
©ईशनाथ झा
इंटरव्यू पैनल : भारतीय संविधान पढ़ने छी ?
छात्र : नैह, जरूरते नै भेल कहियो !
इंटरव्यू पैनल : कोनो बात नहि, महात्मा गांधीक जीवनी पढ़ने हैब, “सत्य के साथ मेरे प्रयोग” ?
छात्र : नै सर, कहियो अवसर नहि भेटल !
इंटरव्यू पैनल : डिस्कवरी आॅफ इंडिया ?
छात्र : सुनने छी जे दूरदर्शन पर सीरियल अबैत छलैक !
इंटरव्यू पैनल : दास कैपिटल ?
छात्र : नहि !
इंटरव्यू पैनल : ‘गुनाहों का देवता’ पढ़ने छियै !
छात्र : ई के लिखने छै सर, हम तs नामो नै सुनने छियै। आ’ हम सुच्चा घनघोर मैथिल छी सर, नाममे टाइटल नै देखलियै ? हिंदीक कोनो किताबकें हम बिनु पढ़ने आलोचना करबामे समर्थ छी ! तैं पढ़बाक प्रश्ने नहि उठैत अछि !
इंटरव्यू पैनल : बेस, बेस ! हरिमोहन झाक ‘खट्टर ककाक तरंग’ तs पढ़ने हैब ?
छात्र : सर, एकबेर पढ़ुआ कक्का सँ माँगिके अनने रही, अनने की रही ओ जबरदस्ती धरा देने रहथि ! लेकिन की कहू सर, अधासँ बेसी ओइमे संस्कृते छै आ मैथिली सेहो कठकोंकाड़ि सनक ! दू-तीन पेज कहुनाके पढ़लहु आ ओछौन तरमे देलियै से हेबे करतै आइ धरि !
इंटरव्यू पैनल एक्सपर्ट : तs जीवनमे अहा़ँ पढ़लहु की ?
छात्र : बच्चामे चाचा चौधरी, बिल्लू, पिंकी, रमन, सुपर कमांडो ध्रुव, नागराज आदि-आदि मारते रास काजक पोथी सब हम पढ़ने रही। फेर स्कूलमे स्कूलिया किताब सबके रट्टा मारने रही। माता-पिताक खुशीक लेल नंबर अनबाक हेतु कोर्सक बाहर किच्छु नै पढ़लहु। आ कॉलेज मे तs अहाँ सब जनिते हैब जे के कते पढ़ै छै ? किछु विशेष पोथी नुकाकें पढ़ने रही ओहि समयमे तकर नाम नै कहि सकब। किछु व्यावहारिकता सेहो छै ने सर !
पत्रकारिताक पाठ्यक्रम मे एडमिशन लेबाक लेल बैसल इंटरव्यू बोर्ड अचंभित छल आ एक-दोसरक मुँह ताकि रहल छल जे बिनु पढ़ने-लिखने कोनो छात्र पत्रकार बनबाक विषयमे कोना सोचि रहल छल ! परंतु एहि छात्रक साहस वा दुस्साहस सँ प्रभावित छलाह सभ !
इंटरव्यू पैनल : आखिर अहाँमे कोन योग्यता अछि जकर आधार पर अहाँक एडमिशन सुनिश्चित कएल जाए ?
छात्र : हमरा तँ योग्यते-योग्यता अछि। कोनो तरहक कमी नहि अछि !
इंटरव्यू पैनल : जेना ?
छात्र : जेना कि हमरा आओर किछु बूझल हो कि नहि हो, एतबा तs बूझल अछि जे अनुप्रास अलंकार कोन चीज होइत छैक आ एकरा पत्रकारिता मे सटीक उपयोग केना भ’ सकै छै !
इंटरव्यू पैनल : ऐं ? अनुप्रास अलंकारक उपयोग पत्रकारितामे ? माने ?
छात्र : माने जे मानि लियs हम डेस्क पर काज क’ रहल छी। कोरोनाक तांडव चलि रहल अछि ! हमर भोरका हेडिंग रहत — कोरोनाकालक कोलाहलपूर्ण कोहराम ! कोनो दिन उत्तराखंडक जंगलमे आगि लागि जाए, कोलकाता मे आंधी-तूफान उठि जाए, मधुबनीमे भारी वर्षासँ तबाही मचि जाए आ कश्मीरमे बम विस्फोट भ’ जाए तँ हम एहि सबटा समाचार कें एक शीर्षक दए बुलेटिन निकालि सकैत छी —–
“आगि, आतंक एवं आफतके आपातकाल”
पैनलक सभ सदस्य कोतूहल सँ छात्रकें निर्निमेष निहारि रहल छलाह।
छात्र : अहिना सर, गत वर्ष एक सैन्य अधिकारीक मॉडल पत्नीकें अधिकारीक एक मित्र हत्या क’ देने छलै। तखन हम अपन एक सीनियर पत्रकार कें हेडिंग सुझेने छलियै,
“मेजर, मॉडल आ मृत्युक मातम !” ई चललै आ जबरदस्त हिट भेल रहै। चंद्रयान-2 के समयमे जँ कियो हमरा सँ हाहाकारी हेडिंग पूछने रहितै तँ “चंद्रयान, चंद्रमाक चुमकी आ चैनलक चित्कार” केहन रहितै सर ?
पैनलक सदस्य आश्चर्यचकित । एक नव प्रतिभा सँ संपन्न छात्र सँ प्रथम साक्षात्कार भ’ रहल छलनि। आ’ क्रमश: छात्रक उत्साह आ आत्मविश्वास बढ़ल चल जा रहल छल।
छात्र : यदि हम रिपोर्टर बनि जैब सर तँ मृत्युशय्या पर पड़ल आदमीक मुँहमे बेहिचक माइक ठूसि सकैत छी। राजमार्ग पर लहूलुहान भेल पैदल चलैत मजबूर मजदूर सँ पूछि सकैत छी — “अहाँकें केहन लागि रहल अछि ? अहाँ जँ बचि जैब तs भविष्यमे कोन पार्टीक सपोर्ट करबै वा नै बचब तँ अंतिम संदेश की देमय चाहब !”
