
शहर ई आइ हमर वीरान सन लगैए किए
बाट चौबट्टी गली शमसान सन लगैए किए
बूझि अंगित हीत जकरा सिर चढ़ा राखल
आँखि धधकैत तकर शैतान सन लगैए किए
बोल-वचनक जे धनी छल संग ठाढ़ सतत
खोल उतरैत सभक अनजान सन लगैए किए
मोहकेर पाश जे छल बन्हने टुटल क्षण पलमे
नामकेर चर्च ओकर अपमान सन लगैए किए
किए विपरीत नियति दण्ड निज चला रहले
चानहुक शीत किरण विषवाण सन लगैए किए
कहि कऽ अमृत हलाहल जे नित बँटैत रहल
प्रीतिकेर मूल्य हमर झुझुआन सन लगैए किए
नोरकेर घोंट पिबी चित्त किए हौंड़ि रहल
आश-विश्वास दुखद बलिदान सन लगैए किए

– शंकरदेव झा