दीपक प्रकाशक संग भेल “खेला”? उपेन्द्र कुशवाहाक राजनीतिक रणनीति पर उठल सवाल

पटना: बिहारक राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) आ ओकर प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा फेर चर्चाक केन्द्र में छथि। राजनीतिक गलियारामे ई सवाल जोर पकड़ि रहल अछि जे आखिर एहन कोन राजनीतिक परिस्थिति बनल जे दीपक प्रकाशक मंत्री पद पर बने रहबाक संभावना कमजोर होइत देखाइ पड़ि रहल अछि।

सूत्रसभक अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा सहयोगी दलसभ केँ एकजुट करबाक प्रयासक अंतर्गत आरएलएम केँ भाजपा में विलय करबाक प्रस्ताव देल गेल छल। मुदा उपेन्द्र कुशवाहा अपन पार्टीक स्वतंत्र पहचान बनौने रखबाक पक्ष में रहला आ विलय प्रस्ताव केँ अस्वीकार कऽ देलनि।

राजनीतिक सूत्रसभक दावा अछि जे नवंबर 2025 में जखन दीपक प्रकाश केँ पहिल बेर मंत्रिमंडल में शामिल कएल गेल छल, तखन सेहो एहन प्रस्ताव सामने आएल छल। हालांकि, ओहि समय उपेन्द्र कुशवाहा विलय लेल तैयार नहि भेलाह, मुदा भाजपा राजनीतिक समीकरण केँ ध्यान में रखैत दीपक प्रकाश केँ मंत्री बनौलक।

सूत्रसभक मानब अछि जे भाजपा केँ उम्मीद छल जे समयक संग बदलैत राजनीतिक परिस्थिति आ पुत्रक राजनीतिक भविष्यक चिंता केँ देखैत उपेन्द्र कुशवाहा अपन निर्णय पर पुनर्विचार करथि। लेकिन कुशवाहा अपन रुख पर कायम छथि।

मंगलदिन आयोजित एकटा पार्टी कार्यक्रम में उपेन्द्र कुशवाहा स्पष्ट रूप सँ कहलनि जे पार्टीक हित व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक हित सँ पैघ होइत अछि। राजनीतिक विश्लेषक एहि बयान केँ महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेतक रूप में देखैत छथि।

सूत्रक मुताबिक उपेन्द्र कुशवाहा भाजपा में पार्टी विलय नहि करबाक निर्णय फेर दोहरौने छथि। हालांकि, हुनकर एनडीए गठबंधन में बने रहबाक संभावना जताओल जा रहल अछि। एहि बीच दीपक प्रकाशक मंत्री पद केँ लऽ कऽ चर्चाक बाजार गर्म अछि।

संवैधानिक प्रावधानक अनुसार मंत्री बनल व्यक्ति केँ निर्धारित समयसीमा के भीतर विधानसभा अथवा विधान परिषदक सदस्य बननाइ आवश्यक होइत अछि। राजनीतिक हलकासभ में चर्चा अछि जे यदि समय पर वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहि होइत अछि, तँ दीपक प्रकाश केवल निर्धारित छह मासक अवधि धरि मंत्री पद पर रहि सकैत छथि।

एखन धरि दीपक प्रकाशक नाम आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लेल एनडीए प्रत्याशी केर रूप में आधिकारिक तौर पर घोषित नहि कएल गेल अछि। हालहि में पत्रकारसभ संग बातचीत करैत ओ 18 जून केँ होमएवाला चुनाव में भाग लेनिहार सभ प्रत्याशी केँ शुभकामना देलनि, मुदा अपन राजनीतिक भविष्य पर कोनो स्पष्ट टिप्पणी नहि कएलनि।

राजनीतिक विश्लेषक सभक अनुसार उपेन्द्र कुशवाहाक सामने वर्तमान समय में पार्टीक स्वतंत्र अस्तित्व बनौने रखबाक आ गठबंधन राजनीति के बीच संतुलन स्थापित करबाक चुनौती अछि। आब देखबाक विषय ई रहत जे आगामी दिनसभ में आरएलएम आ एनडीए के संबंध कोन दिशा में आगाँ बढ़ैत अछि।

फिलहाल बिहारक राजनीतिक गलियारामे सबसे पैघ चर्चा ई अछि जे उपेन्द्र कुशवाहाक राजनीतिक निर्णय दीपक प्रकाशक भविष्य पर कतेक असर डालत, आ कि आगामी समय में कोनो नव राजनीतिक समीकरण सामने आबि सकैत अछि।

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