गठनक एक बरख बादो सवालक घेरा मे बिहार राज्य स्वर्ण आयोग, अपेक्षित सक्रियता नहि देखाइ देबाक कारण उठि रहल अछि प्रश्न

पटना। आर्थिक, सामाजिक आ शैक्षणिक रूप सँ पिछड़ल अनारक्षित (सवर्ण) वर्गक हितक रक्षा करब आ हुनकर समस्याक अध्ययन कऽ सरकार केँ ठोस सुझाव देबाक उद्देश्य सँ वर्ष 2025 मे बिहार राज्य स्वर्ण (सवर्ण) आयोग केर पुनर्गठन कएल गेल छल। आयोगक अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह आ उपाध्यक्ष राजीव रंजन केँ सरकार आ सवर्ण समाजक बीच प्रभावी सेतु बनेबाक जिम्मेदारी देल गेल छल। मुदा गठनक लगभग एक बरख बीतला बादो आयोगक दिस सँ एहन कोनो व्यापक पहल, अध्ययन रिपोर्ट वा सार्वजनिक अनुशंसा सामने नहि आबि सकल अछि, जाहि सँ आम लोकनि केँ आयोगक सक्रिय भूमिका स्पष्ट रूप सँ देखाइ दे। एहि कारण आयोगक उपयोगिता आ प्रभावशीलता पर प्रश्न उठए लागल अछि।

जानकार लोकनिक मानब अछि जे आयोगक भूमिका केवल पदाधिकारी नियुक्ति धरि सीमित नहि रहबाक चाही। आयोग केँ आर्थिक रूप सँ कमजोर सवर्ण वर्गक सामाजिक, शैक्षणिक आ आर्थिक स्थिति पर गहन अध्ययन कऽ सरकार केँ ठोस नीति-सुझाव देबाक चाही। एकरा संगहि समाज सँ जुड़ल शिकायत पर संज्ञान लैत समाधान लेल आवश्यक अनुशंसा सेहो करबाक अपेक्षा अछि।

हालक समय मे चर्चित नीट छात्रा प्रकरणभरत तिवारी मुठभेड़ (एनकाउंटर) प्रकरण जेकाँ मामला मे सेहो, यदि आयोग अपन अधिकार-क्षेत्रक भीतर उपलब्ध तथ्यक आधार पर जानकारी एकत्र कऽ पीड़ित पक्षक बात सरकार धरि पहुँचबैत आ आवश्यक सुझाव दैत, तँ सरकार आ समाजक बीच विश्वासक वातावरण आरो मजबूत भऽ सकैत छल। हालांकि, कोनो विशिष्ट मामला मे आयोगक हस्तक्षेपक मूल्यांकन ओकर अधिकार-क्षेत्र आ उपलब्ध तथ्यक आधार परे कएल जाएबाक चाही।

विशेषज्ञक अनुसार आयोग केँ शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास आ सामाजिक उत्थान सँ जुड़ल विषय पर ठोस नीति-सुझाव तैयार करबाक चाही। एकर अतिरिक्त सरकार द्वारा संचालित योजनाक समीक्षा कऽ आवश्यक सुधारक अनुशंसा करब आ समय-समय पर अपन अध्ययन रिपोर्ट सार्वजनिक करब सेहो आयोगक महत्वपूर्ण दायित्व मानल जाइत अछि।

राजनीतिक आ सामाजिक हलका मे ई चर्चा जोरसँ चलि रहल अछि जे यदि बिहार राज्य स्वर्ण आयोग अपन दायित्वक निर्वहन सक्रिय, पारदर्शी आ जनहित आधारित तरीका सँ करैत अछि, तँ ई आयोग अपन गठनक उद्देश्य केँ सार्थक करबाक संगहि सरकार आ सवर्ण समाजक बीच भरोसाक मजबूत माध्यम बनि सकैत अछि। फिलहाल, गठनक एक बरख बाद आयोगक सक्रियता आ उपलब्धिक संबंध मे उठि रहल प्रश्नक वास्तविक जवाब आबए बला समय मे ओकर काजे सँ भेटत।

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