
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीक (PM Narendra) देशवासी सँ एक बरख धरि शादी-बियाह लेल सोना नहि खरीदबाक अपील देशभर में चर्चा केर विषय बनल अछि। पहिल नजर में ई अपील किछु लोकक लेल अटपटा लागि सकैत अछि, खासकर एहन देश में जतय सोना परंपरा, बचत आ पारिवारिक उत्सवक महत्वपूर्ण हिस्सा रहल अछि। मुदा एहि अपीलक पाछाँ एकटा पैघ आर्थिक चिंता छिपल अछि—वैश्विक ऊर्जा संकट, बढ़ैत आयात बिल आ विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ैत दबाव।
प्रधानमंत्रीक ई बयान मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष आ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ आसपास बढ़ल तनावक बीच आयल अछि। एहि कारण वैश्विक स्तर पर कच्चा तेलक दाम तेजी सँ बढ़िकय करीब 70 डॉलर प्रति बैरल सँ 126 डॉलर प्रति बैरल धरि पहुँच गेल अछि।
प्रधानमंत्री अपन संबोधन में कहलनि, “पूरा दुनिया में पेट्रोल-डीजल बहुत महँग भ’ गेल अछि। ई हम सभक जिम्मेदारी अछि जे ईंधनक बचत कए विदेशी मुद्रा बचाबी।”
एहि क्रम में हुनका देशवासी सँ एक बरख धरि शादी-बियाह लेल सोना नहि खरीदबाक अपील सेहो कएलनि।
तेल संकट में सोना समस्या किएक?
आर्थिक विशेषज्ञक अनुसार भारत लेल कच्चा तेल आ सोना दुनू में एकटा समानता अछि—दुनू केर भारी मात्रा में आयात होइत अछि आ भुगतान अमेरिकी डॉलर में होइत अछि।
भारत अपन जरूरतक करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश सँ मंगबैत अछि। ओतहि भारत दुनियाक सभसँ पैघ सोना आयात करयवला देशसभ में शामिल अछि।
एहन स्थिति में जखन तेलक दाम तेजी सँ बढ़ैत अछि आ सोनाक आयात जारी रहैत अछि, तखन देश केँ अधिक डॉलर खर्च करय पड़ैत अछि। एकरा सँ विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ैत अछि आ रुपया कमजोर होइत अछि।
रुपयाक सेहत पर असर
अर्थशास्त्रक सरल नियम अछि—जखन डॉलरक मांग बढ़ैत अछि तखन रुपया कमजोर होइत अछि।
विशेषज्ञ बतबैत छथि जे बढ़ल तेल आयात बिल आ सोनाक भारी खरीदारी सँ चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ैत अछि। एकर सीधा असर रुपयाक मूल्य पर पड़ैत अछि। कमजोर रुपया फेर इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाई आ अन्य आयातित वस्तु सभ केँ महँग बना दैत अछि।
सरकारक रणनीति: जरूरी बनाम गैरजरूरी खर्च
सरकार तेल आयात नहि रोकि सकैत अछि, किएक तँ ई परिवहन, उद्योग आ बिजली लेल जरूरी अछि। मुदा सोनाक खरीदारी केँ ‘वैकल्पिक खर्च’ मानल जाइत अछि, जे किछु समय लेल टारल जा सकैत अछि।
सरकार चाहैत अछि जे संकट काल में विदेशी मुद्रा केर उपयोग ईंधन जेकाँ जरूरी वस्तु पर हो, नाकि सोना जेकाँ वैकल्पिक खरीदारी पर।
पहिने सेहो उठल छल कदम
ई पहिल मौका नहि अछि जखन सरकार सोनाक आयात कम करबाक प्रयास कएने अछि। 2013 केर आर्थिक संकट दौरान सेहो सोना पर आयात शुल्क बढ़ाओल गेल छल आ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जेकाँ विकल्प सभ केँ बढ़ावा देल गेल छल।
सोनार सभ पर की असर पड़त?
प्रधानमंत्रीक एहि अपील सँ आभूषण व्यवसाय पर अस्थायी असर पड़ि सकैत अछि। शादी-विवाहक मौसम में मांग घटला सँ सोनार आ ज्वेलरी कारोबारी सभक बिक्री प्रभावित भ’ सकैत अछि। मुदा विशेषज्ञ मानैत छथि जे ई एकटा अल्पकालिक चुनौती होयत।
बचत बनल देशभक्ति
आर्थिक जानकारक मानब अछि जे प्रधानमंत्रीक ई अपील केवल सोना नहि खरीदबाक सलाह नहि, बल्कि ‘आर्थिक राष्ट्रवाद’ केर संदेश अछि।
विशेषज्ञक अनुसार, “एक परिवारक बचत छोट लगि सकैत अछि, मुदा 140 करोड़ लोकक सामूहिक बचत देशक विदेशी मुद्रा भंडार लेल मजबूत ढाल बनि सकैत अछि।”
वैश्विक संकट केर एहि दौर में सरकार नागरिक सभ सँ सामूहिक सहयोगक अपेक्षा कए रहल अछि, जाहिसँ देश आर्थिक स्थिरता बनौने राखि सकय।