
नई दिल्ली। किछु लोग तंज क रहल छैथ ये जे आरोग्य सेतु एप में मैथिली नै रहला स की भ गेलै ? ई कोनों बड़का मुद्दा छै जे उताहुल भेल छी ? सब चीज में मैथिली, मिथिला करह लागैत छी।
पहिल गप्प त ई जे क्षमा करब हम हुंनका स्तर के बुद्धिजीवी नै छी। हम मूर्ख छी। हमरा सोझ गप्प बुझय अबै य। हम ई जनैत छियै जे जदी आवाज नै उठेबै त सरकार हमेशा अहा के भाषा के उपेक्षित राखत। कुनो सरकार के दम नै छै जे आे मराठी, तमिल, गुजराती के इग्नोर क सकै क़ियाईक ? करथिन्ह त आे सब बांस क देतैंन। हां अहा के बुझईत एई लावा दुआ, ठंढ़ा सोनित। तैं हमेशा अहा के भाषा के सब ठाम छैंट दईं य। ऎहीए बुद्धिजीविता के कारण अहा के भाषा के प्राथमिक शिक्षा में नै देने एई, द्वितीय राजभाषा नै बनह देने एई, जानई छै जे अहा आवाज नै उठेबई। हमरा अहा के आब भाषा, संस्कृति के नाम पर कट्टर होबह पड़त, एकजुट भ निर्णय लेबह पड़त जे आब भाषा के नाम पर कुनो समझौता नै। जतह जरूरत पड़त त लड़ब, आवाज उठायब। तहने कल्याण। एक बेर जदी सरकार के बुझा जेतई जे मैथिल सब मैथिली के नाम पर चुप नै रहत त कहियो इग्नोर करै के हिम्मत नै हेतई।
(आदित्य मोहन के फेसबुक वाॅल सं)