
सीतामढ़ी। मां जानकी केर पावन जन्मभूमि सीतामढ़ी लेल कायाकल्प के क्षण आब नजदीक आबि गेल अछि। करीब 834 बरख पुरान प्रसिद्ध श्रीराम-जानकी मंदिर केर जीर्णोद्धार आ संरक्षणक बाट साफ भ’ गेल अछि।
देशक सांस्कृतिक धरोहरक रक्षा लेल संकल्पित रामायण रिसर्च काउंसिल एहि महत्वपूर्ण परियोजना के आगू बढ़ा रहल अछि। मंदिरक जीर्णोद्धार संग-संग लगभग 12 एकड़ भूमि पर दिव्य आ अलौकिक शक्तिपीठ आ “श्री जानकी शोध संस्थान” के स्थापना सेहो कएल जाएत।
परियोजना के पहिल चरण मे 25 अप्रैल, जानकी नवमी के शुभ अवसर पर बिहारक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा विधिवत भूमि पूजन आ शिलान्यास कएल जाएत। एहि कार्यक्रम के ल’ क’ जोर-शोर सँ तैयारी चलि रहल अछि।
दोसर चरण में, 12 एकड़ परिसर मे 51 शक्तिपीठ सँ ज्योति आनिक’ “महाशक्ति ज्योति” के स्थापना कएल जाएत। एकर संगहि भारतक विभिन्न राज्यक प्रमुख मंदिर सभ सँ पवित्र माटी आ जल सेहो आनल जाएत। मध्यप्रदेशक नलखेड़ा स्थित माता बगलामुखी सिद्धपीठ सँ विशेष ज्योति आनिक’ माता सीता के श्रीभगवती स्वरूप मे स्थापित करबाक योजना अछि। रामायण रिसर्च काउंसिल 2018 सँ एतय भव्य सीता मंदिर निर्माण के दिशा मे लगातार प्रयासरत अछि।
उल्लेखनीय अछि जे अयोध्याक भव्य राम मंदिरक वास्तुकार सोमपुरा सेहो 2022 में सीतामढ़ी पहुंचि क’ निर्माण स्थल के निरीक्षण कएने छलाह। एहि महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत इंडोनेशिया, बाली आ अशोक वाटिका आदि धार्मिक स्थल सभ सँ सेहो माटी आ जल आनबाक योजना अछि, जाहि सँ मंदिर परिसर के आध्यात्मिक महत्व आओर बेसी बढ़ि जायत।
पूर्व मे रामायण रिसर्च काउंसिलक अध्यक्ष चंद्रशेखर मिश्र, अंतरराष्ट्रीय महासचिव कुमार सुशांत, जूना अखाड़ाक महामंडलेश्वर स्वामी विरेंद्रानंद जी, आचार्य संतोष पांडेय, रविकांत गर्ग सहित कतेको धार्मिक आ सामाजिक व्यक्तित निर्माण स्थल के निरीक्षण क’ चुकल छथि।
एहि परियोजना सँ धार्मिक आस्था के मजबूती भेटत, संगहि सीतामढ़ी के वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एकटा नया पहचान सेहो भेटत।