अंजना झा
हम एक टा स्त्री छी। हां नारी छी हम।
गर्व अछि हमरा अपन अस्तित्व पर
किछु खास त अछि हमरा मं
किछु विशेष त छी हम।
समाज क संंचालक पुरुष
मंडराबैत छी हमरा इर्द-गिर्द
स्व कमजोरी संग
कखनहुं
बालक क चंचलता संग
कखनहुं
यौवन क उच्छृंखलता संग
कखनहुं
जिम्मेदारी क प्रौढ़ता संग
आ कखनहुं
असहाय थकल वृद्धता संग
नहीं छोड़लहुंंंहम अहांक
हर समय सम्हारलहुं
अहां सीना चौड़ा क सकु
ताही दुआरे
स्व क चारु दिस स समेटति रहलहुं
अहां क अस्तित्व क जननी छी हम
फेर
किया न गर्व करु अपना आप पर
हां हम स्त्री छी।
अनपेक्षित दंभ स भरल
जखन अहां होयत छी मदमस्त
पार क जायत छी
सभक आश्चर्य क सीमा
कियैक त
ओ नहीं अछि बलात्कार
ओ त अछि स्व क आत्मदोहन
स्व इन्द्रिय पर भी वश नहीं अछि अहां क
आ कहैत छी
अपना आप क संंचालक
नारी क त शरीर नष्ट होयत छैन्ह
अहांक त आत्मा नष्ट भ जायत अछि
अनंत तक उद्वेलित रहब अहां
ओही अपवित्र आत्मा संग
फेर कहु
के भेल अपराजित
त कियैक न करू गर्व
हां हम स्त्री अछि।
वेश्या नाम दऽ कऽ
जत जाइत छी अहांं मुंह छिपाकऽ
सोचु कनि
ओ त बेचैत छथि अपन नश्वर शरीर
अहां त बेच अबैत छी अपन गरिमा
सत्ये कहैत छी
सोच स परे अछि अहांक एहेन मर्दानगी
सजायाफ्ता स्त्री क करैत छी निर्वस्त्र
आहत भ जाइत छैथ अहुंक जननी
जखन कखनहुं लिखल जायत इतिहास
स्त्री आ पुरुष कऽ
अहां कहायब कायर
आ हम सब सहनशील
पुरुष क मदाभिमान क होयत सर्वमर्दन
आ
स्त्री कऽ स्वाभिमान क हैत महिमामंडन
फेर बाजू अहां
कियैक न करू गर्व
हां हम स्त्री छी।
हां नारी छी हम।।

(कवयित्री मैथिली आ हिन्दी मे खूब लिखैत छथि। वर्तमान मे फरीदाबाद, हरियाणा मे निवास करैत छथि।)
