
गुवाहाटी। असम के चुनावी रण में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवेश के राजनीतिक हल्का में अलग-अलग नजरिया सों देखल जा रहल अछि। एकरा किछु अनसुलझल समीकरण आ रणनीति स जोड़ल जा रहल अछि, तँ किछु लोग एकरा “केंद्र सं बढ़ैत नजदीकी” के संकेत सेहो मान रहल छथि।
जँ प्रभावशाली आ आदिवासी बहुल सीट सभ के बात करी, तँ संख्या के हिसाब स बंगाल के प्राथमिकता देल जाएत रहल अछि। पिछला चुनाव में झामुमो बंगाल में दांव लगेलक छल, जतय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कड़ा प्रतिक्रिया देलनि। मुदा एहि बेर झामुमो बंगाल दिस देखबो जरूरी नहि बुझलक आ असम के तरफ रुख कएलक।
आंकड़ा बतबैत अछि जे असम में कुल 19 सीट आदिवासी समुदाय खातिर आरक्षित अछि। पिछला चुनाव में भाजपा गठबंधन एही सीट सभ पर बेहतर प्रदर्शन कएने छल, मुदा अधिकांश सीट पर जीत के अंतर लगभग 5 हजार वोट के आसपास रहल। पूरा राज्य के वोट प्रतिशत देखी तँ 2021 में भाजपा गठबंधन के 43.96% आ कांग्रेस गठबंधन के 42.33% वोट भेटल—यानी मात्र डेढ़ प्रतिशत के अंतर।
एहन स्थिति में मुख्य सवाल ई उठैत अछि जे झामुमो असम में अपन स्वतंत्र पहचान बनाबय लेल मैदान में उतरल अछि, या फेर ई भाजपा विरोधी वोट के विभाजित कए अप्रत्यक्ष रूप सत्ताधारी पक्ष के फायदा पहुंचाबय के एक सोची-समझी रणनीति अछि?