेसी समय व्यर्थ मे बिताओल जाइत अछि। सोशल मीडिया ‘सेलेब्रेटी’ होयबाक सुखद अनुभूति हुनका तखन बेसी होइत छन्हि जखन कोनो ‘अंगरेज’ हुनका स विद्यापति रिलिक्स मंगैत छन्हि आ मैथिली पारम्परिक गीत मे अभिरुचि देखबैत छन्हि। यैह रजनी के शक्ति छियैन्ह, लोकप्रियता आ प्रेरणा सेहो ।

 

(रजनी पल्लवी कें मैथिली टाइम्स के संपादक विपिन बादल सं भेल गप्प पर आधारित)

One thought on “रजनी पल्लवी : संगीत साधिका

  1. बहुत खुब। पल्लवीजी के संगित यात्रा क उत्तरोत्तर प्रगतिके लेल कामना।

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