नारी शक्ति विपक्षी दल सभ के देतै करारा जवाब, महिला आरक्षण बिल पर राजनीति आ सवाल

डॉ धनंजय गिरि

महिला आरक्षण विधेयक के लेल देशक राजनीति एक बेर फेर तीखा टकराव क’ दौर मे अछि। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र क’ नाम अपन संबोधन मे एहि विधेयक क’ पारित नहि भ’ सकबाक पर गहिरा अफसोस जतबैत देशक माय, बहिन आ बेटी सभ स’ माफी मांगलनि। संगहि हुनका विपक्षी दल सभ पर गंभीर आरोप लगबैत कहलनि जे “नारी शक्ति क’ उड़ान रोकि देल गेल” आ एहि लेल विपक्ष क’ “संकीर्ण आ स्वार्थी राजनीति” जिम्मेदार अछि।

अपन संबोधन मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ कहलनि जे महिला आरक्षण बिल पारित कराब’ मे सरकार सफल नहि भ’ सकल, जबकि ई देशक आधा आबादी लेल एकटा बड़ अवसर छल। हुनकर ई स्वीकारोक्ति राजनीतिक रूप स’ महत्वपूर्ण अछि, किएक त’ एक तरफ जिम्मेदारी क’ संकेत देत अछि, दोसर तरफ विपक्ष पर सीधा हमला सेहो अछि। मोदी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमकेसमाजवादी पार्टी जेकाँ दल सभ के निशाना बनबैत आरोप लगौलनि जे ओ सभ जनहित स’ ऊपर राजनीति के प्राथमिकता देलक।

गौर करबाक बात ई सेहो अछि जे 17 अप्रैल 2026 क’ तारीख इतिहास मे दू अलग-अलग तस्वीर क’ रूप मे दर्ज होएत। एक ओर सरकार क’ दृढ़ प्रतिबद्धता छल, जे देशक आधा आबादी के 33 प्रतिशत संवैधानिक आरक्षण देबाक लेल संकल्पित देखायल। दोसर ओर विपक्ष क’ एहन अहंकार देखायल, जे ‘नहुष’ जेकाँ एहि गंभीर प्रयास के उपहास करैत नजर आयल। सदन क’ कार्यवाही दौरान विपक्षी नेता सभ द्वारा उपयोग कएल गेल भाषा आ विधेयक क’ महत्व कम करबाक कोशिश न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण अछि, बल्कि देशक हर माय, बहिन आ बेटी क’ सम्मान क’ खिलाफ सेहो अछि।

एहि विधेयक पर विपक्ष क’ रवैया हुनकर संकीर्ण सोच के उजागर करैत अछि, जत’ महिला सभ के केवल वोट बैंक क’ रूप मे देखल जाइत अछि। वर्षो तक एहि प्रस्ताव के ठंडा बस्ता मे राखि देनिहार जखन एकरा धरातल पर उतरत देखैत छथि, त’ हुनकर हताशा व्यंग्य आ अवरोध क’ रूप मे सामने अबैत अछि। सरकार क’ स्पष्ट मान्यता अछि जे महिला सशक्तिकरण कोनो चुनावी मुद्दा नहि, बल्कि राष्ट्र निर्माण क’ मूल आधार अछि।

17 अप्रैल 2026 के सदन मे सरकार मजबूती स’ अपन पक्ष रखलक। प्रधानमंत्री स्पष्ट कएलनि जे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल महिला सभ क’ संख्या बढ़ेबाक माध्यम नहि, बल्कि हुनका नेतृत्व क’ मुख्यधारा मे आनिक’ राष्ट्र निर्माण मे सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करबाक एकटा सशक्त कानूनी उपाय अछि।

प्रधानमंत्री ई सेहो कहलनि जे किछु विपक्षी दल सभ विधेयक गिरबाक पर जश्न मनौलनि, जे केवल राजनीतिक असहमति नहि, बल्कि महिला सभ क’ सम्मान क’ खिलाफ सेहो अछि। हुनका अनुसार ई “नारी क’ आत्मसम्मान पर चोट” अछि, आ देशक महिला सभ एकरा कखनो नहि बिसरथिन। ई बयान भावनात्मक अपील क’ संग राजनीतिक चेतावनी सेहो देत अछि जे आबै वाला समय मे ई मुद्दा चुनावी बहस क’ केंद्र बनि सकैत अछि।

हालांकि, एहि पूरा घटनाक्रम क’ दोसर पक्ष सेहो महत्वपूर्ण अछि। विपक्ष क’ आरोप अछि जे सरकार बिना पर्याप्त तैयारी आ व्यापक सहमति क’ एहि विधेयक के पेश कएलक। कइएक विपक्षी नेता, जाहि मे प्रियंका गांधी सेहो शामिल छथि, एकरा राजनीतिक लाभ लेल उठाओल गेल कदम बतौलनि। हुनका अनुसार महिला सभ स’ जुड़ल जमीनी मुद्दा—जेकाँ सुरक्षा, रोजगार आ न्याय—पर ठोस प्रगति बिना केवल आरक्षण क’ बात अधूरी अछि।

संसदीय गणित सेहो एहि बहस क’ अहम पहलू अछि। लोकसभा मे एहि विधेयक के पारित करबाक लेल दू-तिहाई बहुमत, यानी 352 वोट क’ जरूरत छल, जबकि समर्थन मे केवल 298 वोट भेटल आ 230 सांसद विरोध मे रहलाह। ई आंकड़ा स्पष्ट करैत अछि जे राजनीतिक सहमति क’ कमी एहि विधेयक क’ सबस’ बड़ बाधा बनल।

एहि विधेयक क’ प्रावधान अनुसार, परिसीमन क’ बाद लोकसभा सीट 543 स’ बढ़ा क’ 816 करबाक प्रस्ताव छल, जाहि मे 33 प्रतिशत आरक्षण महिला सभ लेल सुनिश्चित कएल जाएत। संगहि राज्य आ केंद्र शासित प्रदेश क’ विधानसभामे सेहो एहि अनुपात मे आरक्षण लागू करबाक योजना छल। स्पष्ट अछि जे ई एकटा व्यापक आ संरचनात्मक बदलाव क’ प्रयास छल, जाहि लेल राजनीतिक इच्छाशक्ति क’ संग सर्वदलीय सहमति सेहो जरूरी अछि।

प्रश्न ई अछि जे की महिला सशक्तिकरण जेकाँ महत्वपूर्ण मुद्दा के राजनीतिक खेमामे बांटि देनाय उचित अछि? की सरकार आ विपक्ष मिलि क’ एहि दिशा मे कोनो साझा रास्ता नहि निकालि सकैत छल? नारी शक्ति के सशक्त बनाब’ क’ दावा तखनहि सार्थक होएत, जखन ई केवल भाषण आ आरोप-प्रत्यारोप स’ आगू बढ़ि क’ ठोस नीति आ सहमति मे बदलत। आखिरकार, ई मुद्दा कोनो एक दल क’ जीत-हार क’ नहि, बल्कि देशक आधा आबादी क’ अधिकार आ सम्मान क’ अछि। यदि राजनीतिक दल सभ एहि मूल भावना के समझत, त’ शायद “नारी शक्ति क’ उड़ान” के सच्चा पंख भेटि सकत।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक छथि।)

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