मैथिलीरत्न : जार्ज अब्राहम ग्रिअर्सन

मैथिलीरत्न: जार्ज अब्राहम ग्रिअर्सन :

(7 जनवरी, 1851-8 मार्च,1941ई.)
(मिथिला मिहिर, दैनिक, 6 जनवरी, 1985 ई./मैथिली व्याकरण)
मैथिली भाषा-साहित्यक महान विश्लेषक एवं भारतीय भाषाक विश्वविश्रुत भाषा वैज्ञानिक-सर्वेक्षक डा.जार्ज अब्राहम ग्रिअर्सनक जन्म 7 जनवरी, 1851 ई. केँ ग्लेनागियरी काउंटी, डबलिन, आयरलैंडमे भेलनि। हिनक पिताक नाम जार्ज अब्राहम रहनि। ओ ‘एक्सप्रेस’ दैनिक पत्रक सह- अधिकारी एवं महारानी विक्टोरियाक मुद्रक रहथि। हिनक माइक नाम इज़ाबेला रक्सटन छलनि। हिनक मातृ एवं पितृकुलमे सरस्वतीक आराधनहिक परम्परा छल।
ग्रिअर्सनक प्रारम्भिक शिक्षा सैंट बी, श्रूजबरीमे भेलनि। तदुपरान्त, प्रसिद्ध विद्वान प्रो. बेंजामिन हाल केनेडीक देख-रेखमे शिक्षा पाबए लगलाह। मुदा, ग्रिअर्सनक शिक्षा-दीक्षामे जाहि गुरुक सभसँ बेसी प्रभाव पड़ल, से छलाह भाषाविद् प्रो. राबर्ट एन्टकिंसन। प्रो. एन्टकिंसन फ्रेंच, लैटिन, अङरेजी, रूसी, चीनी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु आदि भाषाक ज्ञाता छलाह। कोनहु प्रकाण्ड भारतीय पण्डित जकाँ ‘अष्टाध्यायी’पर हुनक असाधारण अधिकार छलनि। ग्रिअर्सन यद्यपि गणितक छात्र छलाह, मुदा गुरुक सान्निध्यसँ हिनकहुमे भाषा-साहित्यक प्रति प्रगाढ़ अभिरुचि जागि गेलनि।
ग्रिअर्सन 1871 ई. मे इण्डियन सिविल सर्विस परीक्षा पास कएलनि। 1873 ई. मे भारत प्रस्थान करबाक समय जखन ओ गुरुसँ आशीर्वाद लेबाक हेतु गेलाह तँ ओ भारतीय भाषाक अनुसन्धानक काज सौंपि देलथिन। ग्रिअर्सन एकर निर्वाह आजीवन करैत रहलाह।
ग्रिअर्सन भारतमे 1873 सँ 1898 ई. धरि रहलाह। एहि दू युगक अभ्यन्तर ओ  बिहार एवं बंगालक विभिन्न स्थान पर एवं विभिन्न रूपमे सेवा कएलनि। एहीक्रममे 04 दिसम्बर, 1877 सँ 17 जुलाइ, 1880 ई. धरि ओ मधुबनीमे पदस्थापित छलाह। मधुबनीक ‘गिलेसन’ बाजार हुनकहि नाम पर अछि। एहिठाम किछु अस्वस्थ भए तीन मासक अवकाश लए जखन स्वदेश फिरलाह तँ पूर्व परिचिता लूसी एलिजाबेथसँ 14 सितम्बर, 1880 केँ विवाह कए पुनः भारत आबि गेलाह। विवाहक समय ग्रिअर्सनक आयु 29 वर्ष एवं लूसीक आयु 26 वर्ष छलनि। 1899 ई. मे ग्रिअर्सन अपन देश घूमि गेलाह। जतय जीवनक शेष अवधि भारतीय भाषाक सर्वेक्षण एवं विवेचनमे बिताओल। एहि महान भाषाविदक देहावसान 8 मार्च, 1941ई. केँ भए गेलनि। तकर लगभग दू वर्षक बाद 19 फरबरी, 1943 केँ पत्नी लूसी एलिजाबेथ सेहो दिवंगता भए गेलथिन्ह। ग्रिअर्सनकेँ यद्यपि सन्तान-सुख नहि भेलनि, किन्तु भारतीय भाषाक हेतु ओ जे काज कए गेल छथि, से युग-युग धरि कोटि-कोटि भारतवासीक मनमे उचरैत रहत।
मिथिलाक लोक, मिथिलाक भाषा-साहित्य एवं संस्कृतिक पहिल परिचय ग्रिअर्सनकेँ एकासी साल(1873-1874)क दुर्भिक्षक समयमे भेलनि जखन अकाल पीड़ित लोकक सहायता-कार्यमे ओ लगाओल गेल छलाह। मुदा जखन हुनक पदस्थापन (4 दिसम्बर, 1877 सँ 17 जुलाइ,1880 ई) मधुबनीमे भेलनि तँ मिथिला एवं मैथिलीकेँ निकटसँ देखबाक एवं गुनबाक पर्याप्त अवसर भेटलनि एवं ओहि अवसरक ओ सदुपयोग कएल।
मधुबनी प्रवास अथवा तकर बादक अवधिमे मैथिली भाषा एवं साहित्यक क्षेत्रमे ग्रिअर्सनक अवदानकेँ दू कोटिमे राखि सकैत छी –
1. मैथिलीक सम्मानजनक सरकारी मान्यता लेल जनमत तैआर करब, तथा
