
मनीष मिश्रा
5 राज्यक विधानसभा चुनावक परिणाम आबि चुकल अछि। गंगोत्री सँ लए कऽ गंगासागर धरिक धारा, पचास वर्षक लंबा प्रतीक्षा, अनेक राजनीतिक उतार-चढ़ाव आ वैचारिक संघर्षक बाद आखिरकार भगवामय भऽ उठल अछि। ई ओहि सपना केर साकार होयब अछि, जकर बीजारोपण 1951 मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघक रूपमे कएने छलाह आ जाहि सपना केँ दीनदयाल उपाध्याय, श्री गुरु गोलवलकर, पूज्य वीर सावरकर आ डॉ. हेडगेवार सन दूरदर्शी मनीषी अपन रक्त आ चिंतन सँ सींचने छलाह।
1951 मे जखन देश विभाजनक घाव सँ उबरबाक प्रयास कऽ रहल छल आ कांग्रेसक तुष्टीकरणक मॉडल धीरे-धीरे हावी भऽ रहल छल, तखन जनसंघ एक स्पष्ट वैचारिक संकल्पक संग राजनीति मे प्रवेश कएलक। एहि संकल्पक पहिल बिंदु छल अखंड भारतक अवधारणा, जे सांस्कृतिक रूप सँ सिंधु सँ ब्रह्मपुत्र धरि एक छल। विभाजनक बावजूद सांस्कृतिक राष्ट्रवाद केँ राजनीति केर केंद्रमे राखब आ भारतीय पहचान केँ मजबूत करब हुनकर मुख्य ध्येय छल।
जनसंघ चाहैत छल जे देशक सुरक्षा आ स्थिरताक लेल मजबूत केंद्रीय शासन हो, जाहिक नींव जम्मू-कश्मीरक पूर्ण एकीकरण सन साहसिक निर्णय पर आधारित हो। जनसंघ आर्थिक रूप सँ स्वदेशी आ आत्मनिर्भर भारतक आह्वान कएलक, समान नागरिक संहिताक समर्थन कएलक आ सबसे महत्वपूर्ण जनसंख्या आ सीमा सुरक्षाक विषयमे एहन सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रस्तुत कएलक, जे ओहि समयक मुख्यधाराक राजनीति लेल अकल्पनीय छल।
एतहि जनसंघक दूरदर्शिताक ओ अद्वितीय पक्ष छिपल अछि, जकरा बिना असमक एहि ऐतिहासिक जीत केँ बुझब कठिन अछि। जनसंघक संस्थापक मनीषी भलीभाँति जानैत छलाह जे भारतक सीमाक रक्षा केवल सैन्य बल सँ नहि, बल्कि सीमावर्ती राज्यसभमे जनसांख्यिकीय संतुलन आ सांस्कृतिक पहचान बनौने रखबाक माध्यमे संभव अछि। एहि कारण जनसंघ सदिखन असमक सांस्कृतिक सुरक्षा आ जनसंख्या संतुलन पर विशेष बल दैत रहल। असम केवल सीमावर्ती राज्य नहि, बल्कि भारतक ‘सांस्कृतिक चौकी’ अछि।
एहने असम मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा केर नेतृत्वमे भाजपा केँ स्पष्ट जनादेश देलक अछि। 30 प्रतिशत सँ अधिक मुस्लिम आबादीक बीच सेहो भगवा लहराएब डॉ. हिमंत बिस्वा सरमाक मजबूत जनाधार केँ दर्शबैत अछि। असमक मूल निवासीसभक हृदयमे उमड़ैत ई विश्वास विगत पाँच वर्षमे सांस्कृतिक पुनर्जागरण आ विकासक अद्भुत संतुलन सँ उपजल अछि।
पहिल बेर कोनो पार्टी केँ लगातार तेसर बेर एतेक प्रचंड बहुमत भेटल अछि, जे सिद्ध करैत अछि जे असमक जनताए अपन अस्तित्व, पहचान आ भविष्यक विषयमे स्पष्ट निर्णय लऽ चुकल अछि।
एहि अभूतपूर्व जीतक पहिल आ सबसे ठोस कारण अछि विगत पाँच वर्षमे असमक सांस्कृतिक उत्थान। हिमंत सरकार असमक जनताकेँ हुनकर गौरवशाली विरासत सँ पुनः जोड़लक। ओ असमिया समाज केँ स्मरण करौलनि जे ओ सभ लचित बोरफुकनक वंशज छथि, जाहि वीर सेनानायक 1671 केर सरायघाट युद्धमे मुगलक विशाल सेना केँ ब्रह्मपुत्र पार खदेड़ि देने छलाह।
