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नई दिल्ली। एक समय छल जखन भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार मे टीवी, फ्रिज आ वॉशिंग मशीनक नाम लेल जाइत छल त’ लोकक मुँह पर पहिल नाम अबैत छल — वीडियोकॉन। 1980 आ 90 केर दशक मे ई ब्रांड भारतीय कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर राज करैत छल। एहि सफलता के केंद्र मे छलाह उद्योगपति वेणुगोपाल धूत। मुदा अत्यधिक महत्वाकांक्षा, अंधाधुंध विस्तार, लगातार बढ़ैत कर्ज आ तीव्र प्रतिस्पर्धा आखिरकार एहि विशाल कारोबारी साम्राज्य केँ माटि मे मिला देलक। आइ कंपनी लगभग 64,838 करोड़ रुपयाक भारी कर्ज आ नुकसानक बोझ स दिवालियापन प्रक्रियासँ गुजरि रहल अछि।
धूत परिवार मूल रूप सँ महाराष्ट्रक अहमदनगर के रहनिहार छलाह। परिवार सूती मिल, अनाजक थोक कारोबार आ बजाज ऑटोक डीलरशिपसँ जुड़ल छल। 1985-86 केर आसपास नंदलाल माधवलाल धूत ‘वीडियोकॉन इंटरनेशनल’ क स्थापना केलनि।
हुनकर ज्येष्ठ पुत्र वेणुगोपाल धूत, जे पेशा सँ इंजीनियर छलाह, कंपनी केँ नव ऊँचाई धरि पहुँचेबाक प्रमुख चेहरा बनलाह। जापान मे प्रशिक्षण लेबाक बाद ओ तोशिबा संग तकनीकी साझेदारी केलनि। जापानी तकनीक आ किफायती दाम स वीडियोकॉन जल्दिए भारतीय घर-घर मे भरोसेमंद नाम बनि गेल।
2000 क दशक मे वीडियोकॉन अपन चरम पर छल। भारतक अलावा चीन, पोलैंड, इटली आ मैक्सिको मे सेहो कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट संचालित होइत छल। मुदा एहि सफलता बाद वेणुगोपाल धूत अपन मूल कारोबार इलेक्ट्रॉनिक्स सँ ध्यान हटाकए उच्च जोखिमवला सेक्टर सभ मे भारी निवेश शुरू क’ देलनि।
टेलीकॉम क्षेत्र मे कंपनी कतेको सर्किल मे स्पेक्ट्रम लाइसेंस हासिल केलक। मुदा 2012 केर चर्चित 2G घोटाला मे सुप्रीम कोर्ट 122 लाइसेंस रद्द क’ देलक, जाहिमे वीडियोकॉनक सेहो कतेको लाइसेंस शामिल छल। बाद मे कंपनी एयरटेल कें स्पेक्ट्रम बेचिकए एहि कारोबारसँ बाहर भ’ गेल।
एहि के अतिरिक्त भारत, ब्राज़ील आ इंडोनेशिया मे तेल आ गैस खोज परियोजना मे भारी निवेश कयल गेल। डीटीएच, पावर, इंश्योरेंस आ रियल एस्टेट सेक्टर मे सेहो हाथ आजमाओल गेल, मुदा अधिकांश निवेश विफल साबित भेल।
वीडियोकॉनक पतन मे अंतिम आ सबसँ पैघ झटका आईसीआईसीआई बैंक सँ जुड़ल लोन विवाद साबित भेल। 2009 सँ 2012क बीच, जखन चंदा कोचर बैंकक सीईओ छलथि, तखन वीडियोकॉन समूह कें भारी लोन स्वीकृत भेल।
बाद मे आरोप लागल जे एहि लोनक एक पैघ हिस्सा ‘क्विड प्रो क्वो’ अर्थात “फायदा केर बदला फायदा” क तहत चंदा कोचरक पति दीपक कोचरक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी मे ट्रांसफर कयल गेल। सीबीआई एहि मामला कें धोखाधड़ी आ मनी लॉन्ड्रिंग मानलक।
विवाद बढ़लाक बाद 2018 मे चंदा कोचर केँ इस्तीफा देबय पड़ल, आ 2022क अंत मे चंदा कोचर, दीपक कोचर आ वेणुगोपाल धूत कें गिरफ्तार सेहो कयल गेल।
2017 मे आरबीआई जे 12 पैघ कॉर्पोरेट डिफॉल्टरक सूची जारी केने छल, ताहिमे वीडियोकॉनक नाम सेहो शामिल छल। जून 2018 मे एनसीएलटी, एसबीआईक याचिका स्वीकार करैत कंपनीक खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया शुरू करबाक आदेश देलक। कंपनी पर कुल दावा लगभग 64 हजार सँ 65 हजार करोड़ रुपयाक बीच छल।
2020-21 मे वेदांता समूहक ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज लगभग 3 हजार करोड़ रुपयामे कंपनी खरीदबाक प्रस्ताव देलक। मुदा बैंकसभ लेल ई बहुत पैघ “हेयरकट” मानल गेल। बादमे 2022 मे एनसीएलएटी एहि मंजूरी केँ रद्द क’ देलक। आब सुप्रीम कोर्ट मे लंबित अछि आ स्थिति यथावत् बनल अछि। 2021 सँ शेयर बाजार मे वीडियोकॉनक शेयर ट्रेडिंग सेहो बंद अछि।