2. मैथिली भाषा-साहित्यक संकलन, सम्पादन, विवेचन एवं प्रकाशन।
ग्रिअर्सन इजलासमे बैसैत छलाह। वादी-प्रतिवादीकेँ सुनैत छलाह। ओ सभ मैथिली अथवा अन्य स्थानीय भाषाक अतिरिक्त किछु बाजि नहि सकैत छल। जे केओ हिन्दी बजबाक प्रयासो करैत छल, से मैथिलिए भए जाइत छलैक। अपन एही अनुभवक आधारपर ग्रिअर्सनक दृढ़मत छल जे कचहरी अथवा स्कूलमे स्थानीय भाषा माध्यम बनए। ओ ई मानैत छलाह जे बिहारी भाषाकेँ सरकारी स्तरपर मान्यता दिआएब बिना सरकारक सहायताक सम्भव नहि अछि।( G.A.Grierson, The Hindi and Bihari Dialects, Calcutta Review, Vol.73,1881) हुनक स्पष्ट अभिमत छल जे कोनो जाति अथवा राष्ट्र संसद द्वारा अधिनियम बनबाए भाषा नहि बदलि सकैत अछि (G. A. Grierson, In Self Defence, Calcutta Review, Vol.LXXV,(1882), p.260 – ‘Nations or tribes can not change their languages by act of parliament, but only centuries of attrition and seldom even then. Let us first acknowledge the existence of Behari and then in course of generation when Punjabi, and Gujrati, Marathi and Sindhi have been, or are being, absorbed by Hindustani, it will be time to see if it has found that footing, which hitherto it has failed to gain, in Bihar.’)
ग्रिअर्सनसँ  पूर्वक जे केओ पाश्चात्य विद्वान भेल छलाह, मैथिलीकेँ एक स्वतन्त्र भाषा नहि मानि, हिन्दीक अन्तर्गत राखल। ग्रिअर्सन पहिल व्यक्ति भेलाह जे भाषावैज्ञानिक तथ्यक आधारपर मैथिलीकेँ एक स्वतन्त्र भाषाक रूपमे स्थापित एवं घोषित कएलनि। अपन एहि मतक स्थापनाक लेल ओ अनेक लेख एवं पोथी लिखल। जेना ( 3(i) A   Plea for the People’s Tongue (Calcutta Review, Vol.71;151-168), 3(ii)An Introduction to the Maithili Language of North Bihar, containig  a Grammar, Chrestomathy and Vocabulay (Journal of the Asiatic Society of Bengal, Vol. 49& 51 Pt. 1, Sp. No. 1881-82), 3(iii) Hindi and Bihar Dialects (Calcutta Review, Vol.73;363-377), In Self Defence(Calcutta Review, Vol.LXXV,(1882), p.260 ) ।
लोकक विरोधक उत्तर देलनि। मैथिलीकेँ एक स्वतन्त्र भाषा मानबाक लेल ग्रिअर्सनक राजनीतिक स्तरपर पर्याप्त विरोध भेल आ’ औखन साम्राज्यवादी मानसिकताक लोककेँ ई अरघैत नहि छैक जे मैथिली भारोपीय आर्यभाषाक मागधी अपभ्रंशक प्राच्य समूहक एक स्वतन्त्र भाषा थिक।
ग्रिअर्सन मैथिली एवं मैथिलीक विभिन्न भाषिकाक व्याकरण लेखनक अतिरिक्त मैथिलीक शिष्ट एवं लोक – दूनू साहित्यक संकलन, अनुवाद, विवेचन, सम्पादन एवं प्रकाशन कएने छथि। मैथिलीक कतिपय साहित्यकारक प्रसंग अनुसन्धान कए हुनक साहित्यक विवेचन कएल। लोक साहित्यक क्षेत्रमे हुनक प्रमुख संकलन-सम्पादन अछि ‘गीत दीनाभद्रीक ओ गीत नेबारक तथा ‘सलहेस’। ओ मनबोधक ‘हरिवंश’ (कृष्णजन्म) तथा उमापतिक ‘पारिजात हरण’क संकलन, अनुवाद एवं सम्पादनक संग ओहिमे प्रयुक्त समस्त शब्दक सूचीकरण कएल। मिथिलाक कतेको कविक परिचय संकलित कएल। विद्यापतिक समसामयिक कवि एवं विसपी ग्रामदानक प्रसंग अनुसन्धान कएल। जीबछ मिश्र लिखित उपन्यास ‘रामेश्वर’क समीक्षा लिखल। फतुरी लालक ‘अकाली गीत’सँ लोककेँ परिचित कराओल। विद्यापतिक ‘पुरुष-परीक्षा’क अनुवाद कएल। ‘मैथिली क्रेस्टोमैथी एवं ट्वेन्टी वन वैष्णव हिम्स’ छापल। हार्नलेक संग मिलि ‘बिहारी भाषाक तुलनात्मक शब्दकोश’ तैआर कएल। भारतक भाषा सर्वेक्षण तँ सर्वज्ञात अछिए।
