
राजगीर (बिहार): भारतक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेलनि आ स्नातक छात्र सभ के संबोधित कएलनि। एहि अवसर पर राष्ट्रपति कहलनि जे दीक्षांत समारोह एक सभ्यतागत संकल्प के पुनर्पुष्टि अछि—ई वादा जे ज्ञान सदिखन कायम रहत, संवाद मजबूत रहत आ शिक्षा मानवता के सेवा करैत रहत। ओ छात्र सभ के बधाई देत कहलनि जे हुनकर उपलब्धि दृढ़ता, अनुशासन आ बौद्धिक समर्पण के परिणाम अछि।
राष्ट्रपति खुशी व्यक्त कएलनि जे एहि वर्ष स्नातक होइत छात्र सभ में आधा सँ बेसी 30 सँ अधिक देशक अंतरराष्ट्रीय छात्र छथि, जे नालंदा के वैश्विक पहचान के दर्शाबैत अछि।
ओ कहलनि जे प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय करीब आठ शताब्दी तक ज्ञान के एक प्रतिष्ठित केंद्र रहल। एकर पतन केवल भारत नहि, बल्कि पूरा विश्व लेल बड़ी क्षति छल। बावजूद एकर, नालंदा के अवधारणा जीवित रहल। आधुनिक समय में एकर पुनरुत्थान राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के प्रतीक अछि।
राष्ट्रपति जोर दैत कहलनि जे ई पुनर्जीवन दूरदर्शी नेतृत्व, निरंतर संस्थागत प्रयास आ विभिन्न देश सभ के सहयोग सँ संभव भेल अछि। ई उदाहरण अछि जे साझा मूल्य के आधार पर विभिन्न राष्ट्र मिलि कए उच्च लक्ष्य हासिल कए सकैत छथि।
Today’s ceremony is a reaffirmation of a civilizational promise: a promise that knowledge shall endure, that dialogue shall prevail, and that learning shall continue to serve humanity. pic.twitter.com/sqnlWWGHxH
— President of India (@rashtrapatibhvn) March 31, 2026
ओ कहलनि जे प्राचीन नालंदा विविध विचारधारा के स्वागत करैत छल आ संवाद आ वाद-विवाद के संस्कृति के बढ़ावा दैत छल। एतय ज्ञान के नैतिकता, समाज आ मानवता सँ जोड़ि कए देखल जाइत छल, जे आजो बहुत प्रासंगिक अछि।
राष्ट्रपति कहलनि जे आज के वैश्विक चुनौतिपूर्ण समय में करुणा पर आधारित स्वतंत्र आ आलोचनात्मक सोच के आवश्यकता बहुत अधिक अछि। ओ विश्वास व्यक्त कएलनि जे नालंदा विश्वविद्यालय एशिया आ विश्व स्तर पर एक अग्रणी शैक्षणिक संस्थान बनत।
ओ भारत आ बौद्ध दर्शन के गहरा संबंध पर जोर दैत कहलनि जे एहि परंपरा के सशक्त बनाबय के आवश्यकता अछि। हुनकर विश्वास अछि जे नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध अध्ययन के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनि सकैत अछि।
राष्ट्रपति कहलनि जे प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपि छल। ओहि विरासत के ध्यान में राखि आज जे निर्माण भ’ रहल अछि, ओ भविष्य लेल अमिट धरोहर साबित होयत। भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बने के दिशा में अग्रसर अछि, आ एहन संस्थान एहि यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएत।