वात्सल्य स्कूलक वार्षिक महोत्सवमे भारतीय संस्कृति, संस्कार, राष्ट्रभाव आ विद्यार्थी सभक प्रतिभाक सुंदर संगम

विदिशा (मध्य प्रदेश) । वरिष्ठ पत्रकार, लेखक आ BSPS केर संस्थापक-अध्यक्ष कृष्ण मोहन झा विद्यार्थी सभकेँ सोशल मीडिया केर बढ़ैत प्रभावक बीच विवेकपूर्ण आ जिम्मेदार व्यवहारक संदेश दैत कहलनि जे, “आइ बच्चा सभक वास्तविक पहचान Followers आ Likes सँ नहि, बल्कि हुनकर व्यक्तित्व, संस्कार आ चरित्र सँ बनबाक चाही।”

ओ वात्सल्य स्कूल, विदिशामे आयोजित गणेश उत्सव आ वार्षिक महोत्सवक अवसर पर विद्यार्थी सभकेँ संबोधित कऽ रहल छलाह। कार्यक्रममे भारतीय संस्कृति, संस्कार, इतिहास, राष्ट्रभाव आ विद्यार्थी सभक प्रतिभाक सुंदर संगम देखबाक लेल भेटल।

कृष्ण मोहन झा कहलनि जे सोशल मीडिया आइ बच्चा सभक जीवनक महत्वपूर्ण हिस्सा बनि गेल अछि। एहन स्थिति मे सोशल मीडिया सँ दूरी बनेबाक आवश्यकता नहि, बल्कि एकर सही आ जिम्मेदार उपयोग बुझबाक जरूरत अछि। सोशल मीडिया ज्ञान प्राप्त करबाक, प्रतिभा देखेबाक आ दुनियासँ जुड़बाक प्रभावी माध्यम भऽ सकैत अछि, मुदा कोनो सूचना के बिना सत्यापन आगाँ बढ़ेनाइ अथवा प्रत्येक बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देनाइ उचित नहि अछि।

ओ कहलनि, “मोबाइल हमर हाथमे एकटा उपयोगी साधन अछि, मुदा ओ हमर दिनचर्या आ सोचकेँ नियंत्रित करय लगय, ई उचित नहि। हमरा सभकेँ तकनीकक उपयोग करबाक अछि, तकनीकक प्रभावमे नहि आबय पड़त।”

गणेश उत्सव सँ जीवन-मूल्यक सीख

गणेश उत्सवकेँ भारतीय संस्कृति आ जीवन-मूल्यसँ जोड़ैत श्री झा कहलनि जे ई केवल धार्मिक आयोजन नहि, बल्कि नव पीढ़ीकेँ भारतीय परंपरा आ संस्कारसँ परिचित कराबयक महत्वपूर्ण अवसर अछि।

भगवान गणेशक व्यक्तित्वमे बुद्धि, विवेक, एकाग्रता, विनम्रता आ धैर्य सन अनेक जीवन-मूल्य देखबा लेल भेटैत अछि। डिजिटल युगमे एहि मूल्य सभक प्रासंगिकता आरो बढ़ि गेल अछि।

ओ विद्यार्थी सभसँ कहलनि जे हुनका सभकेँ केवल नीक अंक प्राप्त करबाक चिंता नहि करबाक चाही, बल्कि अपन व्यक्तित्व, विचार आ चरित्रकेँ सेहो मजबूत बनेबाक प्रयास करबाक चाही। सही शिक्षा, संस्कार, अवसर आ मार्गदर्शन भेटला पर आइक विद्यार्थी आगाँ चलि समाज आ देशकेँ दिशा देनिहार नेतृत्वकर्ता बनि सकैत अछि।

विदिशाक गौरवपूर्ण विरासतकेँ कएलनि स्मरण

विदिशाक गौरवपूर्ण विरासतकेँ स्मरण करैत कृष्ण मोहन झा कहलनि जे एहि क्षेत्रसँ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेनिहार अनेक नेता आ प्रतिभा देशकेँ भेटल छथि। ओ विद्यार्थी सभसँ कहलनि जे आइ एहि ठाम उपस्थित बच्चा सभमे सेहो एहन प्रतिभा अछि, जे भविष्यमे देशक विभिन्न क्षेत्रमे नेतृत्व कऽ सकैत अछि।

ओ कहलनि, “विदिशाक माटि पहिनहु देशकेँ नेतृत्व देनिहार प्रतिभा देने अछि। हमरा विश्वास अछि जे एहि ठाम बैसल बच्चा सभमे सेहो ओ क्षमता अछि, जे आगाँक भारतकेँ दिशा दऽ सकैत अछि।”

‘वात्सल्य’ नाममे निहित अछि शिक्षाक भाव

विद्यालयक संस्थापक देवना अरोड़ा आ नम्रता अरोड़ा केर उल्लेख करैत श्री झा कहलनि जे विद्यालयक नाम ‘वात्सल्य’ अपनेमे स्नेह, ममता, अपनत्व आ संरक्षणक भावना व्यक्त करैत अछि।

ओ कहलनि जे बच्चा सभकेँ केवल पढ़ेनाइ पर्याप्त नहि अछि। हुनका सभक संग स्नेहपूर्ण व्यवहार करैत हुनकर जिज्ञासा बुझनाइ आ उचित दिशा देखेनाइ सेहो शिक्षाक महत्वपूर्ण हिस्सा अछि।

विद्यालय द्वारा वर्षो सँ गणेश उत्सवक माध्यमसँ वार्षिक महोत्सव आयोजित करबाक सराहना करैत ओ कहलनि जे एहन आयोजन भारतीय संस्कृति आ संस्कारकेँ नव पीढ़ी धरि पहुँचाबयक प्रभावी माध्यम अछि।

ओ कहलनि जे डिजिटल युगमे बच्चा सभकेँ आधुनिक तकनीकसँ परिचित करय संगहि हुनका सभकेँ अपन सांस्कृतिक जड़िसँ जोड़ि राखनाइ आ राष्ट्रभावक भावना विकसित करनाइ सेहो महत्वपूर्ण अछि।

योग सँ लऽ कऽ संभाजी महाराज आ भारत माता धरि

कार्यक्रमक शुभारंभ योगक महत्व पर आधारित नाटिकासँ भेल। विद्यार्थी सभ अपन प्रस्तुति द्वारा योगकेँ स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन आ अनुशासित जीवनक आधारक रूपमे प्रभावशाली ढंगसँ प्रस्तुत कएलनि।

तकर बाद छत्रपति संभाजी महाराज केर जीवन, चरित्र आ शौर्य पर आधारित नाटिका प्रस्तुत कएल गेल। विद्यार्थी सभ हुनकर साहस, त्याग आ राष्ट्र एवं धर्मक प्रति समर्पणकेँ मंच पर जीवंत कऽ देलनि।

कार्यक्रमक अंतिम चरणमे भारत माता आ राष्ट्रक प्रति समर्पणकेँ केंद्रमे राखि प्रस्तुत नृत्य-नाटिकासँ पूरा वातावरण राष्ट्रभावसँ भरि गेल। विद्यार्थी सभक प्रस्तुति मे भारतीय इतिहास, संस्कृति आ राष्ट्रप्रेमक सुंदर समन्वय देखबा लेल भेटल।

मेधावी विद्यार्थी सभ भेलाह सम्मानित

एहि अवसर पर शैक्षणिक क्षेत्रमे उत्कृष्ट प्रदर्शन करैत प्रवीण्य सूचीमे स्थान प्राप्त करनिहार विद्यार्थी सभकेँ कृष्ण मोहन झा पुरस्कार प्रदान कऽ सम्मानित कएलनि।

विद्यार्थी सभक उत्साहवर्धन करैत ओ कहलनि जे नीक अंक महत्वपूर्ण अछि, मुदा एकरा सँ बेसी महत्वपूर्ण अछि सीखबाक आदत, अनुशासन आ लगातार बेहतर करबाक प्रयास। सफलता केवल परिणामसँ नहि, बल्कि ओकर पाछाँक मेहनत आ लगनसँ बनैत अछि।

कार्यक्रमक दौरान श्री झा विद्यार्थी सभसँ आत्मीय संवाद सेहो कएलनि। ओ कहलनि जे जँ कोनो बच्चाक मनमे कोनो समस्या, प्रश्न अथवा जिज्ञासा अछि तँ ओ निःसंकोच हुनका सँ संपर्क कऽ सकैत अछि।

ओ कहलनि जे बच्चा सभक जिज्ञासा सुननाइ, हुनकर समस्या बुझनाइ आ उचित दिशा देखेनाइ समाजक सामूहिक जिम्मेदारी अछि।

वात्सल्य स्कूलक ई वार्षिक महोत्सव विद्यार्थी सभक प्रतिभाक संगहि योग, भारतीय इतिहास, संस्कृति, संस्कार आ राष्ट्रभाव केर सुंदर संगम बनि रहल।

आयोजन ई संदेश देलक जे शिक्षा केवल किताबक ज्ञान अथवा परीक्षा मे नीक अंक प्राप्त करबाक नाम नहि अछि। शिक्षाक व्यापक उद्देश्य एहन जिम्मेदार, संवेदनशील, संस्कारवान आ जागरूक नागरिक तैयार करनाइ अछि, जे आधुनिक तकनीक आ बदलैत दुनियाक संग कदम मिलाकऽ चलथि, मुदा अपन संस्कृति आ जीवन-मूल्यसँ सदिखन जुड़ल रहथि।

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