मैथिली भाषा साहित्य एवं संस्कृतिक इतिहासमे वर्ष 1885 ई.क अत्यन्त महत्त्व छैक। एहि वर्ष ग्रिअर्सन तीन टा महत्त्वपूर्ण ग्रन्थक प्रकाशन कएलनि। ओ थिक ‘बिहार पिजेन्ट लाइफ’, ‘ए कम्पेरेटिव डिक्शनरी आफ बिहारी लैंग्वेजेज’ तथा गीत ‘दीनाभदी ओ गीत नेबारक’।
ग्रिअर्सनक जन्म 7 जनवरी,1851 छनि। एहि हिसाबसँ ई हुनक 135म जन्म दिवस सेहो छनि। दूनू दृष्टिसँ वर्ष 1985क महत्त्व छैक। मुदा, तीन टा महत्त्वपूर्ण ग्रन्थक शतवार्षिकी होएब विशेष महत्त्व रखैत अछि।
ग्रिअर्सनक अविस्मरणीय अवदान-
1. A Plea for Peoples’ Tongue – Calcutta Review, Vol. 71, 1980.
2. An Introduction to the Maithili Language of North Bihar, con taining  a Grammar, Chrestomathy and Vocabulay, Journal of the     Asiatic Society of Bengal, Vol.49 and 51. Pt. 1 SP.No.1881-1882.
3. Hindi and the Bihari Dialects, Calcutta Review, Vol. 73, 1981.
4. Manbodh’s Haribans Pt. I Text, JASB.Vol. 51, Part. 1, 1882.
5. In Self defence( with addendum ; On the Opinion of the Biharis  themselves), Calcutta Review, Vol. 75, 1982.
6. Seven Grammars of the dialects and subdialects of the Bihari  Language (in eight parts), Calcutta, 1883-87.
7. Essays on Bihari Declensions and Conjugations, Journal of the Asiatic Society of Bengal, Vol. 52, 1883.
8. Translation  to Manbodh’s Haribans & index to Manbodh’s Haribans, JASB.Vol. 53, 1884.
9.  Twenty – one Vaishnava Hymns, JASB.Vol. 53,Pt.1, Sp.No.,1884.
10. Some Bihari Folk Songs, JASB.Vol. 53, 1884.
11.  Bihar Peasant Life, Catalogue of the surroundings of the People of the Province, Calcutta, 1885.
12. A Comparative Dictionary of the Bihari Languages, Pt.Calcutta,1885 Pt.2 compiled by Dr. A.F. R. Hoernle,1889.
13. Selected Specimens of the Bihari Language, Pt.1,The Maithili Dialect,The Geet Dinabhadri and Geet Newarak,ZDMG, Vol.39, Germany, 1885.
14. Vidyapati and his Contemporaries, Indian Antiquary, vol.14, 1885.
15. The Modern Vernacular Literature of Hindustan,1889.
16. A Reduced Facsimile of the Grant of Bisapi by Civa Simha to Vidyapati, Proceedings of the Asiatic Society of Bengal 1895.
17. Grant of Civa Simha to Vidyapati Thakur. JASB,Vol.68, 1889.
18. Some Mediaeval Kings of Mithila, Indian Antiquary, Vol. 28. 1889.
19. Vidyapati Thakur,JASB, 1905.
20. An Introduction to the Maithili Dialect of the Bihari Lanhuage as spoken in North Bihar, 2 nd edition,1909.
21. The Parijat Haran of Umapati Upadhyaya, JB&ORS,Patna 1917.
22. The Date of Umapati, JB&ORS, Patna, 1917.
23. A New Book( रामेश्वर, जीबछ मिश्र)in Maithili, JRAS,London,1919.
24.The Test of Man(अनुवाद, पुरुष-परीक्षा, विद्यापति),JRAS,London,1935.
– श्रद्धांजलि!

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