पैनल सदस्य किंकर्तव्यविमूढ़ छलाह। लेकिन, एहि प्रतिभाकें पूरा सूनय चाहैत छलाह कियैक तँ एतबा ज्ञात भ’ गेल छलनि जे ई छौंड़ा कोनो आन किसिमक अछि !
छात्र : हम एंकर बनि जाइ तs बहसके गरमागरम कार्यक्रम मे आगत अतिथि सँ बेसी जोर सँ चिचिया सकै छी। हम मेहमान प्रतिभागीकें एना भड़का सकै छी जे एक-दोसरक मुँह तोड़ै सँ कम पर कोनो समझौता नहि हएत कोनो परिस्थिति मे ! ई भारतीय पत्रकारिताक इतिहासमे प्रथम उदाहरण हएत जे हमर शो मे सब प्रतिभागी सुरक्षा कवच अर्थात् हेलमेट पहीरिकें कार्यक्रम मे अपन वक्तव्य रखताह। एकटा गप आओर बता दी जे हमरा तमाम हीरो-हीरोइन आ बाबा-संत-महात्माक सबका स्कैंडल जीह पर रटल अछि। हम यू-ट्यूब पर एतेक वीडियो देखने छियै जे कोन वीडियो कहिया वाइरल भेलै आ ओकर सत्यता की छै, सबटा बूझल अछि।
एक्सपर्ट पैनल बूझि नहि पाबि रहल छल जे की कएल जाए ! तखनहि छात्र हुनकर सभक मुखाकृति पर असमंजसक भाव देखि शंका समाधान कएलक।
छात्र : सर, अहाँ हमरा एडमिशन द’ कें देखियौ तs ! अहाँ सभ संगे हम अपन कुल खानदान तकके नाम रौशन क’ देबै ! हमरा लग एक सँ एक आइडिया अछि, मानू जे हम आइडियाक चलंत फैक्टरी छी। हम जहिया विधिवत पत्रकार बनि जाएब तहिया श्यामा मंदिर परिसरमे स्टूडियो खोलब जतय सँ ग्रह, राशि, ज्योतिष, आध्यात्म, धर्म, दर्शन संबंधी समाचार प्रसारित कयल जायत। हमर दोसर स्टूडियो रहत बलिराज गढ़ केर किला मे जाहि सँ भूत-प्रेत, चुड़ैल, डाइन-जोगिन, राकस, ब्रह्मपिशाच आदि केर शो करबा लेल हमर टीमकें बौआए नहि पड़तै ! भारतीय पत्रकारिताक इतिहासमे प्रथम बेर हमर चैनल ‘भूत रिपोर्टर’ नियुक्त करत जे बजाप्ता एक्सक्लूसिव भूत सब कैं ताकि-ताकि क’ स्टोरी करत ! भारत-पाक या भारत-चीन के युद्धक स्थिति मे हम एकटा टेम्पररी स्टूडियो कंदर्पी घाट पर खोलब आ सर्द पड़ल मैथिल रक्त कें अपन ओजपूर्ण वाणी सँ खौला देब ! हम बहसक स्तरकें थोड़े आओर ऊँच करबाक लेल एकटा साप्ताहिक शो करब बॉक्सिंग रिंगमे ! एहि ठाम उच्च कोटिक राजनैतिक प्रवक्ता अपन ‘पंच’कौशलक निधोख प्रदर्शन करैत देखल जेताह !
हम पहिल एहन एंकर हैब जे अपन शो मे ‘विदाउट हेलमेट’ अएनिहार विद्वान प्रवक्ता सभ कें जुर्माना करब ! आनंद आबि जाएत सर ! महोमहो क’ देबै हम समस्त श्रोताजातिकें ! आ’ टीआरपीक अंदाज अहाँ लोकनि स्वयं लगा सकैत छी ! नाक नै कटायब हम सर, से आश्वस्त करैत छी !
पैनल : अंतिम प्रश्न, मानलौं जे अहाँ लग ‘नोवेल आइडियाज’ अछि, मुदा अहाँक समस्त योजनामे पढ़ाई-लिखाईक स्थान कतहु नहि देखैत छी !
छात्र : एहि लेल गूगल छै ने सर ! गूगलके गर्भ मे की नहि छै ? आ फेर विकिपीडिया सेहो छै। सबहक काज अही सँ चलि जाइत छै ! ओ जे एंकर सब अफ्रीकाक जंगल सँ साइबेरियाक मौसम तक के बारे मे फटाफट ज्ञान ठेलैत रहैत छै, से कि सबटा भारी विद्वाने छै ? देखियो सर, युद्धक मैदान मे ज्ञान नहि रणकौशल चाही से हमरा लग अछि। पत्रकारिता आब युद्धक मैदान बनि गेल छैक से तs मानै छियै ने ? एक बेर अवसर तs दियौ हमरो अपन युद्धकौशल प्रदर्शित करबाक !
चिंतामग्न इंटरव्यू पैनल ई नीक जकाँ बूझि रहल छल जे बालक पत्रकारिताक धर्म भले नै बुझैत हो परंतु बाजारक मर्म तँ जनिते अछि। अभिमन्यु जकाँ ई बालक माएक गर्भहि सँ टीआरपी नामक चक्रव्यूह भेदबाक रहस्य सीखिकें आयल अछि।
(श्री ईशनाथ झा जी के फेसबुक वाॅल सं साभार)