गायत्री मंत्र नैतिक पतनक विरुद्ध सुरक्षा कवच, आंतरिक परिष्कारसँ होयत युग परिवर्तन: डॉ. चिन्मय पण्ड्या

नई दिल्ली। नई दिल्लीक इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियममे अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जीक जन्मशताब्दी आ अखण्ड दीप शताब्दी महोत्सवक तेसर दिन आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक प्रस्तुतिक संग राष्ट्र निर्माणक संकल्पक अनुपम दृश्य देखबाक लेल भेटल। समारोहक शुभारंभ देव संस्कृति विश्वविद्यालयक छात्रासभक मनमोहक सामूहिक नृत्य प्रस्तुतिसँ भेल। छात्रासभ ‘अब नवयुग की गंगोत्री से बही ज्ञान की धारा है’ भक्तिगीत आ ‘लागी रे लगन ओ माँ की’ प्रज्ञागीत पर भावपूर्ण प्रस्तुति देलनि। एहि प्रस्तुतिसँ गुरुदेव-माताजीक आदर्श आ युग निर्माणक चेतना सजीव भऽ उठल।

समारोहक दोसर सत्रमे केंद्रीय स्वास्थ्य आ परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा आत्मपरिवर्तनकेँ राष्ट्र निर्माणक आधारशिला बतौलनि। ओ कहलनि जे परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्यक तप-साधना, करुणा आ लोकमंगलक प्रति समर्पण तथा वंदनीया माताजीक त्यागमय मातृत्व सम्पूर्ण मानवताक लेल प्रेरणाक स्रोत अछि।

श्री नड्डा तीन प्रमुख संकल्प पर विशेष जोर देलनि—व्यक्तिक आत्मपरिष्कार, परिवारमे श्रेष्ठ संस्कारक संवर्धन तथा अपन सामर्थ्य आ संसाधनकेँ समाज आ राष्ट्रक कल्याणमे समर्पित करब। ओ कहलनि जे साधना केवल पूजा-पद्धति धरि सीमित नहि रहबाक चाही, बल्कि सेवा, संवेदना आ सामाजिक उत्तरदायित्वक रूपमे सेहो प्रकट होबाक चाही। नारी शक्ति, युवा शक्ति आ सामाजिक शक्तिक संगठित सहभागितासँ मात्र राष्ट्र निर्माणक संकल्प साकार भऽ सकत।

जन्मशताब्दी समारोहक दलनायक आ देव संस्कृति विश्वविद्यालयक उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या कहलनि जे अराजकता, अधर्म आ नैतिक पतनक वातावरणमे गायत्री मंत्र मनुष्यकेँ भटकावसँ बचबैत विवेक, सद्बुद्धि आ श्रेष्ठ आचरणक दिशा देखबैत अछि। ई केवल उपासनाक मंत्र नहि, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण आ जीवन परिवर्तनक आध्यात्मिक शक्ति अछि।

ओ कहलनि जे राष्ट्रक वास्तविक नव निर्माण बाहरी व्यवस्थासँ नहि, बल्कि व्यक्तिक चिंतन, भावना आ दृष्टिकोणमे सकारात्मक परिवर्तनसँ होयत। आंतरिक परिष्कार श्रेष्ठ परिवार, सशक्त समाज आ समर्थ राष्ट्रक आधारशिला अछि।

जन्मशताब्दी महोत्सवमे देव संस्कृति विश्वविद्यालयक छात्रासभ अपन मनमोहक नृत्य प्रस्तुतिसँ मोहित कयलनि दर्शक

सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर कहलनि जे वास्तविक परिवर्तन केवल विचार व्यक्त करबासँ नहि, बल्कि ओकरा जीवन आ व्यवहारमे उतारबासँ अबैत अछि। ओ सामाजिक संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा, शारीरिक स्वास्थ्य आ मातृशक्तिक सम्मानकेँ समाजक प्रगतिका लेल आवश्यक बतौलनि।

एहि अवसर पर श्री अंतर सिंह आर्य, श्री रमनकांत, श्री मनु गौड़, श्री टी.एस. कल्याणरमन सहित अनेक गणमान्य अतिथि, प्रशासनिक अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि आ विभिन्न देशसँ आयल गायत्री साधक उपस्थित छलाह।

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