कृष्णमोहन झा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघक सरसंघचालक मोहन भागवत नागपुरमे सनमार्ग माइंड वेलनेस सेंटरक लोकार्पण समारोहमे अपन संबोधनक दौरान बच्चा सभक मानसिक स्वास्थ्यक विषयमे गम्भीर चिंता व्यक्त कएलनि। हुनकर कहब छल जे आइकाल्हि परिवारमे बच्चा सभक संग आत्मीय संवादक कमी हुनका सभक मानसिक विकास आ भावनात्मक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव छोड़ि रहल अछि। हुनकर स्पष्ट संदेश छल जे बच्चा सभकेँ मोबाइल थमा देबाक बदला हुनका सभक संग समय बिताओल जाए, बातचीत कएल जाए आ अपनापनक वातावरण तैयार कएल जाए।
आइ तकनीक जीवनकेँ आसान अवश्य बना देने अछि, मुदा एकर कारण परिवारक सदस्य सभक बीच संवाद सेहो कम भेल अछि। बहुतो घरमे जखन बच्चा कानैत अछि वा जिद करैत अछि, तँ ओकरा चुप कराबय लेल मोबाइल हाथमे दऽ देल जाइत अछि। ई उपाय तत्काल बच्चाकेँ शांत तँ कऽ दैत अछि, मुदा धीरे-धीरे ओकरा परिवारसँ भावनात्मक रूपेँ दूर कऽ दैत अछि। परिणामस्वरूप बच्चामे एकाकीपन आ असुरक्षाक भावना विकसित होमय लगैत अछि।
मोहन भागवत कहलनि जे पहिने दादी-नानी बच्चा सभकेँ प्रेरणादायक कथा सुनबैत छलीह। एहि कथा सभसँ बच्चा सभक भीतर साहस, आत्मविश्वास, नैतिक मूल्य आ जीवनक चुनौतीसभसँ लड़बाक शक्ति विकसित होइत छल। मुदा संयुक्त परिवारक परंपरा कमजोर पड़लाक कारण आब ई वातावरण बहुत कम देखबाक लेल भेटैत अछि।
हुनकर कहब छल जे आइकाल्हि कतेको बच्चा परीक्षा मे असफल होएबाक बाद अथवा घरमे डाँट खाएबाक कारण मानसिक दबावमे आबि आत्महत्या जेकाँ कठोर कदम उठा लैत छथि। ई स्थिति समाजक लेल गम्भीर चेतावनी अछि। एकर समाधान केवल विद्यालय नहि, बल्कि परिवार आ समाजक सामूहिक प्रयाससँ सम्भव अछि।
संघ प्रमुख स्वस्थ शरीरक संग-संग स्वस्थ आ मजबूत मनक आवश्यकता पर सेहो बल देलनि। हुनकर अनुसार मनुष्यक अनुभव ओकर व्यक्तित्वक निर्माण करैत अछि। सकारात्मक अनुभव आत्मविश्वास बढ़बैत अछि, जबकि नकारात्मक अनुभव मनकेँ कमजोर बना दैत अछि। तेँ बच्चाक पालन-पोषण एहन वातावरणमे होएबाक चाही जतय प्रेम, विश्वास, संवाद आ संस्कारक पर्याप्त स्थान हो।
मोहन भागवत कहलनि जे मनोविज्ञानक आधुनिक अवधारणा भले पश्चिमसँ आयल हो, मुदा भारतमे मन, चेतना आ मानसिक स्वास्थ्यक अध्ययनक समृद्ध परंपरा प्राचीन कालसँ रहल अछि। ज्ञानक पूर्णता आ मनक संतुलनसँ व्यक्ति आ समाज दुनूक कल्याण सम्भव अछि।
सनमार्ग माइंड वेलनेस सेंटरक सराहना करैत हुनका कहलनि जे एहि संस्थानसँ जुड़ल मनोचिकित्सक समाजसेवाक भावनासँ काज कऽ रहल छथि। मानसिक स्वास्थ्यक क्षेत्रमे एहन प्रयास समाज लेल अत्यंत आवश्यक अछि।
आइ जखन बच्चा सभक समयक पैघ हिस्सा मोबाइल, टीवी आ इंटरनेट पर बीतैत अछि, तखन अभिभावकक सबसे पैघ जिम्मेदारी अछि जे ओ बच्चा सभक संग समय बिताबथि, हुनकर बात सुनथि आ विश्वासपूर्ण संवाद कायम करथि। मोबाइल क्षणिक रूपसँ बच्चाकेँ शांत कऽ सकैत अछि, मुदा ओकर व्यक्तित्वक निर्माण केवल परिवारक स्नेह, संस्कार आ आत्मीय संवादसँ संभव अछि। स्वस्थ, आत्मविश्वासी आ संवेदनशील पीढ़ीक निर्माण लेल ई संदेश अत्यंत प्रासंगिक अछि।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक छथि।)
