बसंत कुमार बिस्वास : दिल्ली में वायसराय हार्डिंग पर बम फेकय वला वीर क्रांतिकारी

 

क्रांतिकारी बसंत कुमार बिस्वास अपन भविष्य, करियर, पढ़ाई आ जीवनक मोह त्यागि किशोरावस्थे सँ अंग्रेज सभ सँ भारतक मुक्ति लेल शुरू भेल महायज्ञ में जुड़लाह आ मात्र बीस वर्षक आयु में बलिदान भ’ गेलाह।
राष्ट्रक निर्माण खाली नारा आ भाषण सँ नहि होइत अछि, बल्कि खून आ मजबूत संकल्प सँ होइत अछि। जखन लोहा जेकाँ मजबूत इरादा होइ आ प्राण देबाक संकोच नहि होइ, तखन राष्ट्रक स्वाभिमान ऊँच होइत अछि। बसंत कुमार बिस्वास एहनहि अटूट संकल्पक संग भारतक स्वतंत्रता संग्राम में उतरने छलाह।
हुनकर परिवारक पृष्ठभूमि सेहो बलिदानक रहल अछि। हुनकर पूर्वज दिगंबर बिस्वास इतिहास प्रसिद्ध नील विद्रोहक नेतृत्व कएने छलाह। एहन गौरवशाली परंपरा में बसंत कुमार बिस्वासक जन्म 6 फरवरी 1895 केँ बंगालक नदिया जिलाक पोड़ागाछा गाम में भेल छल। हुनकर पिता मतिलाल बिस्वास सेहो क्रांतिकारी छलाह।
विद्यालयक पढ़ाईक दौरान हुनका शिक्षक रोदचंद्र गांगुली भेटलाह, जे स्वयं क्रांतिकारी संगठन ‘युगांतर’ सँ जुड़ल छलाह। परिवारक संस्कार आ शिक्षकक प्रेरणा सँ बसंत कुमार मात्र चौदह वर्षक आयु में युगांतर संगठन सँ जुड़ि गेलाह। शुरू में हुनका संदेशवाहकक जिम्मेदारी देल गेल।
बाद में हुनकर परिचय अमरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्यायक माध्यम सँ महान क्रांतिकारी Rash Behari Bose सँ भेल। ओहि समय बसंतक आयु मात्र सोलह वर्ष छल। हुनका ‘बिशे दास’ नाम द’ लाहौर पठाओल गेल। लाहौर, दिल्ली आ देहरादून हुनकर गतिविधिक प्रमुख केंद्र बनल।
ओहि समय भारतक वायसराय Charles Hardinge छलाह। यद्यपि ओ अपनाकेँ उदारवादी देखबैत छलाह, मुदा अंग्रेजी शासनक सांस्कृतिक आ शैक्षणिक वर्चस्व बढ़ेबाक योजना पर तेजी सँ काज भ’ रहल छल। एहि विरोध में युगांतर संगठन वायसराय हार्डिंग पर हमला करबाक योजना बनौलक।

11 मई 1915: क्रांतिकारी बसंत कुमार बिस्वासक बलिदान

23 दिसंबर 1912 केँ दिल्ली में वायसराय हार्डिंगक शाही जुलूस पर हमला करबाक निर्णय भेल। इतिहास में ई घटना ‘Delhi Conspiracy Case’ नाम सँ प्रसिद्ध अछि।
योजनाक तहत बसंत कुमार बिस्वास महिला वेश धारण क’ साड़ी पहिरि चाँदनी चौकक एकटा छत पर महिलासभक बीच जा बैसलाह। बम साड़ी में नुकायल छल। जखन वायसरायक हाथी ओहि मकानक सामने पहुँचल, तखन बसंत कुमार बम फेकलनि। बम हाथी पर लागल, मुदा वायसराय बचि गेलाह। जुलूस में अफरा-तफरी मचि गेल। बसंत कुमार तुरंत साड़ी फेकि सामान्य वेश में निकलि गेलाह।
घटनाक बाद ओ देहरादून पहुँचि कम्पाउंडरक नौकरी करए लगलाह। मुदा पुलिस धीरे-धीरे एहि साजिशक सूत्र पकड़ि लेलक। क्रांतिकारी सभ अलग-अलग ठाम छिपि गेलाह। रास बिहारी बोस जापान चलि गेलाह, जबकि बसंत कुमार नाम बदलि कलकत्ता में रहए लगलाह।
1914 में पिताक निधन पर जखन ओ अपन गाम अंतिम संस्कार में भाग लेबाक लेल पहुँचलाह, तखन एकटा विश्वासघातीक सूचना पर पुलिस हुनका गिरफ्तार क’ लेलक। 26 फरवरी 1914 केँ गिरफ्तारीक बाद हुनका कलकत्ता लाओल गेल।
पुलिस छापेमारी में महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद भेल, जाहि सँ समस्त क्रांतिकारी सभक नाम सामने आबि गेल। एहि केस में मास्टर अमीरचंद, अवध बिहारी, भाई बालमुकुंद सहित कुल 13 क्रांतिकारी गिरफ्तार भेलाह।
जिला अदालत बसंत कुमार बिस्वास केँ कम उम्रक कारण आजीवन कारावास सुनौलक। मुदा सरकार अपील कएलक आ बाद में लाहौर हाईकोर्ट हुनका फाँसीक सजा सुना देलक।
8 मई 1915 केँ भाई बालमुकुंद, अमीरचंद आ अवध बिहारी केँ फाँसी देल गेल। एकर तीन दिन बाद, 11 मई 1915 केँ लाहौर जेल में बसंत कुमार बिस्वास फाँसी पर चढ़ा देल गेलाह।
इतिहासक पन्ना पर हुनकर नाम अपेक्षाकृत कम लिखल गेल अछि, मुदा हुनकर बलिदान अमर अछि। जापानक Tokyo नगरक एक पार्क में हुनकर प्रतिमा स्थापित अछि, जाहि केँ रास बिहारी बोस लगबौने छलाह। भारत में सेहो नदिया जिलाक Krishnanagar में हुनकर प्रतिमा स्थापित अछि।
बसंत कुमार बिस्वासक जीवन भारतक युवाशक्ति लेल प्रेरणाक स्रोत अछि। हुनकर बलिदान स्वतंत्रता संग्रामक ओ अमिट अध्याय अछि, जे देशभक्ति, साहस आ समर्पणक सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत करैत अछि।

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