जखन स्वाभिमानक ई बोध जनमानसमे उतरैत अछि, तखन मतदाता अपन सभ्यताक रक्षा लेल मतदान करैत अछि।
हिमंत सरकार असमिया नववर्ष बिहू सन पर्व केँ राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित कएलक। असमक बाँसुरीक मधुर गूँज आब दिल्लीक विज्ञान भवन सँ लए कऽ लंदन आ न्यूयॉर्क धरि सुनाइ दैत अछि।
एहि सांस्कृतिक पुनरुत्थान केँ एक सशक्त विकास मॉडल केर आधार भेटल। असम आइ भारतक सबसे तेजी सँ विकास करनिहार राज्यसभमे सँ एक अछि। संस्कृति आ आधुनिकताक संतुलनक अनुपम उदाहरण असम प्रस्तुत कएने अछि।
एकर सबसे जीवंत प्रमाण अछि असमक सेमीकंडक्टर उद्योगमे प्रवेश। जे राज्य कखनो उग्रवाद आ आपदाक लेल जानल जाइत छल, आइ ओ देशक डिजिटल क्रांतिक केंद्र बनबाक दिशामे अग्रसर अछि। एहि विकास असमिया युवाकेँ बाहिर पलायन करबाक बजाय अपन माटिमे भविष्य गढ़बाक सपना देलक अछि।
एहि चुनावी परिणामक एकटा आन स्तर सेहो अछि, जाहि पर खुलिकऽ चर्चा होबाक चाही। ई स्तर जनसांख्यिकीय संतुलन आ सीमा सुरक्षाक ओहि गुप्त चिंता सँ जुड़ल अछि, जकरा जनसंघक पुरोधा दशकौं पहिले रेखांकित कएने छलाह।
असमक मूल निवासी एहि जनादेशक माध्यमे स्पष्ट कए देलक अछि जे ओ अपन भूमि, संस्कृति आ जनांकिकीय ढाँचा केँ असुरक्षित नहि होमय देत। ‘मूलवासी’ शब्द एतय बहुत व्यापक आ गहिर अछि, जाहिमे विभिन्न जनजाति, जातीय समूह आ हिंदू विविधतासभ शामिल छथि, जे सहस्राब्दीसँ असम केँ अपन घर मानैत आएल छथि।
“मिया” मुसलमान केँ खदेड़बाक जे आख्यान चुनावमे गूँजल, ओकरा सही संदर्भमे बुझबाक आवश्यकता अछि। ई बांग्लादेशी मूलक अवैध प्रवासीसभक विरुद्ध कार्रवाईक हिस्सा छल, जे ऐतिहासिक रूप सँ असमक मूल मुस्लिम समुदाय सँ भिन्न छथि।
एहि कार्यवाहीसभ सीमा सुरक्षित रखबाक ओहि स्वप्न केँ साकार करैत अछि, जे पूज्य डॉ. हेडगेवार जी आ पूज्य श्री गोलवलकर जी देखलनि। हुनकर सपना छल एक सशक्त, आत्मविश्वासी हिंदू समाज, जे अपन सीमाक चिंता स्वयं करय आ बाहरी जनसांख्यिकीय आक्रमण सँ अपन संस्कृति केँ सुरक्षित राखय।
असम एहि चुनावमे ठीक वैह कएलक अछि। ओ अपन सांस्कृतिक अस्मिताक रक्षा लेल वीर सावरकर आ दीनदयाल उपाध्यायक राष्ट्रवादी चिंतन केँ मतपेटीमे उतारि देलक अछि।
ई विजय सिद्ध करैत अछि जे भारतक मतदाता आब केवल रोटी, कपड़ा आ मकान सँ ऊपर उठिकऽ इतिहास, पहचान आ सभ्यताक प्रश्न पर सेहो मतदान करैत अछि।
वास्तवमे पहिल बेर असममे एंटी-इनकम्बेंसीक बावजूद कोनो गैर-कांग्रेसी सरकार केँ एतेक व्यापक आ स्पष्ट बहुमत प्राप्त भेल अछि। एहि बहुमतक प्रभाव एतेक व्यापक अछि जे विपक्षक अस्तित्व खंडित भऽ गेल अछि।
आबयवाली पीढ़ी एहि जनादेश केँ ओहि निर्णायक मोड़क रूपमे याद करत, जखन भारत अपन प्राचीन मंत्र, अपन सीमा आ अपन समाज केँ एक संग साधैत इतिहास रचलस।

(नेशनल कमिश्नर, भारत स्काउट एवं गाइड)