
पंडित गोविंद झा
आदि नहि घी अन्त नहि दही ताहि भोजन कें गीड़ब कही।
एक समय प्रख्यात नेता विद्याकर कवि राजभाषा-विभागक मन्त्री रहथि। एहि काल मे न्यायालय मे हिन्दी चलएबाक प्रयास चलि रहल छल। एहि क्रम मे पटना मे हिनक संयोजकत्व मे अखिल भारतीय विधिमन्त्री सम्मेलन आयोजित भेल। अन्तिम दिन राजभाषा-मन्त्रीक दिस सँ पार्टी देल गेल। तकरा परात कविजी हमरा पुछलनि, कहू, पार्टी केहन भेल ? हम धखाइत कहि देलिअनि, हमरा जनैत नहि नीक, किएक तँ आदि नहि घी, अन्त नहि दही, ताहि भोजन कें गीड़ब कही। ओ हँसलाह आ कनेक सोचि बजलाह, तखन तँ एक बेर आओर भोज करए पड़त। भोज भेल आ ताहि मे अपन गाम सहरसा सँ मङाओल घी आ दही जमि कें परसल गेल आ प्रशंसा पर प्रशंसा होइत रहल। इति।
(हुनक फेसबुक वाॅल सं साभार)