
नई दिल्ली। 1930 क दशक मे एक समय एहन सेहो आयल छल जखन आर.के. डालमिया देशक सबसँ पैघ उद्योगपतिसभ मे गिनल जाइत छलाह। चीनी, सीमेंट, रसायन, काँच, बैंकिंग, दूध आ डेयरी उद्योग मे हुनकर दबदबा छल। व्यवसाय संग-संग राजनीति मे सेहो हुनकर रुचि बढ़ल। ओ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसक अनेक नेता सँ घनिष्ठ संबंध बना लेने छलाह आ ब्रिटिश शासनक विरोध मे चलल आंदोलन, धरना आ मोर्चा मे उदारतापूर्वक दान दैत छलाह।
राजस्थानक चिरावा मे 7 अप्रैल 1893 केँ जन्मल आर.के. डालमियाक परिवार परोपकारक परंपराक लेल प्रसिद्ध छल, मुदा आर्थिक स्थिति कमजोर हेबाक कारण परिवार केँ कलकत्ता पलायन करए पड़ल। डालमिया आ हुनकर पिता हरजीमल मारवाड़ी प्रतिष्ठानसभ मे नौकरी करैत छलाह, मुदा अपन व्यवसाय शुरू करबाक सपना सदिखन जीवित रहल।
संघर्षक दौर मे डालमिया सट्टा बाजार मे हाथ आजमबए लगलाह। एहि बीच पड़ोसक मंदिरक एक पंडित भविष्यवाणी केलनि जे चाँदीक कारोबार सँ हुनका अपार लाभ होएत। डालमिया लंदन स्टॉक एक्सचेंज मे निवेश केलनि आ चाँदीक कीमत अचानक बढ़ि गेल। एहि सँ हुनका पहिल पैघ मुनाफा भेटल।
एहि पूंजी सँ ओ चीनी उद्योग मे निवेश केलनि आ जल्दीए दक्षिण बिहारक सबसँ पैघ चीनी व्यापारी बनि गेलाह। एक के बाद एक सफलता मिलैत गेल आ डालमिया साम्राज्य तेजी सँ पसरैत गेल।
1936 मे ओ भारत बीमा कंपनी क अधिग्रहण केलनि, जाहि कंपनी पहिल वर्षमे 25 करोड़ रुपयाक कारोबार दर्ज केलक। बादमे ओ पेपर पल्प, सीमेंट, कपास उद्योग, ऊन मिल, काँच कारखाना आ बैंकिंग क्षेत्रमे सेहो प्रवेश केलनि।
डालमिया भारतक पहिल निजी लाइट रेल, गन्ना ढोबाक लेल निजी रोपवे आ डालमियानगर सँ कलकत्ता धरि निजी टेलीफोन लाइन शुरू करबाक श्रेय सेहो रखैत छथि। राजस्थानक दूरदराज गाँवसभ मे यात्री लॉरी सेवा आ हाथसँ चलए वाला बायोस्कोप सेहो हुनके द्वारा शुरू कयल गेल छल।
एक समय एहन छल जखन आर.के. डालमियाक व्यापारिक साम्राज्य पूरा भारत मे फैलल छल आ ओ टाटा-बिड़ला केँ बाद देशक दोसर सबसँ पैघ उद्योगपति मानल जाइत छलाह।
महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू आ मोहम्मद अली जिन्ना सन दिग्गज नेता सभक संग समय बितबैत-बितबैत डालमियाक राजनीतिक सोच सेहो मजबूत होइत गेल। जखन ओ टाइम्स ऑफ इंडिया अखबारक अधिग्रहण केलनि, तखन हुनका राष्ट्रीय स्तर पर अपन विचार रखबाक सशक्त मंच भेटल।
द्वितीय विश्वयुद्धक बाद ब्रिटेन कमजोर पड़ि चुकल छल आ भारत छोड़बाक तैयारी मे छल। देशक भविष्य केँ ल’ राजनीतिक माहौल अत्यंत तनावपूर्ण छल। एहि बीच डालमियाक मोहम्मद अली जिन्ना सँ गहरी मित्रता बनल। ओ जिन्ना आ नेहरूक बीच बढ़ैत दूरी केँ कम करबाक प्रयास करैत रहलाह।
डालमियाक बेटी आ हुनकर जीवनी ‘फादर डियरेस्ट’ क लेखिका नीलिमा अधर कहैत छथि —
“महात्मा गांधीक समर्थन सँ आर.के. डालमिया दुनू पक्षक बीच बातचीतक समानांतर रास्ता खोलबाक कोशिश केने छलाह, मुदा नेहरू आ जिन्नाक प्रतिद्वंद्विता बहुत गहरी भ’ गेल छल।”
मुदा जल्दिए देश विभाजनक आगि मे झोंकायल। लाखों शरणार्थी भारत पहुँचला आ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, टाइम्स ऑफ इंडिया मे प्रकाशित आलोचनात्मक खबरिसँ नाराज रहए लगलाह। अखबार लगातार सरकारक कमजोरी उजागर करैत रहल।
कहल जाइत अछि जे एक बेर नेहरू तामस मे कहने छलाह, “डालमिया एक बदसूरत चेहरा, बदसूरत दिमाग आ बदसूरत दिल वाला आदमी छथि… सिर्फ किछु अखबार रहबाक कारण ओ अपने केँ विदेश नीति विशेषज्ञ बुझैत छथि?”
1955 मे रायबरेलीक सांसद आ नेहरूक दामाद फिरोज गांधी जीवन बीमा कंपनिक सार्वजनिक धनक दुरुपयोगक मुद्दा संसद मे उठेलनि। आरोप छल जे एहि धनक इस्तेमाल टाइम्स ऑफ इंडिया खरीदबाक लेल कयल गेल। नेहरू एहि अवसर केँ डालमिया केँ घेरबाक रूपमे देखलनि आ तुरंत जांच आयोग बिठा देलनि।
जांच रिपोर्टक आधार पर आर.के. डालमिया पर 4 लाख 22 हजार डॉलर मूल्यक प्रतिभूतिक गबनक आरोप साबित भेल आ हुनका दिल्लीक तिहाड़ जेल मे दू वर्षक सजा सुनाओल गेल।
नीलिमा अधर कहैत छथि —
“सरकारी जुर्माना भरबाक लेल पिताजी अपन दू प्रिय कंपनी — टाइम्स ऑफ इंडिया आ सवाई माधोपुर सीमेंट — अपन दामाद शांति प्रसाद जैन केँ गिरवी रखने छलाह। समझौता छल जे बादमे ई कंपनी वापस क’ देल जायत, मुदा ओ कहियो वापस नहि भेटल। एतहि सँ आर.के. डालमियाक पतन शुरू भ’ गेल।”